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कैसे प्रधानमंत्री बनते-बनते चूके मुलायम सिंह यादव?

समाजवादी पार्टी के संस्थापक और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव का निधन हो गया। वहीं, उनका राजनैतिक सफर भी काफी अच्छा रहा। वहीं, मुलायम सिंह एक समय पर पीएम बनने के प्रबल दावेदार बन गए थे। लेकिन, कुछ कारणों की वजह से वो चूक गए।
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मुलायम सिंह ने अपने शुरुआती जीवन में करियर की शुरुआत दिनों में पहलवानी की। कुश्ती के अखाड़े में मुलायम सिंह कई पहलवानों को पछाड़ देते थे।
पहलवानी के बाद मुलायम सिंह ने अध्यापक की नौकरी की। इस दौरान उन्होंने कुश्ती छोड़ दी।
प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के एक नेता नाथू सिंह ने साल 1967 के चुनाव में जसवंतनगर विधानसभा सीट का उन्हें टिकट दिलवाया था। साथ ही 28 साल की उम्र में वे सबसे कम उम्र के विधायक बने थे।
पहली बार वे 1989 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। इसके बाद वो 1993 में वे दूसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री बने। वहीं, साल 2003 में एक बार मुलायम सिंह सूबे के प्रधान बने।
मुलायम सिंह राजनैतिक करियर में ऐसी पकड़ बनाई कि लोगों ने उन्हें नेताजी के नाम से ही अपना लिया। वहीं, उन्होंने अपने राजनैतिक करियर में ऐसी राह पकड़ी कि वो प्रधानमंत्री के पद के दावेदार भी बन गए थे।
साल 1996 में यूनाइटेड फ्रंट की सरकार में रक्षा मंत्री मुलायम सिंह यादव भारत के प्रधानमंत्री बनते बनते रह गए।
देवेगौड़ा के इस्तीफा देने के बाद नेतृत्व के लिए हुए आंतरिक मतदान में मुलायम सिंह यादव ने जीके मूपनार को 120-20 के अंतर से हरा दिया था।
हालांकि, उनके प्रतिद्वंद्वी दो यादवों लालू और शरद ने उनकी राह में रोड़े अटकाए। वहीं, इसमें चंद्रबाबू नायडू ने भी उनका साथ दिया। इस कारण मुलायम को प्रधानमंत्री का पद नहीं मिल सका।