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छत्तीसगढ़ में प्रवासी पक्षियों का डेरा, जानिए क्या है रामसर साइट्स

छत्तीसगढ़ में प्रवासी पक्षियों का आगमन ठंड और गर्मी के मौसम में अधिकतर होता है। जिसमें प्रदेश के 8 ऐसे स्थल हैं, जिसे रामसर वेटलैंड साइट्स में शामिल करवाने के प्रयास किये जा रहें हैं।
Manendra
रामसर साइट्स अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की एक आर्द्रभूमि है, जिसे वर्ष 1971 में यूनेस्को द्वारा स्थापित एक पर्यावरण संधि जिसे 'वेटलैंड्स संधि' के रूप में भी जाना जाता है, और इसका नाम ईरान के रामसर शहर के नाम पर रखा गया है।
जहां प्राकृतिक अनुकूलता की वजह से प्रवासी पक्षियों का आना जाना बना रहता है। ये साइट्स अंतरराष्ट्रीय मानकों के आधार पर तय किये जाते हैं।
छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिला स्थित गिधवा-परसदा, दुर्ग के पाटन में बेलौदी, चीचा, बिलासपुर के अचानकमार और रायपुर के गंगरेल बांध से लगे फुटहामूड़ा जलाशय रामसर स्थल के रूप में चुने जा सकते हैं।
"प्रदेश सरकार ने रामसर स्थल की खोज के लिए प्रदेश स्तर पर कमेटी का गठन किया है। देश में 75 स्थल रामसर साइट हैं, जिसमें छत्तीसगढ़ का एक भी स्थल शामिल नहीं है।"
इन जलाशयों में प्राकृतिक अनुकूलता के कारण पोचर्ड, नार्थन, शॉलेवर, गढ़वाल, ब्लैक हेडेड, आइबिस, ग्रेटर स्पॉटेड ईगल, पेंडेंट स्टॉर्क, गुस पेसिफिक, स्पॉट बिल डक, गोल्डन प्लोवर, रेड नेप्ड, ओरियन्टल, डार्टर, इंडियन कमोरेंट, जैसे  विदेशी पक्षी प्रवास करते हैं।
छत्तीसगढ़ का मान बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर की उपलब्धि वाले वैटलैंड के लिए वन विभाग ने सर्वेक्षण भी करा लिया है। वेटलैंड चयन करने के लिए इसरो से रिमोट सेसिंग की मदद मिली है।
वन विभाग द्वारा रिपोर्ट भेजने के बाद इन स्थलों पर भारतीय वन्यजीव संस्थान की टीम जांच के लिए पहुंचेगी, रामसर सूची में शामिल होने से जैव विविधता के संरक्षण में लाभ मिलता है।
साल 2021 में छत्तीसगढ़ में पहले पक्षी महोत्सव की शुरुआत मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पर्यावरण मंत्री मो. अकबर के द्वारा की गई। जिसमें सैकड़ों पक्षी प्रेमियों ने हिस्सा लिया।
ग्राम बेलौदी, गिधवा-परसदा, अचानकमार के इन वेटलैंड्स को अब राज्य सरकार प्रवासी पक्षियों एवं पक्षी प्रेमियों के लिए और भी बेहतर बनाने में लगी है।
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