त्रेता युग का है बिहार का ये ऐतिहासिक सूर्य मंदिर, औरंगजेब भी हारा !
त्रेता युग का है बिहार का ये ऐतिहासिक सूर्य मंदिर, मुगल शासक औरंगजेब जुड़ी है कहानी, जानिए
Jyoti Bhaskar
सूर्य नारायण की उपासना के लिए बिहार का मगध क्षेत्र खास तौर पर लोकप्रिय है। इसी इलाके में त्रेता युग का देव सूर्य मंदिर है।
लोक आस्था के महापर्व छठ में इस सूर्य मंदिर में लाखों श्रद्धालु उमड़ते हैं। मान्यता है कि इसका निर्माण खुद भगवान विश्वकर्मा ने किया है
देव सूर्य मंदिर में भगवान सूर्य के उपासक देश-दुनिया से आते हैं। शास्त्रों और पुराणों में भी इस मंदिर का जिक्र मिलता है।
वास्तु और शिल्पकला का अद्भुत नमूना देव सूर्य मंदिर में प्रवेश द्वार पश्चिम दिशा में है। इसका मुगल शासक औरंगजेब से कनेक्शन है।
देव सूर्य मंदिर की बाहरी दीवार पर कई देवी देवताओं के प्रतिरुप अंकित है। विशाल मंदिर के गर्भगृह में तीन मूर्तियां स्थापित हैं।
देव सूर्य मंदिर के पास एक तालाब भी बना हुआ है। मान्यता है कि यहां स्नान करने से श्रद्धालुओं का मन्नत पूरी होती है।
देव सूर्य मंदिर के बारे में मुगल शासक औरंगजेब की लोकश्रुति भी है। मंदिरों को लूटने-तोड़ने पहुंचा औरंगजेब हैरान रह गया जब आधी रात में ही प्रवेश द्वार पश्चिम दिशा में शिफ्ट हो गया। औरंगजेब बेरंग लौट गया।
देव सूर्य मंदिर के निर्माण काल के बारे में शिलापट्ट पर लिखा है कि त्रेता युग में इसका शिलान्यास हुआ था। अभी कलयुग है। 2022 में मंदिर की आयु 9,49,124 साल हो चुकी है।
9.49 लाख साल से अधिक पुराना ऐतिहासिक देव सूर्य मंदिर धार्मिक महत्व का केंद्र है। बिहार में ऐसा ही एक और मंदिर औरंगाबाद के पास उमगा में है। अगली कड़ी में उमगा सूर्य मंदिर की कहानी