Iran US War में Iraq के Proxy Groups जिससे Trump भी घबराते हैं! Gulf में Indians के लिए कैसी चुनौती?
Iran US Tension: अमेरिका के खिलाफ ईरान का क्या है सीक्रेट प्लान, इराक के इन लड़ाकों में क्यों छुपा है राज़? जानिए कैसे सिर्फ लेबनान का हिज़्बुल्लाह ही नहीं, बल्कि इराक के गुप्त शिया सशस्त्र समूह मिडिल ईस्ट की पूरी बाजी पलट रहे हैं। ईरान और अमेरिका के बीच दशकों पुराना तनाव अब एक नए और बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच चुका है। लगातार होती बातचीत और युद्धविराम की कोशिशों के बाद भी दोनों देशों के बीच स्थायी शांति नहीं हो पाई है। इसके पीछे केवल ईरान का परमाणु कार्यक्रम नहीं है, बल्कि मध्य-पूर्व (Middle East) में फैला उसका वो प्रॉक्सी नेटवर्क और व्यापक प्रभाव है, जो अमेरिका और इज़राइल के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बना हुआ है। इस पूरे घटनाक्रम पर भारत की भी पैनी नजर बनी हुई है। खाड़ी देशों (Gulf Countries) में लाखों की संख्या में भारतीय नागरिक काम करते हैं और वहां की थोड़ी सी भी अस्थिरता या युद्ध जैसी स्थिति सीधे तौर पर भारत की विदेश नीति को प्रभावित करती है। इसके साथ ही कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आने वाला उछाल सीधे तौर पर भारतीय अर्थव्यवस्था पर सीधा और बड़ा असर डालता है। यही वजह है कि इराक के इन गुटों की हर हलचल पर ग्लोबल मार्केट और भारतीय रणनीतिकारों की नजरें टिकी हुई हैं। About the Story: The ongoing geopolitical conflict between Iran and the United States hinges on Iran's extensive network of proxy groups across the Middle East. Beyond Hezbollah in Lebanon, powerful Shia militant groups in Iraq act as Iran's shield, challenging US dominance and impacting regional stability, global crude oil prices, and Indian expats.


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