Tap to Read ➤

Indira की सियासी समझ का कमाल, 42 साल पहले 'कांग्रेस का कमबैक' मिसाल

स्वतंत्र भारत के 75 साल के इतिहास में Indira Gandhi देश की एक मात्र महिला प्रधानमंत्री रही हैं। इंदिरा के कार्यकाल को आपातकाल यानी Emergency के लिए जाना जाता है, लेकिन 42 साल पहले 1980 के चुनाव नतीजे आज भी 'कांग्रेस के कमबैक' की मिसाल हैं।
Jyoti Bhaskar

भारत की तीसरी निर्वाचित प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी लगभग 16 साल तक (15 साल 350 दिन) पीएम रहीं।

बांग्लादेश मुक्ति संग्राम भी इंदिरा के कार्यकाल की अहम घटना है। भारतीय सेना ने मार्च, 1971 से 16 दिसंबर, 1971 के बीच अदम्य शौर्य दिखाया।

1971 में इंदिरा के बुलंद फैसले के बाद भारतीय सेना के सामने पाकिस्तान के 93 हजार सैनिकों ने सरेंडर किया।

इंदिरा सरकार के दौरान 14 प्रमुख बैंकों के राष्ट्रीयकरण का फैसला आज भी भारतीय अर्थव्यवस्था के सबसे बुलंद फैसलों में एक माना जाता है।

सियासी रणनीति के मामले में इंदिरा को कई मायनों में मिसाल माना जाता है। इनमें से एक है 1977 की करारी हार के बाद 1980 में 'कांग्रेस का कमबैक'

42 साल पहले इंदिरा के बलबूते 'कांग्रेस का कमबैक' आज भी मिसाल है, जनाक्रोश को जनसमर्थन में बदलने में का करिश्मा करने में कामयाब रहीं इंदिरा जनवरी, 1980 में तीसरी बार प्रधानमंत्री बनीं।

इंदिरा और कांग्रेस का कमबैक इसलिए भी रोचक है क्योंकि उन्होंने 1977 की करारी मात के बाद पहले जनता पार्टी की मोरारजी देसाई की सरकार गिराई। दलित नेता बाबू जगजीवन राम और इंदिरा के  बाद पीएम पद के दावेदार समझे जाने लगे थे।

जनता पार्टी की सरकार गिरने के बाद इंदिरा की कांग्रेस ने चौधरी चरण सिंह को समर्थन दिया और वे पीएम बने, लेकिन सियासत में माहिर महिला- इंदिरा के इरादे कुछ और ही थे।

चंद महीनों पहले इंदिरा के समर्थन से पीएम बने चरण सिंह केवल 170 दिन तक प्रधानमंत्री रहे, और 1980 में घोषित मध्यावधि चुनाव नतीजों में इंदिरा ने जबरदस्त कमबैक किया।

संगठन की मजबूती, मुद्दों की पहचान और तमाम सियासी दांव-पेंच में माहिर राजनेत्री इंदिरा गांधी ने 42 साल पहले कमबैक किया, चार साल 291 दिनों तक प्रधानमंत्री भी रहीं।

भारत की 'आयरन लेडी' की छवि वाली इंदिरा गांधी ने अपने फैसलों के कारण नाराजगी भी झेली। शायद इसी कारण अक्टूबर 1984 में उनकी नृशंस हत्या कर दी गई।

इंदिरा अपने जन्म के 105 साल बाद और शहादत के 38 साल बाद भी प्रासंगिक हैं। उनकी लाइफ पर फिल्म में बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत इंदिरा की भूमका में दिखेंगी।

इमरजेंसी टाइटल की इस फिल्म में इंदिरा के दौर की लेखिका पुपुल जयकर का किरदार भी है। इंदिरा की बहुत करीबी मित्र पुपुल ने उनकी आत्मकथा भी लिखी है। पुपुल का किरदार महिमा चौधरी निभा रही हैं।

पढ़ें ऐसी ही और रोचक कहानी