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Poha का इंदौरी कनेक्शन, स्वाद के साथ बनाता है सेहत

इंदौर और पोहे का खास कनेक्शन है, भले ही पोहे ने इंदौर से निकलकर अब देश दुनिया में अपनी पहचान बना ली हो, लेकिन पोहे की पहचान में इंदौर का अपना अलग ही महत्व है।
Naman Matke
पोहे को महाराष्ट्र और मारवाड़ी लोगों का पारंपरिक व्यंजन माना जाता है। इंदौर में पोहा आजादी के करीब दो साल यानी 1949-50 के बाद आया.
रोजगार की तलाश में इंदौर आए व्यक्ति ने सबसे पहले पोहे की दुकान खोली थी। वहीं अब शहर में हर चौराहे पर एक या इससे ज्यादा पोहे की दुकान है।
शहर में लगभग 60 से 65 टन पोहे की खपत होती है। जहां घर से लेकर होटलों तक सिर्फ और सिर्फ पोहे की डिमांड ही अक्सर लोगों की फरमाइश में होती है।
शादी हो या को कोई अन्य कार्यक्रम, बच्चे का जन्मदिन हो या त्योहार का उत्सव इंदौर में बगैर पोहे कुछ भी संभव ही नहीं है।
स्वाद और सेहत के लिए अलग पहचान रखने वाला इंदौरी पोहा अब वैश्विक स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाने में कामयाब हुआ है।
पोहा बनाने के लिए अलग-अलग रैसिपी का इस्तेमाल भी होता है। इंदौर में पोहे का उपयोग नास्ते के तौर पर सर्वाधिक किया जाता है।
इंदौर की लगभग 95 प्रतिशत जनता की पहली पसंद पोहा है, और यहां के लोगों की सुबह पोहे से शुरु होकर पोहे पर ही खत्म हो जाती है।
बॉलीवुड से लेकर क्रिकेट और राजनीति तक के दिग्गजों को इंदौर का पोहा पसंद आता है। यही कारण है कि सभी इसके स्वाद के दीवाने हैं।
इंदौर में अब अलग अलग तरह से पोहे बनाने भी शुरू कर दिए गए हैं, जिसमें पनीर पोहा, टमाटर पोहा और आलू पोहा प्रसिद्ध है।