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राजस्थान में पौष बड़ा महोत्सव का आगाज, जानिए क्यों उपयोगी है पौष बड़ा

राजस्थान में पौष कृष्ण प्रतिपदा से शुरू होने वाले पौष बड़ा महोत्सव का आगाज हो गया है। इस महोत्सव के दौरान भगवान के मंदिरों में पौष बड़ा प्रसाद चढ़ाया जाता है। इसमें दाल के पकोड़े और हलवा प्रसाद के रूप में बांटा जाता है।
Kamlesh Keshote
प्रदेश में ऐसी मान्यता है कि सर्दियों के मौसम की शुरुआत के स्वागत के लिए पौष बड़ा महोत्सव मनाया जाता है।
पौष बड़ा नाम के दो शब्द है। एक पौष हिंदू पंचांग का माह है। दूसरा बड़ा जिसका मतलब दाल का नमकीन बढ़ा या पकोड़े।
सर्दियों में पौष के महीने में दाल के बड़े और हलवे का प्रसाद भगवान को चढ़ाया जाता है।
इसकी शुरुआत जयपुर के घाट के बालाजी में बद्रिकाश्रम के महंत बद्री दास के सानिध्य में 1960 में की गई थी।
इसके बाद से जयपुर में और अब पूरे प्रदेश में पौष बड़ा महोत्सव मनाया जाता है। इस महोत्सव को मनाने के लिए लोग पौष माह के किसी भी दिन का चुनाव अपनी सुविधानुसार करते हैं।
इसकी अपनी धार्मिक मान्यताएं भी है। जिसके अनुसार पौष माह में दान को सबसे अच्छा माना जाता है। राजस्थान में पौष बड़ा में इस्तेमाल होने वाली सामग्री को ग्रहों से जोड़कर भी देखा जाता है।
माना जाता है कि शीतकाल में इस प्रसाद को ग्रहण करने से ग्रहों की ऊर्जा इंसान को मिलती है। इससे पौष प्राण संचारित होता है।
स्वास्थ्य के लिहाज से भी इसे उपयोगी माना गया है। सर्दी में इसे ग्रहण करने से उस्मा पैदा होती है। जो सर्दी से बचाव करती है।
इस दौरान महिलाएं मंदिर प्रांगण में भजन कीर्तन करती है। भगवान को आरती कर पौष बड़ों का भोग लगाया जाता है।