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कोरोना वैक्सीन: ऑक्सफोर्ड ही नहीं, ये 6 वैक्सीन भी पहुंच चुकी हैं थर्ड फेज के ट्रायल में

नई दिल्ली। कोरोना वायरस वैक्सीन का पूरी दुनिया इंतजार कर रही है। वैक्सीन के लिए हमारा इंतजार जल्द खत्म हो सकता है। बहुत सारे फार्मास्युटिकल दिग्गज और स्वतंत्र चिकित्सा समूह लगातार वैक्सीन के निर्माण में लगे हुए हैं। ये कंपनियां एक सुरक्षित और प्रभावी टीका तैयार करने के लिए क्लीनिकल ट्रायल कर रही हैं। ये सभी चिकित्सा ट्रायल महत्वपूर्ण चरण में हैं। ऑक्सफोर्ड के अलावा 6 और कोविड-19 वैक्सीन तीसरे चरण के क्लिनिकल ट्रायल में हैं। जब कोई वैक्सीन तीसरे चरण के ट्रायल को पास कर लेता है। तब उसे उपयोग के लिए पूर्ण सुरक्षित और विश्वसनीय माना जाता है।

विश्व स्तर पर 150 समूह कोविड-19 वैक्सीन बनाने की रेस में

विश्व स्तर पर 150 समूह कोविड-19 वैक्सीन बनाने की रेस में

विश्व स्तर पर 150 समूह कोविड-19 वैक्सीन बनाने की रेस में हैं। जिनमें 35 महत्वपूर्ण मूल्यांकन के विभिन्न चरणों में हैं। वर्तमान में इनमें से नौ तीसरे क्लीनिकल ट्रायल में हैं। अकेले एक वैक्सीन पर भरोसा करना अभी सबसे सुरक्षित दांव नहीं है। जैसा कि हाल ही में ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राज़ेनेका वैक्सीन के क्लिनिकल ट्रायल में देखने को मिला था। ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राज़ेनेका वैक्सीन के मानव परीक्षण में शामिल एक व्यक्ति अचानक बीमार पड़ गया, जिसकी वजह से ट्रायल को कुछ समय के लिए रोकना पड़ा था, हालांकि इसे फिर से शुरू कर दिया गया है। भारत में कोरोना वैक्सीन की डोज तैयार करने वाली कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के प्रमुख अदार पूनावाला ने कहा है कि 2024 से पहले सभी लोगों को देने लायक कोरोना वैक्सीन का निर्माण नहीं किया जा सकेगा। पूरी दुनिया के लोगों तक वैक्सीन पहुंचने में 4-5 साल का समय लग जाएगा। इसलिए, केवल एक के बजाय, हमें उन सभी टीकों की प्रतीक्षा करनी चाहिए जो तीसरे चरण में हैं। ऑक्सफोर्ड वैक्सीन के अलावा ये 6 अन्य वैक्सीन हैं जो तीसरे चरण के ट्रायल में हैं।

    Coronavirus: Oxford के अलावा ये 6 Corona Vaccine भी Third Stage के Trail पहुंची | वनइंडिया हिंदी
    फाइजर-बायोटेक वैक्सीन

    फाइजर-बायोटेक वैक्सीन

    अमेरिकी दिग्गज कंपनी फाइजर, जो जर्मन कंपनी बायोएनटेक के साथ मिलकर एक वैक्सीन पर काम कर रही है। ये वैक्सीन भी तीसरे चरण के परीक्षण में है। इस वैक्सीन का ट्रायल संयुक्त राज्य अमेरिका और जर्मनी के चयनित टेस्ट सेंटर पर किया जा रहा है। फाइजर उन तीन वैक्सीन में से एक है जिसके पीछे अमेरिकी सरकार पैसा खर्च कर रही है। अगर ये वैक्सीन सफल होती है तो सबसे पहले इसके डोज अमेरिकी सरकार को मिलेंगे। वैक्सीन को परीक्षण को कठिन दौर से गुजारा जा रहा है। कंपनी के सीईओ का कहना है कि अब तक के डेटा से वह काफी संतुष्ट हैं और पहले से ही उत्पादन सुविधाओं में सुधार कर चुके हैं। फाइजर की वैक्सीन के तीसरे चरण के ट्रायल अक्टूबर में खत्म हो रहे हैं। अगर यह सुरक्षित और प्रभावी पाई जाती है, तो फाइजर इस साल दिसंबर के अंत तक वैक्सीन प्रोटोटाइप लॉन्च करेगा।

    कैनसिनो बायोलॉजिकल इंक

    कैनसिनो बायोलॉजिकल इंक

    बीजिंग इंस्‍टीट्यूट ऑफ टेक्‍नोलॉजी और कैनसिनो बायोलॉजिकल इंक की वैक्सीन भी तीसरे चरण के ट्रायल से गुजर रही है। चीनी वैज्ञानिकों द्वारा निर्मित प्रमुख वैक्सीन में से यह सबसे अहम वैक्सीन मानी जा रही है। रिपोर्टों के अनुसार, चीन ने अपनी देश में कई हिस्सों में इस वैक्सीन को लोगों को देना शुरू कर दिया है। इसे नवंबर के शुरू में वैश्विक उपयोग के लिए उपलब्ध कराएगा। हालांकि अधिकारियों ने वैक्सीन का नाम बताने से इंकार कर दिया है, लेकिन यह कयास लगाया जा रहा है कि कैनसिनो का प्रोटोटाइप लगातार प्रगति कर रहा है। प्रारंभिक रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वैक्सीन 99% सफल और सुरक्षा प्रतिक्रिया दे रही है, और कोई असामान्य दुष्प्रभाव नहीं देखने को मिला है।

    स्पूतनिक वी टीका

    स्पूतनिक वी टीका

    रूस स्पूतनिक वी नाम की वैक्सीन पर काम कर रहा है। 'स्पूतनिक V' को गैमेलिया रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी एंड माइक्रोबायोलॉजी ने रशियन डायरेक्ट इनवेस्टमेंट फंड (RDIF) के साथ मिलकर तैयार किया है। इस वैक्सीन को पहले और दूसरे ट्रायल के बाद जनता के लिए उपलब्ध करवा दिया गया है। हालांकि वैज्ञानिक तीसरे चरण के लिए 40 हजार लोगों पर टेस्टिंग कर रहे हैं। इस वैक्सीन को जारी किए जाने बाद दुनियाभर की संस्थाओं ने आलोचना की थी। उनका कहना है कि, इसे असुरक्षित तरीके से लोगों के बीच में उपलब्ध करवा दिया गया है। लेसेंट जरनल की हाल ही में पब्लिश हुई रिपोर्ट में सामने आया है कि स्पूतनिक वी ने छोटे ह्यूमन ट्रायल में एंटीबॉडी रिस्पॉन्स दिखाया है, जिसके साथ कोई गंभीर विपरीत नतीजे नहीं मिले हैं। आरडीआईएफ ने क्लिनिकल ट्रायल और देश में स्पूतनिक-वी की 10 करोड़ डोज के वितरण के लिए हैदराबाद स्थित डॉ रेड्डीज़ लैब (डीआरएल) के साथ एक करार किया है।

    जेनसेन फार्मास्यूटिकल्स वैक्सीन

    जेनसेन फार्मास्यूटिकल्स वैक्सीन

    अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन भी कोरोना वैक्सीन बनाने में जुटी हुई है। जॉनसन एंड जॉनसन की एक कंपनी जेनसेन फार्मास्यूटिकल्स ने काफी देरी से कोरोना वैक्सीन के ट्रायल शुरू किए हैं। जो सिंतबर के मध्य तक सेंटर्स पर उपलब्ध होंगे। वैक्सीन के शुरुआती क्लिनिकल ट्रायल में काफी प्रभावी परिणाम देखने को मिले हैं। अन्य कंपनियों के विपरीत जॉनसन वैक्सीन को काफी किफायती बनाने की कोशिश में जुटी हुई है। कंपनी की कोशिश है कि, लोगों को सिर्फ एक टीका लगे। इसके अलावा उन्हें अन्य तरह के टीके लेने की जरूरत ना पड़े। कंपनी इसे किफायती के साथ साथ आसान बनाने की कोशिश में लगी हुई है। कंपनी ने अमेरिकी सरकार और ब्रिटिश के साथ 100 मिलियन खुराक की आपूर्ति के लिए भी सौदे किए हैं। कंपनी अच्छे नतीजे देखने और साल की पहली तिमाही में बड़े पैमाने पर डिलीवरी शुरू करने के लिए आश्वस्त है।

    मॉडर्ना थेरेप्यूटिक्स इंक वैक्सीन

    मॉडर्ना थेरेप्यूटिक्स इंक वैक्सीन

    कोरोना वायरस वैक्सीन विकसित करने वाले फ्रंट रनर्स में से एक अमेरिका की दवा कंपनी मॉडर्ना इंक भी है। मॉडर्ना इंक देशभर में तीसरे चरण की टेस्टिंग कर रही है। कंपनी थर्ड फेज के ट्रायल के मध्य में पहुंच गई है। मॉडर्ना इंक ने अमेरिका में लगभग 30 हजार लोगों को वैक्सीन के डोज दिए हैं। हालांकि यह पहली बार होगा जब मॉडर्ना द्वारा वैक्सीन का उपयोग पब्लिकली किया जाएगा। अमेरिकी बायोटेक कंपनी मॉडर्ना ने कहा है कि उसे सेफ्टी ट्रायल में कोविड वैक्सीन के शानदार नतीजे देखने को मिले हैं। हालांकि कुछ दुष्प्रभाव भी देखने को मिले हैं। लेकिन पहली कंपनी ने हाई रिस्क ग्रुप के लिए वैक्सीन को सुरक्षित घोषित किया है।

    वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ बायोलॉजिकल प्रोडक्ट्स वैक्सीन

    वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ बायोलॉजिकल प्रोडक्ट्स वैक्सीन

    कोरोना वायरस के प्रसार का केंद्र माना जाने वाला चीनी शहर वुहान में एक वैक्सीन का ट्रायल चल रहा है। इसे वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ बायोलॉजिकल कर रहा है। सिनोफार्मा द्वारा विकसित, वैक्सीन प्रोटोटाइप पर वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ बायोलॉजिकल प्रोडक्ट्स काम कर रहा है। यह उन वैक्सीन में से एक है जो क्लिनिकल के ट्रायल के तीसरे चरण पहुंची है। दिलचस्प बात यह है कि, बीजिंग इंस्टीट्यूट ऑफ बायोलॉजिकल प्रोडक्ट्स के सहयोग से सिनोपार्म द्वारा निर्मित एक अन्य वैक्सीन पर भी काम चल रह है। संभावना है कि इसे साल के अंत तक जनता के लिए उपलब्ध करवा दिया जाएगा। इस वैक्सीन की कीमत 150 डॉलर के आसपास बताई जा रही है।

    ऑक्सफोर्ड ने कहा, एस्ट्राजेनेका वैक्सीन की डोज का बीमारी से कोई लिंक नहीं मिला

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