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'जिंदगी की यही सच्चाई है,मरने के बाद...', सुनेत्रा बनीं डिप्टी CM तो भड़की पब्लिक! अजित पवार पर क्या बोले लोग

Sunetra Pawar Deputy CM: महाराष्ट्र की राजनीति में 31 जनवरी 2026 की शाम एक बड़ा और भावनात्मक मोड़ लेकर आई। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की वरिष्ठ नेता और दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार ने महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। लेकिन यह शपथ सिर्फ सत्ता का नहीं, बल्कि विवादों का भी केंद्र बन गई। अजित पवार के निधन के महज चौथे दिन सुनेत्रा के डिप्टी सीएम बनने पर सोशल मीडिया पर सवालों और तानों की बाढ़ आ गई।

अजित पवार के निधन के बाद इतनी जल्दी फैसला क्यों?

28 जनवरी को बारामती में हुए एक विमान हादसे में अजित पवार का निधन हो गया था। उनके जाने से महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा शून्य पैदा हो गया। उपमुख्यमंत्री का पद खाली हुआ और एनसीपी के भीतर नेतृत्व को लेकर हलचल तेज हो गई। इसी बीच 31 जनवरी को सुनेत्रा पवार को डिप्टी सीएम पद की शपथ दिला दी गई।

Sunetra Pawar Deputy CM

राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने लोकभवन में उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। पूरा कार्यक्रम करीब 12 मिनट चला, लेकिन इसके राजनीतिक और सामाजिक असर लंबे समय तक चर्चा में रहे।

एनसीपी में फैसला कैसे हुआ? (NCP Leadership Decision, Sunetra Pawar)

शपथ से पहले एनसीपी विधायक दल और विधान परिषद सदस्यों की बैठक हुई। इस बैठक में सुनेत्रा पवार को पार्टी नेता चुना गया। डिप्टी सीएम बनने से पहले उन्होंने राज्यसभा सांसद पद से इस्तीफा भी दिया, क्योंकि संविधान के अनुसार कोई व्यक्ति एक साथ संसद सदस्य और राज्य सरकार में मंत्री नहीं रह सकता। हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया की रफ्तार ने कई लोगों को चौंका दिया।

सोशल मीडिया पर गुस्सा क्यों फूटा? (Social Media Reaction, Political Trolls)

अजित पवार के निधन के चौथे दिन ही सुनेत्रा के शपथ लेने पर सोशल मीडिया का एक बड़ा वर्ग नाराज दिखा। कई यूजर्स ने इसे जल्दबाजी बताया। कुछ ने यहां तक लिखा, "देवी जी 12 दिन तो रुक जातीं।" एक अन्य यूजर ने सवाल उठाया कि जब दुख की घड़ी अभी पूरी तरह बीती भी नहीं थी, तो सत्ता की कुर्सी संभालने की इतनी जल्दी क्यों की गई। कुछ लोगों ने इसे राजनीति की "कड़वी सच्चाई" बताया।

वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने कहा कि यह फैसला हड़बड़ी में लिया गया लगता है। उनके मुताबिक एनसीपी के एक तबके को डर था कि कहीं पार्टी की कमान शरद पवार के हाथों में न चली जाए, इसलिए जल्द फैसला किया गया। कुछ नेताओं और विश्लेषकों ने यह भी कहा कि इस कदम से यह संकेत गया है कि फिलहाल एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की संभावनाएं टल गई हैं।

एक यूजर ने कहा, ''आखिर ऐसी भी क्या जल्दी है सुनेत्रा पवार को डिप्टी सीएम पद की शपथ लेने की ?जब अजित पवार की मौत को 3 दिन भी नहीं बीते...प्रहलाद पटेल डिप्टी सीएम पद के लिए सुनेत्रा पवार से कहीं ज्यादा डिजर्विंग थे लेकिन उन्हें नजरअंदाज किया गया। और शरद पवार इस बात को बेहतर तरीके से समझ रहे होंगे कि अब आगे की रणनीति क्या होगी सुनेत्रा पवार का महाराष्ट्र की पहली डिप्टी सीएम बनना यह इशारा देता है यू फिलहाल Ajit Pawar की पार्टी शरद पवार की पार्टी में विलय नहीं कर रही है।"

@DrShashiTweet ने लिखा, "डेथ के तीसरे ही दिन सुनेत्रा पवार उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ले रही हैं। लेकिन जो बाकी बेटियां (पायलट और क्रू) शहीद हुईं-उन्हें क्या मिलेगा? कुर्सी, सत्ता और संवेदनाओं का ये फर्क देश देख रहा है।"

@ZakirAliTyagi ने लिखा, ''जिंदगी की ये ही सच्चाई है कि आपके मरने के बाद आपके अपने भी 3 दिन तक दुख नहीं मनाना चाहते,अभी अजीत पवार को इस दुनिया को अलविदा कहे हुए ढंग से 3 दिन भी नहीं बीते की आज उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार अजीत पवार की कुर्सी पर बैठने के लिए बारामती से मुंबई पहुंच गई हैं,डिप्टी CM के रूप में शपथ लेती हुई दिखाई दीं। तेरे एहबाब तेरे दोस्त तेरे घरवाले, तुझको मिट्टी में मिला देंगे समझता क्या है।''

शरद पवार क्यों नहीं पहुंचे शपथ समारोह में? (Sharad Pawar Statement, NCP Merger)

शपथ ग्रहण समारोह में शरद पवार की गैरमौजूदगी भी चर्चा का विषय बनी। बाद में प्रेस कॉन्फ्रेंस में शरद पवार ने कहा कि उन्हें सुनेत्रा पवार के नाम की जानकारी अखबारों से मिली। उन्होंने यह भी दावा किया कि अजित पवार की इच्छा थी कि एनसीपी के दोनों गुट एक हों। उनके मुताबिक इस पर बातचीत शुरू हो चुकी थी और फरवरी की 12 तारीख तय थी, लेकिन उससे पहले ही अजित पवार का निधन हो गया।

सरकार और सहयोगी दलों ने क्या कहा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर पोस्ट कर सुनेत्रा पवार को शुभकामनाएं दीं और कहा कि वह महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री हैं और राज्य के हित में काम करेंगी। वहीं मंत्री छगन भुजबल ने कहा कि यह एनसीपी का अंदरूनी फैसला है और पार्टी ने सर्वसम्मति से यह कदम उठाया है। शिवसेना नेता संजय निरुपम ने भी इसे पार्टी का आंतरिक मामला बताते हुए अनावश्यक विवाद से बचने की सलाह दी।

राजनीति बनाम संवेदना की बहस क्यों तेज है?

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। क्या राजनीति में संवेदनाओं के लिए जगह बची है, या सत्ता की मजबूरी हर फैसले से ऊपर है। समर्थकों का कहना है कि राज्य को स्थिर नेतृत्व की जरूरत थी, इसलिए पद तुरंत भरा गया। विरोधियों के लिए यह फैसला असंवेदनशील और जल्दबाजी भरा है।

फिलहाल सुनेत्रा पवार महाराष्ट्र की पहली महिला डिप्टी सीएम बन चुकी हैं, लेकिन यह साफ है कि उनका यह राजनीतिक सफर ट्रोलिंग, सवालों और राजनीतिक रणनीतियों के बीच आगे बढ़ेगा। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि यह फैसला उन्हें मजबूती देगा या विवादों का बोझ और बढ़ाएगा।

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