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देसी टॉयलेट Vs कमोड, कौन बेहतर

भारतीय टॉयलेट कमोड की तुलना में ज्यादा बेहतर हैं, यह इसकी खूबियों को जानकर आप भी कहेंगे।
आजकल ज्यादातर लोग वॉशरूम में वेस्टर्न कमोड लगवाते हैं लेकिन...
क्या आप जानते हैं कि सेहत के लिए हमारा देसी टॉयलेट वेस्टर्न कमोड से कहीं ज्यादा अच्छा है।
आइए जानते हैं देसी शौचालय की खूबियों के बारे में। आप भी कहेंगे, वाह ये तो वाकई कमोड से बेहतर है।
देसी टॉयलेट में बैठकर शौच करने से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और हाथ-पैर की एक्सरसाइज भी हो जाती है।
देसी टॉयलेट में पेट पर दबाव पड़ता है जो भोजन को पचाने की क्षमता को बढ़ाता है। पेट पूरी तरह साफ होता है।
वेस्टर्न टॉयलेट में पेट पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ता, वहीं पूरी तरह से पेट साफ भी नहीं होता।
वेस्टर्न टॉयलेट में पेपर का इस्तेमाल होता है। इससे पेपर की बर्बादी होती है। देसी टॉयलेट पेपर बचाता है।
वेस्टर्न टॉयलेट में पानी की खपत ज्यादा होती है, देसी टॉयलेट में पानी का इस्तेमाल कम होता है।
देसी टॉयलेट प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए बेस्ट है। इसमें यूटरस पर प्रेशर नहीं पड़ता।
देसी टॉयलेट के इस्तेमाल से प्रेग्नेंट महिलाओं की नॉर्मल डिलीवरी होने में भी मदद मिलती है।
और सबसे अहम बात यह कि देसी टॉयलेट में मल पूरी तरह निकलता है। यह कॉलन, रेक्टल और कोलोरेक्टल कैंसर से बचाता है।
अंतिम बात आगे...
यह तस्वीर 2019 कुंभ मेला के टॉयलेट कैफे की है जहां श्रद्धालु कॉफी पी रहे हैं।
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