IAS Sanjeev Srivastava कौन हैं? भिंड में थप्पड़बाज DM के रूप में फेमस, छात्र पर बरसाए चांटे, VIDEO वायरल
Who is IAS Sanjeev Srivastava: मध्य प्रदेश के भिंड जिले से एक चौंकाने वाला वीडियो सामने आया है, जिसमें जिला मजिस्ट्रेट (DM) और IAS अधिकारी संजीव श्रीवास्तव एक छात्र को बार-बार थप्पड़ मारते दिख रहे हैं। यह घटना 1 अप्रैल 2025 को दीनदयाल डंगरौलिया महाविद्यालय में बीएससी द्वितीय वर्ष की गणित परीक्षा के दौरान हुई थी। तीन महीने बाद यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसने IAS अधिकारी के व्यवहार पर सवाल उठाए हैं।
वीडियो में संजीव श्रीवास्तव एक छात्र, रोहित राठौर, को उसकी सीट से घसीटते और कई बार थप्पड़ मारते नजर आ रहे हैं। उनके हाथ में एक कागज था, जिसके बारे में उनका दावा है कि यह नकल से संबंधित था। एक अन्य वीडियो में श्रीवास्तव छात्र को स्टाफ रूम में ले जाते हैं, जहां वे कागज किसी कर्मचारी को सौंपते हुए राठौर से पूछते हैं, 'तुम्हारा पेपर कहां है?' और फिर दो थप्पड़ मारते हैं।

छात्र का बयान: 'IAS हैं, इसलिए चुप रहा'
रोहित राठौर ने मीडिया को बताया, 'मैं शौचालय गया था और प्रश्नपत्र मेज पर छोड़ दिया था। जब लौटा, तो वह गायब था। तभी कलेक्टर आए। जांच में एक अन्य छात्र के पास दो प्रश्नपत्र मिले। मैं दूसरी मेज पर बैठा था, मेरे पास कोई पेपर नहीं था। सर ने मुझे खड़ा किया, दो थप्पड़ मारे, फिर स्टाफ रूम ले जाकर फिर से मारा।' राठौर ने कहा कि थप्पड़ों से उनके कान में चोट लगी, लेकिन 'वह IAS अधिकारी हैं, इसलिए मैं कुछ नहीं बोल सका।' उन्होंने यह भी बताया कि नकल के आरोप में उन्हें सप्लीमेंट्री परीक्षा देनी पड़ रही है।
IAS अधिकारी का दावा: 'नकल रैकेट की जांच थी'
संजीव श्रीवास्तव ने अपने कृत्य का बचाव करते हुए कहा कि उन्हें कॉलेज में सामूहिक नकल की शिकायत मिली थी। उन्होंने मीडिया को बताया, 'हमने सूचना मिलने पर कॉलेज में जांच की। सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन इस छात्र के पास प्रश्नपत्र नहीं था। सख्ती से पूछताछ करने पर उसने स्वीकार किया कि उसने पेपर बाहर भेजा था। यह कार्रवाई नकल रैकेट को रोकने के लिए थी।' श्रीवास्तव ने जीवाजी विश्वविद्यालय को पत्र लिखकर कॉलेज को परीक्षा केंद्र के रूप में हटाने की सिफारिश भी की है।
कौन हैं भिंड के थप्पड़बाज IAS संजीव श्रीवास्तव?
संजीव श्रीवास्तव का जन्म 27 जून 1968 को मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में हुआ। उन्होंने बीई, एमबीए, और पीजीडीसीए की डिग्री हासिल की है। वह 2011 बैच के मध्य प्रदेश स्टेट सिविल सर्विस (SCS) से भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में प्रोन्नत हुए।
2 मई 2025 से संजीव श्रीवास्तव मध्य प्रदेश के भिंड जिले के कलेक्टर के रूप में कार्यरत हैं। इससे पहले उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दी हैं, जिनमें उमरिया जिला प्रशासन की कमान।
- डिप्टी कलेक्टर, बैतूल: प्रशासनिक अनुभव की शुरुआत।
- आवंटन अधिकारी, संपदा निदेशालय: संपत्ति प्रबंधन से जुड़े कार्य।
- एसडीएम, छतरपुर और बैतूल: उप-मंडल स्तर पर प्रशासनिक जिम्मेदारियां।
- जिला उप प्रबंधक, डीपीआईपी, रायसेन: विकास परियोजनाओं में योगदान।
- उप सचिव: सामान्य प्रशासन, श्रम, जनजाति कार्य, चिकित्सा शिक्षा, और गृह विभाग में कार्य।
- मुख्य कार्यपालन अधिकारी, उमरिया: जिला स्तर पर विकास कार्यों का नेतृत्व।
- मध्य प्रदेश राज्य कौशल विकास एवं रोजगार निर्माण बोर्ड: कौशल विकास और रोजगार सृजन में भूमिका।
- आयुक्त, रोजगार, और उप सचिव, खेल एवं युवा कल्याण, भोपाल: युवा और रोजगार नीतियों में योगदान।
कॉलेज का मालिकाना हक
सूत्रों के मुताबिक, दीनदयाल डंगरौलिया महाविद्यालय का स्वामित्व नारायण डंगरौलिया के पास है, जो मध्य प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के उपनेता हेमंत कटारे के ससुर हैं।
संजीव श्रीवास्तव के पुराने विवाद
यह पहली बार नहीं है जब संजीव श्रीवास्तव विवादों में घिरे हैं। फरवरी 2025 में, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर पीठ ने लोक निर्माण विभाग से जुड़े एक मामले में उनकी कार्यशैली पर सवाल उठाए थे। कोर्ट ने कहा था, 'मुख्य सचिव को तय करना चाहिए कि ऐसे अधिकारी को फील्ड में रखना चाहिए या नहीं।' इसके अलावा, भिंड में तैनात तहसीलदार माला शर्मा ने श्रीवास्तव और गोहद SDM पराग जैन पर मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया है। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर कहा, 'यदि इस उत्पीड़न से मुझे कुछ होता है, तो जिम्मेदारी श्रीवास्तव और जैन की होगी।'
सोशल मीडिया पर आक्रोश
वायरल वीडियो ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं उकसाई हैं। कई यूजर्स ने श्रीवास्तव के व्यवहार को अमानवीय और सत्ता का दुरुपयोग बताया है। एक यूजर ने लिखा, 'लोकतंत्र में अधिकारियों का काम शिक्षित करना है, आतंकित करना नहीं। यह व्यवहार अस्वीकार्य है।'
चंबल क्षेत्र में नकल की समस्या
भिंड और मुरैना जैसे चंबल क्षेत्र के जिले लंबे समय से बोर्ड और विश्वविद्यालय परीक्षाओं में सामूहिक नकल की खबरों के लिए कुख्यात रहे हैं। श्रीवास्तव का दावा है कि उनकी कार्रवाई इस समस्या पर अंकुश लगाने के लिए थी, लेकिन उनके तरीके ने व्यापक विवाद खड़ा कर दिया है।
इस घटना ने प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही और उनके व्यवहार पर सवाल उठाए हैं। हाईकोर्ट की टिप्पणी और तहसीलदार के आरोपों के बीच श्रीवास्तव पर कार्रवाई की मांग तेज हो रही है। यह मामला न केवल भिंड, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है।












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