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IFS अधिकारी विदेशों में क्‍या-क्‍या काम करते हैं?

आईएफएस अधिकारी विदेशों में भारत के आंख, कान और नाक की तरह होते हैं।
vishwanath saini
IFS अधिकारी वैश्विक मंच पर देश के भविष्य को आकार देने का विशेषाधिकार रखते हैं।
IFS की प्रमुख ड्यूटी विदेश में वार्ता, अवलोकन और भारतीय हितों की सुरक्षा करना है।
IFS अफसर पहली श्रेणी के राजनयिक एजेंट हैं। ये पूरी तरह से संप्रभु राज्यों के प्रतिनिधि हैं।
आईएएस अधिकारी को राजनयिक पासपोर्ट (Diplomatic Passport) जारी होता है।

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जबकि आम नागरिकों को साधारण पासपोर्ट जारी किया जाता है।
IFS ऑफिसर दूसरे देशों में अपने देश का प्रतिनिधित्व करते हैं।
आईएफएस के मुख्य काम विदेशी सरकार से अपने सरकार के बीच रिश्ते मजबूत करना।
आईएफएस अधिकारी डिप्लोमेसी से जुड़े और द्विपक्षीय मामलों को हैंडल करते हैं।
आईएफएस अधिकारी विदेशों में सचिव, एम्बेसडर्स व हाई कमिश्नर जैसे पद पाते हैं।
आईएफएस का करियर तीसरे सचिव के रूप में शुरू करता है।
पदोन्‍नति पाकर दूसरा व प्रथम सचिव और राजदूत / उच्चायुक्त / स्थायी प्रतिनिधि भी बनते हैं।
IFS अधिकारी का सर्वोच्च पद विदेश सचिव का होता है, जो भारत से कार्य करता है।
आईएफएस अधिकारी अपने दूतावासों, उच्चायोगों, वाणिज्य दूतावासों, विदेशों में और संयुक्त राष्ट्र संगठन जैसे बहुपक्षीय संगठनों के स्थायी मिशनों में भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं।
आईएफएस ऑफिसर की गाड़ी का नम्बर प्लेट नीला होता है।
आईएफएस ऑफिसर को शुरुआत में 60 हजार से ढाई लाख रुपये तक सैलरी मिलती है।
IFS दिल्ली में विदेश मामलों के मंत्रालय और प्रधान मंत्री कार्यालय के मुख्यालय में भी सेवाएं देते हैं।