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अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट 2008 की जांच टीम को सैल्यूट

इसी टीम की कड़ी मेहनत की वजह से वर्ष 2008 सीरियल बम ब्लास्ट के 38 गुनहगारों को आज मौत की सजा सुनाई गई है
अहमदाबाद की सिविल एवं सेशन कोर्ट ने आज इस मामले में 38 गुनहगारों को मौत की सजा और 11 को उम्रकैद सुनाई है
ऐतिहासिक फैसला
देश में पहली बार एकसाथ 38 लोगों को फांसी की सजा सुनाई गई है। इससे पहले राजीव गांधी हत्याकांड में एकसाथ 26 लोगों को सजा सुनाई गई थी
26 जुलाई 2008
अहमदाबाद में 70 मिनट में 20 जगहों पर 21 बम धमाके हुए जिनमें 56 लोगों की जान गई, जबकि 200 से ज्यादा लोग घायल हुए
27 जुलाई 2008
सूरत में भी सीरियल ब्लास्ट की कोशिश की गई, लेकिन टाइमर में गड़बड़ी की वजह से बम फट नहीं पाए थे।
28 से 31 जुलाई 2008
इस बीच शहर के अलग-अलग इलाकों से 29 बम बरामद किए गए, जिनमें से 17 वराछा में और अन्‍य कतारगाम, महिधरपुरा और उमरा में मिले थे
19 दिन में 30 आतंकी पकड़े गए
स्पेशल टीम ने महज 19 दिनों में 30 आतंकियों को धर दबोचा दबोचा। यह संख्‍या ज्यादा होती, क्योंकि कुछ आतंकी धमाकों के तुरंत बाद पाकिस्तान
भाग गए थे
बनायी गई स्पेशल टीम
तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पेशल टीम गठित की। DGP आशीष भाटिया ने टीम को लीड किया जिसमें शामिल थे अभय चुडास्मा (DCP क्राइम) और हिमांशु शुक्ला (ASP हिम्मतनगर)। इसके अलावा मामलों की जांच तत्कालीन DSP राजेंद्र असारी, मयूर चावड़ा, उषा राडा और वीआर टोलिया को सौंपी गई
पहली गिरफ्तारी
15 अगस्त को इस मामले में पहली गिरफ्तारी हुई। और उसके बाद सभी 35 FIR के आधार पर एक के बाद एक गिरफ्तार‍ियां हुईं। एक साल के भीतर कुल 78 लोगों को अरेस्ट किया गया
एक हज़ार से अधिक गवाह
1100 लोगों की गवाही ली गई। सरकारी वकीलों में एचएम ध्रुव, सुधीर ब्रह्मभट्ट, अमित पटेल और मितेश अमीन, जबकि बचाव पक्ष से एमएम शेख और खालिद शेख आदि शामिल रहे
51 लाख पेज की चार्जशीट
पुलिस ने इस मामले में 51 लाख पेज की चार्जशीट तैयार की, जिसमें 1163 गवाहों की गवाही को वैध रखा गया। 2009 से इसकी सुनवाई सभी कार्य दिवसों में हुई और अंतत: आज फैसला सुना दिया गया
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