By: Oneindia Hindi Video Team
Published : November 21, 2017, 04:39

10 साल तक कमरे में कैद रही युवती को कैसे मिली नहीं जिंदगी, जानिए

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हल्द्वानी। यह व्यथा है उत्तराखंड के हल्द्वानी निवासी स्मिता शाह की। आज स्मिता शाह की उम्र 33 साल हो चुकी है। जिस वक्त स्मिता शाह 22 साल की थी और बीए तृतीय वर्ष की छात्रा थी तो उसके पिता नरेंद्र लाल शर्मा, जो उत्तराखंड सरकार में वायरलेस आफिसर थे, ने मीनाक्षी के हाथ पीले करने की तैयारी प्रारंभ कर दी। परिवार में शादी की तैयारियों का माहौल बना था कि अचानक नरेंद्र लाल शाह को दिल का दौरा पड़ गया और उनका निधन हो गया।

इसके बाद माता का भी देहांत हो गया। स्मिता शाह पूरी तरह से टूट गई और किसी ने उसकी कोई सहायता नहीं, बल्कि स्मिता शाह के अकेली होने का फायदा उठा कर उसके यौन शोषण का प्रयास किया जिसके बाद स्मिता शाह को इनसान से डर लगने लगा और उसने खुद को एक कमरे में बंद कर लिया। वह दस साल तक उसी मकान में कैद रही। लोग उसे खाना दे जाते और वह मानसिक रोगी हो गई थी लेकिन हल्द्वानी की रहने वाली और सहकारी विकास परियोजना में लेखाकार गुंजन बिष्ट उसकी जिंदगी में आई। गुंजन उसे देहरादून में न्यूरो सर्जन के पास ले गई। उपचार के बाद अब स्मिता ठीक हो गई है।

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