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C V Raman : पहले भारत रत्न को 92 साल पहले मिला भौतिकी का नोबेल प्राइज

चंद्रशेखर वेंकट रमन (C V Raman) का जन्म 7 नवंबर, 1888 को दक्षिण भारतीय राज्य तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली में हुआ था। 92 साल पहले फिजिक्स में नोबेल प्राइज जीतने वाले सीवी रमन के बारे में कई रोचक तथ्य हैं जिसे जानकर आज भी गर्व होता है।
Jyoti Bhaskar

सीवी रमन स्वतंत्र भारत में देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान- भारत रत्न पाने वाले पहले वैज्ञानिक बने।

रमन की वैज्ञानिक प्रतिभा ऐसी कि उन्हें दुनियाभर के प्रतिष्ठित संस्थानों से मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया।

1928 में Raman Effect की खोज। शोध के वैज्ञानिक सीवी रमन को फरवरी, 1930 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

सीवी रमन के सम्मान में हर साल 28 फरवरी को नेशनल साइंस डे। फॉरेंसिक साइंस में भी रमन इफेक्ट की उल्लेखनीय भूमिका।

कैंसर जैसी बीमारी के अलावा चांद पर पानी की खोज जैसे वैज्ञानिक अनुसंधान में सीवी रमन के शोध काम आते हैं।

नोबेल विजेता सीवी रमन का मानना था कि विज्ञान की पढ़ाई मातृभाषा में होनी चाहिए, जिससे अधिक से अधिक लोग विज्ञान से जुड़े शोध में भाग ले सकें।

सीवी रमन की शोध के बाद 'रमन इफेक्ट' विज्ञान की दुनिया में शोध का दृष्टिकोण बदलने वाला साबित हुआ।

सीवी रमन के जिस शोध को 'रमन इफेक्ट' कहा गया, उसके बीज उस समय पड़े जब रमन ने समुद्र के पानी का रंग नीला और ग्लास के पानी को बेरंग देखा।

सीवी रमन के योगदान को रेखांकित करने के लिए लोग उनके कथन यानी Quote की मदद लेते हैं। नाकामी विफलता भी है, लेकिन इस पर रमन का कहना है कि प्रकाश औऱ ध्वनि दोनों पर रिसर्च में नाकामी धैर्यवान बनाता है।

82 वर्षीय भारत रत्न सीवी रमन का निधन 21 नवंबर, 1970 को बेंगलुरु में हुआ।

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