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Remdesivir:कोरोना के खिलाफ कितनी असरदार है ये दवा, देश में क्यों हो गई है किल्लत ? इसके बारे में सबकुछ जानिए

नई दिल्ली, 14 अप्रैल: पिछले कुछ हफ्तों से देश में एकबार फिर से एंटी-वायरल दवा रेमडेसिविर की भयंकर किल्लत हो गई है। इसका इस्तेमाल कोविड-19 के मरीजों के इलाज में किया जा रहा है। लेकिन देश में संक्रमण में आए भारी उछाल के चलते कई राज्यों में यह आसानी से उपलब्ध नहीं है और इसकी जमकर कालाबाजारी की भी खबरें आ रही हैं। लोग सैकड़ों किलोमीटर चलकर कई गुना ज्यादा कीमत देकर अपनों के लिए इस इंजेक्शन का जुगाड़ करने में लगे हुए हैं। हालात बेकाबू होते देख केंद्र सरकार ने इसकी निर्यात पर फौरन पाबंदी लगा दी है। इस दवाई का उपयोग कोविड-19 के गंभीर मरीजों के इलाज के लिए किया जाता है, जिसकी मंजूरी देश के सबसे बड़े ड्रग रेगुलेटर ने आपात स्थिति में पिछले साल जून में दी थी। हालांकि गौर करने वाली बात ये है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपनी ट्रायल में रेमडेसिविर को कोविड मरीजों की मौत रोकने में 'बहुत ही कम या बिल्कुल ही प्रभावी नहीं' पाया है।

रेमडेसिविर क्या है और यह कैसे काम करता है ?

रेमडेसिविर क्या है और यह कैसे काम करता है ?

रेमडेसिविर एंटी-वायरल दवा है जो शरीर के अंदर वायरस के विस्तार को रोकती है। इसे हेपेटाइटिस सी के इलाज के लिए कैलिफोर्निया के गिलीड साइंसेज ने 2009 विकसित किया था। लेकिन, यह इस दवा ने उसपर कभी काम नहीं किया और 2014 तक इसपर रिसर्च चलता रहा। बाद में इसका इस्तेमाल इबोला वायरस के इलाज के लिए शुरू कर दिया गया। तबसे लेकर इस दवाई का उपयोग कोरोना वायरस परिवार के दो रोगों मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (एमईआरएस) और सिवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (एसएआरएस) के उपचार के लिए किया जाने लगा। किसी भी वायरस के आनुवंशिक सामग्री (जेनेटिर मटेरियल) में डीएनए या आरएनए मौजूद रहता है। कोरोना वायरस आरएनए वाला वायरस है। नोवल कोरोना वायरस (कोविड-19 ) इंसानी कोशिकाओं के अंदर मौजूद एंजाइम की मदद से (आरएनए पॉलिमर्स) से अपनी कॉपी तैयार करने लगता है। रेमडेसिविर एंजाइम को रोक देता है, जिससे कोरोना वायरस का विस्तार होना बंद हो जाता है। इसकी वजह से रोग की गंभीरता धीरे-धीरे कम होने लगती है, क्योंकि इसकी वजह से कोरोना वायरस अपना कॉपी तैयार नहीं कर पाता।

भारत में रेमडेसिविर की किल्लत क्यों हो गई है ?

भारत में रेमडेसिविर की किल्लत क्यों हो गई है ?

देश में कोविड-19 की दूसरी लहर की वजह से मरीजों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है, जिनके इलाज के लिए रेमडेसिविर की मांग बहुत ही ज्यादा बढ़ गई है। नवंबर-दिसंबर से रोजाना के नए संक्रमण में आई कमी के बाद से रेमडेसिविर उत्पाकों ने इसका उत्पादन भी घटा दिया था। यही नहीं पिछले 6 महीनों में भारत ने इसके 11 लाख इंजेक्शन 100 से ज्यादा देशों को निर्यात भी कर दिए हैं। ऊपर से जमाखोरी और कालाबाजारी ने समस्या को और भी गंभीर बना दिया है। मायलैन, हेटेरो, जुबिलिएंट लाइफ साइंसेज, सिप्ला, डॉक्टर रेड्डी, जायडस कैडिला और सन फार्मा जैसी सात कंपनियां गिलीड साइंसेज से करार के तहत देश में यह दवा बनाती हैं। इनकी कुल उत्पादन क्षमता हर महीने करीब 38.80 लाख यूनिट है।

रेमडेसिविर की कमी को दूर करने के लिए क्या किया जा रहा है?

रेमडेसिविर की कमी को दूर करने के लिए क्या किया जा रहा है?

पिछले 11 अप्रैल को सरकार ने रेमडेसिविर इंजेक्शन और रेमडेसिविर ऐक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रेडिएंट्स (एपीआई) पर तबतक के लिए निर्यात पर रोक लगा दी है, जबतक देश में हालात नहीं सुधर जाते। केंद्र सरकार ने सभी कंपनियों को अपनी वेबसाइट पर इसकी उपलब्धता और डिस्ट्रीब्यूटर की जानकारी भी प्रमुखता से बताने के लिए कहा है। कोरोना से बुरी तरह से प्रभावित महाराष्ट्र में इसके लिए जिला-स्तर पर कंट्रोल रूम बनाए गए हैं, जो इसकी सप्लाई पर नजर रखेंगे और इसकी जमाखोरी और कालाबाजारी पर रोक लगाएंगे। यहां इसकी कीमत भी 1,200 से 1,400 रुपये तय कर दी गई है। मध्य प्रदेश में आर्थिक तौर पर कमजोर गंभीर मरीजों को इसे मुफ्त में देने का ऐलान किया गया है। गुजरात के सूरत में बीजेपी ने इसकी 5,000 डोज मुफ्त में बांटने का ऐलान किया है, जिसको लेकर विवाद भी हो रहा है।

रेमडेसिविर इंजेक्शन की जरूरत किसे है ?

रेमडेसिविर इंजेक्शन की जरूरत किसे है ?

केंद्र सरकार ने कहा है कि रेमडेसिविर इंजेक्शन सिर्फ कोविड-19 के गंभीर मरीजों को दी जानी चाहिए। सरकार ने यह भी कहा है कि यह सिर्फ अस्पताल में ही लगाई जानी चाहिए और घर पर रह रहे मरीजों को यह नहीं दी जानी चाहिए। नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉक्टर वीके पॉल ने हाल ही में कहा है, 'रेमडेसिविर का सिर्फ उन्हीं को जरूरत है, जिनका अस्पताल में भर्ती होना जरूरी है और जिन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट चाहिए। घरों पर रहने वाले या हल्के मामलों में मरीजों को इसे देने का सवाल ही नहीं है और इसे दवा दुकानों से नहीं खरीदा जा सकता। ' पूरे इलाज के लिए इसकी 6 डोज की आवश्यकता पड़ती है।

क्या रेमडेसिविर कोरोना के इलाज में कारगर है?

क्या रेमडेसिविर कोरोना के इलाज में कारगर है?

पिछले साल अक्टूबर में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जब कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे तो उन्हें इसकी डोज दी गई थी। इससे पहले अमेरिका के फूड एंड एडमिनिस्ट्रेशन ने कोविड-19 के इलाज के लिए इसे पहली दवा के तौर पर मंजूरी दी थी। गिलीड ने रेमडेसिविर पर अमेरिका में 1,062 मरीजों पर जो शोध किया है, उसके आंकड़े बताते हैं कि जिन मरीजों को यह दवा दी गई वह उनकी तुलना में 5 दिन पहले ठीक हो गए जिन्हें प्लैसीबो दी गई थी। इस दवा को 50 से ज्यादा देशों ने कोविड ने इलाज के लिए मंजूरी दी है। लेकिन, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एक ट्रायल में पाया है कि गंभीर मरीजों के केस में इसका बहुत ही कम या कोई भी असर नहीं देखा गया है।

रेमडेसिविर का क्या साइड इफेक्ट हो सकता है?

रेमडेसिविर का क्या साइड इफेक्ट हो सकता है?

रेमडेसिविर के इस्तेमाल से लिवर प्रभावित हो सकता है, एलर्जी हो सकती है, ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट में उतार-चढ़ाव हो सकता है, खून का ऑक्सीजन लेवल कम हो सकता है, बुखार, सांस में कमी, सांस लेने में दिक्कत, दाने, मिचली, होंठों, आंखों के आसपास या त्वचा के नीचे सूजन और पसीना या कंपकंपी जैसी परेशानी आ सकती है।

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English summary
How effective is Remdesivir in the treatment of Covid, to whom patients should be given, why it has suddenly become scarce in India, what are its side effects
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