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भीमकुंड के रहस्य आज भी विज्ञान को दे रहे चुनौती

मप्र के छतपुर जिले के बिजावर में द्वापर युग में भीम की गदा से निर्मित कुंड आज भी रहस्य और किवदंतियों से भरा पड़ा है। कहते हैं कुंड का नीला पानी और इसकी अथाह गहराई वैज्ञानिकों के लिए आज भी चुनौती है।
Chaitanya Das Soni
भीमकुंड को लेकर मान्‍यता है क‍ि यह एक शांत ज्वालामुखी है। अब तक कई भू वैज्ञानिकों ने गोताखोरों द्वारा इसकी गहराई का पता लगाने का प्रयास किया, लेक‍िन क‍िसी को भी कुंड का तल नहीं म‍िला। कहा जाता है क‍ि कुंड की 80 फीट की गहराई में तेज जलधाराएं हैं, जो शायद इसे समुद्र से जोड़ती हैं।
मकुंड को लेकर कहा जाता है कि इसे भीम ने जमीन में गदा मारकर बनाया था। द्वापर युग में वनवास के दौरान द्रोपदी को जंगल के बीच जोर से प्यास लगी थी, आसपास कोई पानी का सोर्स नहीं था। द्रोपदी को प्यास से व्याकुल देख भीम ने जमीन पर गदा से जोरदार प्रहार किया तो जमीन से पानी फूट निकला था। बाद में उसी कुंड को भीमकुंड नाम दिया गया था।
भीमकुंड को लेकर मान्‍यता है क‍ि इसमें स्‍नान करने से त्‍वचा संबंधी गंभीर से गंभीर बीमार‍ियां भी ठीक हो जाती हैं। इसके अलावा क‍ितनी भी प्‍यास लगी हो इसकी तीन बूंदें ही सारी प्‍यास बुझा देती है। इसके अलावा जब भी देश में कोई बड़ा संकट आने वाला होता है, तब इस जलकुंड का जलस्‍तर बढ़ जाता है। यानी क‍ि आपदा का संकेत यह कुंड पहले से ही दे देता है।
भीमकुंड मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले बिजावर में स्थित है। यह रहस्मयी कुंड को भीमकुंड के अलावा नारदकुंड तथा नीलकुंड भी कहा जाता है। यह कुंड अपने भीतर ऐसे विचित्र रहस्यों को छुपाए हुए है जिसे देश-विदेश के बड़े बड़े वैज्ञानिक भी आजतक सुलझा नहीं पाए हैं।
भीमकुंड पहाड़ के चट्टानों के बीच है। इसका आकर गदा कि तरह है। जल बेहद साफ और पारदर्शी नजर आता है। जल कि एक विशेषता यह भी है कि यह माँ गंगा के जल की तरह पावन है और यह भी कभी खराब नहीं होता है। इस कुंड की सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जलस्तर कभी भी कम नहीं हुआ। शोधकर्ता द्वारा इस कुंड को खाली करने के लिये वर्षों तक प्रयास किया परंतु वह इसमें सफल नहीं हुए।
भीमकुंड के ऊपर विष्णुजी और लक्ष्मीजी का एक मंदिर में विद्यमान है। जिस के विपरीत में तीन और छोटे-छोटे मंदिर बने हुए हैं। इन विशेषताओं के अलावा इस कुंड से जुड़े हुए रहस्य इसे काफी विशेष बना देते हैं।
इस कुंड के बारे में कहा जाता है कि यह प्राकृतिक आपदा का संकेत पहले ही दे देता है। आपदा के आने से पहले इस कुंड के जलस्तर में बढ़ोतरी हो जाती है। उछाल आने लगता है। साल 2004 में सुनामी के वक़्त भी इस कुंड के जलस्तर में वृद्धि देखी गई थी। यह रहस्य ही है कि किसी भी प्राकृतिक आपदा के आने से पहले इसके जल स्तर में वृद्धि क्यों हो जाता है।
इस कुंड से जुडी हुई एक और हैरान कर देने वाली बात यह है कि इसमें डूबने वाले व्यक्ति का मृत शरीर कभी नहीं मिल पता। आमतौर पर जब कोई व्यक्ति पानी में डूब जाता है, तो कुछ समय बाद उसका शरीर फूलकर पानी कि सतह पर तैरने लगता है, परन्तु इस कुंड में आज तक जो भी डूबा है उसका शारीर कभी बाहर नहीं आया है।
भीम कुंड के जल को गंगा जल की तरह ही निर्मल माना जाता है दरअसल इस कुंड में मौजूद पानी बहुत ही निर्मल और पारदर्शी होता है, जिससे कुंड बहुत गहराई तक भी नजर आता है। ऐसा माना जाता है कि गंगाजल की तरह ही भीमकुंड के जल में भी कभी कीड़े नहीं पड़ते इसका जल हिमालय से निकलने वाली गंगा की तरह मिनरल वाटर जैसा होता है।
जिन वैज्ञानिकों और गोताखोरों ने इस कुंड की गहराई मापने के लिए कोशिश की है, उनका मानना है कि कुंड के भीतर दो कुएं जैसे बड़े छिद्र हैं। वैज्ञानिकों का मत है कि इनमें से एक कुएं से पानी आता है और दूसरे कुएं कि मदद से बाहर निकल जाता है। लोगों का मानना है कि कुंड का भीतरी संबंध समुंदर के साथ है, जहां से बहुत तेज लहरों के साथ पानी आता-जाता है।
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