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काटती है मादा, बदनाम होते हैं नर मच्छर

क्या आप जानते हैं मच्छरों में इंसान का खून पीने वालों में नर मच्छर शामिल नहीं हैं। किसी भी प्रजाति का नर मच्छर इंसानों का खून नहीं पीता है। काटने का काम केवल मादा मच्छर करती हैं।
Chaitanya Das Soni
वैज्ञानिक रिसर्च और तथ्य बताते हैं कि दुनिया का कोई भी नर मच्छर आदमी या पशु को नहीं काटता है। नर मच्छर फल-फूल के रस पर जीवित रहते हैं। काटने की आदत कहें या जरुरत यह सिर्फ मादा मच्छर को होती हैं...
मच्छरों के स्वभाव, दिनचर्या उनके द्वारा फैलाए जाने वाले बुखारों के बारे में जानकारी लेने पर पता चलता है। उन्होंने सबसे दिलचस्प बात यह बताई कि दुनिया का कोई भी नर मच्छर आदमी या पशु को नहीं काटता है। वह तो फलण्फूल के रस पर जीवित रहता है। काटने की आदत या जरूरत मादा मच्छर की होती है और वही मलेरियाए डेंगू एवं फाइलेरिया बुखार का कारण बनती है।
मादा मच्छर मानव या पशु का रक्त केवल इसलिए चूसती है ताकि वह अपनी पीढ़ी को आगे बढ़ा सके। मेडिकल साइंस के अनुसार मादा को रक्त से प्रोटीन की पूर्ति होती है, जिससे उसे गर्भधारण के बाद अपने अंडों को विकसित करने में मदद मिलती है।
मादा मच्छर का जीवनकाल नर मच्छर की अपेक्षा 2 सप्ताह ज्यादा होता है। नर मच्छर 7 दिन में और मादा 3 सप्ताह में मर जाती है, लेकिन मरने से पहले एक हजार तक लार्वा पैदा करती है जो मच्छर बनते हैं।
डेंगू फैलाने में कुख्यात मादा एडीज मच्छर का दायरा सबसे कम होता है। यह केवल 300 से 400 मीटर की दूरी में उड़ती है। इस दायरे में आने वाले व्यक्ति और पशु को काटती है। उसकी प्राथमिकता मनुष्य का शरीर ही होता है।
सबसे ज्यादा दूरी तक उड़ान भरने में दूसरा नंबर मलेरिया की जनक मादा एनॉफिलीज मच्छर का है, जो करीब 2 से 3 किमी तक लोगों को काटती है। यह पशुओं का खून ज्यादा पीती है। तीसरे नंबर पर मादा क्यूलेक्स मच्छर है। जो 7 किमी क्षेत्र में प्रभाव रखती है। मादा एनाफिलीज की तरह यह प्रजाति भी पशु के खून को पसंद करती है।
मच्छरों की ऊंचाई की बात की जाए तो एडीज, एनॉफिलीज और क्यूलेक्स मच्छर सहित तीनों प्रजाति की मादा मच्छर 15 मंजिल इमारत के कमरे तक पहुंच सकती हैं। हालांकि एक उड़ान में वह इतनी ऊंचाई तक नहीं उड़ सकता। यह ऊंचाई वह कई स्टेप में पूरी करती हैं
नर मच्छर, ये इंसानों का खून नहीं चूसते हैं। इंसानी खून को चूसकर संक्रमित करने का काम मादा मच्छर करते हैं, जिसकी वजह से खतरनाक बीमारियां जैसे डेंगू बुखार और मलेरिया फैलाती हैं। नई रिसर्च से दिलचस्प हकीकत का खुलासा हुआ है।
आपके कान के पास भिन-भिनाने वाले मच्छर हमेशा तकलीफदेह होते हैं, लेकिन उनका आपको परेशान करने का कोई इरादा नहीं होता। विशेषकर नर मच्छर, क्योंकि ये इंसानों का खून नहीं चूसते हैं। नई रिसर्च से दिलचस्प हकीकत का खुलासा हुआ है। पता चला है कि नर मच्छर मंडराने के लिए इंसानों की तरफ आकर्षित होते हैं।
वैज्ञानिकों का कहना है कि नर मच्छर इंसानों को मात्र 10 मीटर की दूरी से ढूंढ लेते हैं। उन्होंने इसका कारण कार्बन डाइऑक्साइड बताया है, चूंकि इंसान ऑक्सीजन लेते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड हवा में छोड़ते हैं। मच्छरों को कार्बन डाइऑक्साइड का एहसास हो जाता है और उसके स्रोत की तलाश के चक्कर में इंसानों तक कुछ सेकंड में ही पहुंच जाते हैं।
मच्छरों पर की गई एक रिसर्च के मुताबिक नर मच्छर इंसानों का खून नहीं चूसते हैं, लेकिन ये मादा मच्छरों से आपको परेशान करने में कम नहीं हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि अभी तक यही माना जाता था कि नर मच्छर इंसानों के पास नहीं मंडराते हैं, लेकिन ऐसा मामला नहीं है। ये हाल के रिसर्च में साबित हुआ है, लेकिन उनकी रुचि और उसे जाहिर करने का कारण बिल्कुल अलग है।
इंसानों तक नर मच्छरों के पहुंचने और खून नहीं चूसने के सवाल पर रोशनी डालते हुए वैज्ञानिकों ने बताया कि इसके पीछे मादा मच्छरों की तलाश एक वजह हो सकती है। आमतौर से मादा मच्छर खून चूसने के लिए इंसानों के इर्द गिर्द चक्कर लगाते हैं, इसलिए नर मच्छर प्रजनन के लिए उस जगह के आसपास घूमते हैं।
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