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क्या है गरबा और नवरात्रि का स्वीट कनेक्शन?

नवरात्रि आयी नहीं की गरबा नृत्य शुरू हो जाता है, क्या लड़के क्या लड़कियां, क्या बच्चे और क्या बूढे हर उम्र के लोग डांडिया खेलने लगते हैं। बेहद ही खूबसूरत और पारंपरिक अंदाज में सजे लोग इस नृत्य को बेहद ही खूबसूरती से अंजाम देते हैं। लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि आखिर गरबा नवरात्रि के ही वक्त क्यों होता है, आखिर क्या है नवरात्रि और गरबा का स्वीट कनेक्शन।

नवरात्रि 2015 विशेष- जानिए घटस्थापना के मुहूर्त

आज हम आपको यही बताने जा रहे हैं... आपको बता दें कि वैसे तो गरबा गुजरात, राजस्थान और मालवा प्रदेशों में प्रचलित एक लोकनृत्य है लेकिन इसे करने वाले सबसे ज्यादा गुजराती होंते हैं।

नवरात्र से है खास कनेक्शन..

गरबा को लोग पवित्र परंपरा से जोड़ते हैं और ऐसा कहा जाता है कि यह नृत्य मां दुर्गा को काफी पसंद हैं इसलिए नवरात्रि के दिनों में इस नृत्य के जरिये मां को प्रसन्न करने की कोशिश की जाती है। इसलिए घट स्थापना होने के बाद इस नृत्य का आरंभ होता है। इसलिए आपको हर डांडिया नाईट में काफी सजे हुए घट दिखायी देते हैं। जिस पर दिया जलाकर इस नृत्य का आरंभ किया जाता है। यह घट दीपगर्भ कहलाता है और दीपगर्भ ही गरबा कहलाता है।

गरबा और नवरात्रि के स्वीट कनेक्शन की और बातें पढ़ने के लिए नीचे की स्लाइडों पर क्लिक कीजिये...

पारंपरिक विधा

पारंपरिक विधा

गुजरात में नवरात्रों के दिनों में लड़कियां कच्चे मिट्टी (दीपगर्भ) के सछिद्र घड़े को फूलपत्तियों से सजाकर उसके चारों ओर नृत्य करती हैं।

सौभाग्य का प्रतीक

सौभाग्य का प्रतीक

गरबा सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है और अश्विन मास की नवरात्रों को गरबा नृत्योत्सव के रूप में मनाया जाता है।

पहली रात्रि को गरबा की स्थापना

पहली रात्रि को गरबा की स्थापना

नवरात्रों की पहली रात्रि को गरबा की स्थापना होती है। फिर उसमें चार ज्योतियाँ प्रज्वलित की जाती हें। फिर उसके चारों ओर ताली बजाती फेरे लगाती हैं।

ताली, चुटकी, खंजरी, डंडा, मंजीरा

ताली, चुटकी, खंजरी, डंडा, मंजीरा

गरबा नृत्य में ताली, चुटकी, खंजरी, डंडा, मंजीरा आदि का ताल देने के लिए प्रयोग होता हैं और लोग देवी गीत गाते हैं।

गरबा में ग्लैमर

गरबा में ग्लैमर

आधुनिक परिवेश ने गरबा को ग्लैमर में भर दिया है... आज लोग गरबा नाइट और डांडिया नाइट का मजा लेते हैं।

पारंपरिक वेशभूषा

पारंपरिक वेशभूषा

लडकियाँ चनिया-चोली पहनती हैं और साथ मे विविध प्रकार के आभूषण पहनती हैं, तथा लडके गुजराती केडिया पहन कर सिर पर पगडी बांधते हैं।

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