West Bengal Election से पहले SIR पर घमासान!Election Commission का TMC-Mamta को अल्टीमेटम | Explainer
Bengal Election से पहले Election Commission का बड़ा एक्शन! क्या 91 लाख वोटर्स के नाम कटने से बदल जाएगा बंगाल का सियासी समीकरण? जानिए चुनाव आयोग और ममता बनर्जी के बीच बढ़ते इस टकराव की पूरी इनसाइड स्टोरी। पश्चिम बंगाल में चुनाव से ठीक पहले सियासी पारा चढ़ चुका है। इस बार मुकाबला सिर्फ राजनीतिक दलों के बीच नहीं, बल्कि चुनाव आयोग (ECI) और सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बीच सीधा होता दिख रहा है। चुनाव आयोग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि इस बार बंगाल में चुनाव “भय-मुक्त और हिंसा-मुक्त” होंगे, जिसे TMC ने एक सीधा 'अल्टीमेटम' करार दिया है। इस विवाद की सबसे बड़ी वजह है SIR यानी 'Special Intensive Revision'। इस प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची की समीक्षा की गई और करीब 91 लाख नाम हटा दिए गए हैं। ममता बनर्जी और उनकी पार्टी ने इसे “वोटर सप्रेशन” बताया है और आरोप लगाया है कि यह चुनाव को प्रभावित करने की एक सोची-समझी साजिश है। खासकर सीमावर्ती जिलों जैसे मालदा, मुर्शिदाबाद और नदिया में बड़े पैमाने पर नाम हटने से बवाल बढ़ गया है। इस वीडियो में ऋचा पराशर आपको विस्तार से समझाएंगी कि क्या चुनाव आयोग किसी पार्टी को धमका सकता है? भारतीय संविधान का अनुच्छेद 324 आयोग को कितनी शक्ति देता है? और क्या बंगाल का चुनावी इतिहास एक बार फिर खुद को दोहराने जा रहा है? क्या यह टकराव लोकतंत्र के लिए एक नई चुनौती है? जानने के लिए देखें वनइंडिया हिंदी का यह खास वीडियो।


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