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टॉयलेट में मोबाइल का न करें इस्तेमाल, कैंसर का खतरा

मोबाइल की लत जिनको लग जाती है वे वॉशरूम में भी इसको ले जाने से नहीं चूकते। लेकिन इसका बुरा असर होता है।
जिनको सोशल मीडिया, गेम या मोबाइल पर किसी और चीज की लत होती है, वे अक्सर टॉयलेट में फोन साथ ले जाते हैं।
टॉयलेट में शौच करते समय वे मोबाइल का इस्तेमाल करते हैं जो कि सेहत के लिए ठीक नहीं है।
डॉक्टर का कहना है कि शौच करते समय मोबाइल चलाने से ध्यान भटक जाता है।
ध्यान भटकने से शौच करने की पूरी प्रक्रिया डिस्टर्ब हो जाती है जिससे अपच की समस्या होती है।
अपच की समस्या ज्यादा समय तक रहने पर धीरे-धीरे गुदा के आसपास की नसों में सूजन आता है जिससे ब्लीडिंग होने लगती है।
यही नहीं, अगर अपच की समस्या चार-पांच साल तक रही तो बैक्टीरिया इतना पनपता है कि एनोरेक्टल कैंसर भी हो सकता है।
एनोरेक्टल कैंसर गुदा और मलाशय का कैंसर होता है।
अपच की समस्या तब और बढ़ जाती है जब जंक फूड लोग ज्यादा खाते हैं।
अंतिम बात आगे
स्ट्रेस, कम पौष्टक भोजन, खराब जीवनशैली ये सब अपच (कॉन्स्टिपेशन) को बढ़ाते हैं। लंबे समय तक चलने वाला अपच कैंसर बन जाता है।
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