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वैज्ञानिकों की चेतावनी और होंगी चमोली बाढ़ जैसी घटनाएं!

IPCC के वर्किंग ग्रुप 2 की ताज़ा रिपोर्ट में वैज्ञानिकों ने पिघलते ग्लेशियरों के बीच चमोली बाढ़ जैसी घटनाएं और होने की बात कही है...
पर्यावरण पर काम करने वाली संयुक्त राष्‍ट्र की संस्था इंटरगवर्नमेंटल पैनल फॉर क्लाइमेट चेंज (IPCC) के वर्किंग ग्रुप 2 ने सोमवार को रिपोर्ट जारी की है। इसमें एशिया पर अलग चैप्टर है।
आईपीसीसी प्रेसवार्ता
भारत पर क्या कहती है रिपोर्ट
रिपोर्ट के एशिया चैप्टर में आईपीसीसी वैज्ञानिकों ने भारत के पहाड़ों पर होने वाले मौसमी बदलाव पर खास फोकस किया है। प्रस्तुत हैं रिपोर्ट के मुख्‍य अंश...
बढ़ते तापमान की वजह से आने वाले समय में पूरे एशिया पर हीट-वेव का प्रभाव बढ़ेगा। इस वजह से हिमालय के हिन्‍दू कुश क्षेत्र के ग्लेशियर तेज़ी से पिघलेंगे।
ग्लेशियर पर रिस्क
ग्लेशियर टूटने या पहाड़ पर नदियों के अचानक उफनाने के कारण हिमालय के निचले हिस्से, यानि हिमाचल, उत्तराखंड में बार-बार बाढ़ आने का खतरा बढ़ गया है।
पहाड़ों पर चल रहीं मानव गतिविधियों के कारण चमोली बाढ़, भूस्खलन जैसी घटनाओं का बढ़ना लाज़मी है। इसे रोकने के लिए कार्बन एमिशन पर नियंत्रण लगाना होगा।
इंफ्रास्ट्रक्चर पर खतरा
वर्ष 2050 तक उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्‍मीर, लद्दाख में इंफ्रास्ट्रक्चर पर प्राकृतिक आपदा का खतरा 69% तक बढ़ जाएगा।
वैज्ञानिकों ने कहा कि हमें यह समझना होगा कि ग्लेशियर के पिघलने और पहाड़ों के ईकोसिस्टम में हो रहे बदलाव reversible नहीं हैं।
पहाड़ों पर खतरा
पृथ्‍वी के बढ़ते तापमान के कारण हीट-वेव की घटनाएं पहले ही बढ़ रही हैं, जिसकी वजह से अचानक मूसलाधार बारिश की घटनाएं हिमालय पर बढ़ेंगी, जिसते इंफ्रास्‍ट्रक्चर को नुकसान हो सकता है। इससे लाखों लोगों की जीविका खतरे में पड़ सकती है।
डॉ. अरोमार रेवी
IPCC लीड ऑथर
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