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आयुर्वेदिक टिप्स: डायबिटीज और हृदय रोग, रोकथाम एवं उपचार

आयुर्वेद लगभग 5,000 साल पुरानी प्राचीन भारतीय उपचार पद्धति है, जो बिना किसी side effects के कठिन से कठिन बीमारियों का निदान करने में सक्षम है।
एक रिसर्च के मुताबिक डायबिटीज से पीड़ित एक व्यस्क को हृदय से जुड़ी समस्याएं होने की संभावना दो से चार गुना अधिक होती है।
डायबिटीज और हृदय रोग
इसकी वजह ये है कि high blood sugar से हृदय को नियंत्रित करने वाली नसों को नुकसान पहुंच सकता है।
डायबिटीज और हृदय रोग
आयुर्वेद के मुताबिक खाने-पीने की आदतें (आहार) और lifestyle (विहार) स्वास्थ्य पर सीधा असर डालती हैं। इसलिए इनपर ध्यान देना बहुत उपयोगी है।
आहार-विहार
रोकथाम एवं उपचार
फल और सब्जियां, बिना चर्बी वाली प्रोटीन और whole grains का ज्यादा सेवन करें। Processed food का सेवन ना करें, इससे हृदय रोग का जोखिम घटेगा।
अपने सही वजन पर ध्यान दें, शराब से बचें और धूम्रपान छोड़ दें। इससे हृदय रोग का सामना करने में काफी मदद मिलेगी।
वजन कंट्रोल करें
रोकथाम-उपचार
योग और दूसरे व्यायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करें, इससे आपको डायबिटीज को नियंत्रित रखने में सहायता मिलेगी।
आयुर्वेद के जानकारों के अनुसार हृदय रोग से बचाव और उसे मैनेज करने के लिए हफ्ते में कम से कम 2.30 घंटे शारीरिक गतिविधियों में लगाएं। इसमें तेज चलना और योग शामिल है।
डायबिटीज और हृदय रोग
डायबिटीज और हृदय रोग
योग में कई तरह के आसन मददगार साबित हो सकते हैं। जैसे कि सूर्य नमस्कार और प्राणायाम की सहायता से ब्लड प्रेशर, ब्लड ग्लूकोज और हार्ट रेट कम रखी जा सकती है।
आयुर्वेदिक टिप्स
तनाव भी हृदय रोग का एक बड़ा कारण है। आयुर्वेद में तनाव दूर करने के लिए meditation बहुत ही अच्छा विकल्प है। सांस संबंधी क्रियाएं भी बहुत ज्यादा सहायक हैं।
cardiovascular बीमारियों से बचाव और राहत के लिए आयुर्वेद में कई तरह के उपयोगी supplements भी मौजूद हैं।
रोकथाम एवं उपचार
रोकथाम एवं उपचार
आयुर्वेद में पारंपरिक तौर पर करेला, आंवला, जामुन और गुडुची की सलाह दी जाती है।
आयुर्वेद में इन रोगों की रोकथाम और उपचार के लिए और भी चिकित्सा उपलब्ध है। कोई भी उपचार शुरू करने से पहले जानकारों से संपर्क अवश्य करें।
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