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Badrinath Dham : 235 साल बाद शंकराचार्य से जुड़ी परंपरा फिर से...

चार धामों में एक बद्रीनाथ धाम भगवान विष्णु की पूजा और आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र है। 235 साल बाद 21 नवंबर 2022 को शंकराचार्य से जुड़ी परंपरा फिर से निभाई जाएगी। जानिए बाबा बदरी विशाल से जुड़े रोचक तथ्य
Jyoti Bhaskar

आठ मई को श्रद्धालुओं की मौजूदगी में विधि-विधान, मंत्रोच्चार और सेना बैंड की धुनों के साथ खुले थे बद्रीनाथ धाम के कपाट

साल में केवल छह महीने ही खुला रहता है बद्रीनाथ धाम। हिंदू पंचांग की तारीख के आधार पर हर साल लगभग अप्रैल-मई से नवंबर तक आते हैं लाखों श्रद्धालु।

कपाट खुलते और बंद होते समय बद्रीनाथ धाम का मंदिर फूलों और लाइट की झालरों से दुल्हन की तरह सजाया जाता है। कई बार पीएम मोदी कर चुके हैं दर्शन-पूजन।

साल में केवल छह महीने ही खुला रहता है बद्रीनाथ धाम। हिंदू पंचांग की तारीख के आधार पर हर साल लगभग अप्रैल-मई से नवंबर तक।

19 नवंबर को दोपहर 03:35 बजे पर श्री बद्रीनाथ धाम के कपाट बंद। मंदिर परिसर में 15 क्विंटल गेंदे के फूलों से सजावट।

उत्तराखंड में अलकनंदा नदी के किनारे चमोली जिले बद्रीनाथ मंदिर भगवान विष्णु का धाम है। मंदिर की पौराणिक ग्रंथों में भी उल्लेख।

भारी बर्फबारी के कारण बंद किए जाते हैं बद्रीनाथ समेत चारों धामों के कपाट। सर्दी खत्म होने के बाद अप्रैल-मई से चार धामों में उमड़ने लगते हैं श्रद्धालु।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बद्रीनाथ धाम में भगवान विष्णु का वास। पौराणिक कथाओं में भगवान नारायण (विष्णु) ने स्वयं बद्रीनाथ धाम की स्थापना की।

बद्रीनाथ धाम के कपाट बंद होने पर भगवान विष्णु विश्राम करते हैं। केदारनाथ धाम के बाद बद्रीनाथ धाम में भगवान विष्णु के दर्शन-पूजन से सारे पाप मिटने और मोक्ष मिलने की आस्था-मान्यता।

235 साल के बाद बद्रीनाथ में कपाट बंद होते समय शंकराचार्य की मौजूदगी।

आदिगुरु शंकराचार्य जी की पावन गद्दी की अगुवाई करेंगे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज

बद्रीनाथ धाम से 20 नवंबर को देवडोलियां पांडुकेश्वर (जोशीमठ) के लिए रवाना होंगी।

ज्योतिष पीठ के नवनियुक्त शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज की मौजूदगी में बंद होंगे बद्रीनाथ के कपाट

शंकराचार्य के प्रमुख पड़ाओं से गुजर कर 21 नवंबर को जोशीमठ के नरसिंह मंदिर पहुंचेंगे अविमुक्तेश्वरानंद

रिपोर्ट्स के मुताबिक कई दशकों से बंद परंपरा बद्रीनाथ धाम में 235 साल के बाद एक बार फिर शंकराचार्य वाली परंपरा शुरू होने वाली है

चार धामों में शामिल केदारनाथ धाम के कपाट 27 अक्टूबर 2022 को बंद हुए। मोक्षदायिनी मां गंगा का उद्गम स्थल- गंगोत्री धाम के कपाट 26 अक्टूबर, जबकि यमुनोत्री के कपाट 27 अक्टूबर को बंद हो चुके हैं।

गढ़वाल पहाड़ी ट्रैक में स्थित बद्रीनाथ धाम हिंदू धर्मों के चार धामों में एक। चार धाम के तहत उत्तराखंड के ही यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ में तीर्थ पर जाते हैं लाखों श्रद्धालु।

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