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Varuthini Ekadashi 2019: ऐसा कोई काम नहीं जो वरूथिनी एकादशी व्रत से पूरा ना होता हो

By Pt.gajendra Sharma
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नई दिल्ली।वैशाख माह के कृष्णपक्ष की एकादशी को वरूथिनी एकादशी कहा जाता है। जो लोग वैशाख स्नान कर रहे हैं, उनके लिए यह एकादशी बहुत महत्वपूर्ण है। पद्म पुराण में इस एकादशी का महत्व बताते हुए यहां तक कहा गया है कि संसार में ऐसा कोई कार्य नहीं, ऐसी कोई इच्छा नहीं जो वरूथिनी एकादशी व्रत करने से पूरी ना होती हो। अर्थात जो मनुष्य वरूथिनी एकादशी का व्रत करता है वह पृथ्वी पर रहते हुए समस्त प्रकार के सुख भोगता है। सांसारिक भोगों के अलावा मनुष्य अपना परलोक भी इस एकादशी का व्रत करने से सुधार लेता है। विवाह की कामना से यदि युवक-युवती यह व्रत करें तो उन्हें शीघ्र ही योग्य जीवनसाथी प्राप्त होता है। आर्थिक संकटों से जूझ रहे लोग यदि यह व्रत करेंगे तो उनके आय के साधनों में वृद्धि होगी। इस एकादशी को करने से दांपत्य जीवन भी सुखी होता है।

वरूथिनी एकादशी की कथा

वरूथिनी एकादशी की कथा

पुराण कथा के अनुसार एक समय नर्मदा किनारे एक राज्य था जिस पर राजा मांधाता राज किया करते थे। राजा बहुत ही धर्मात्मा थे और उनकी दालशीलता की ख्याति दूर-दूर तक फैली हुई थी। वे भगवान विष्णु के अनन्य उपासक थे। एक बार राजा जंगल में तपस्या के लिए गए और एक विशाल वृक्ष के नीचे आसन लगाकर तपस्या में लीन हो गए। उसी दौरान एक विशाल जंगली भालू ने उन पर हमला कर दिया और राजा के पैरों को अपने जबड़े में दबाकर चबाने लगा। तपस्या में होने के कारण मांधाता संयमपूर्वक बैठे रहे। जब भालू उन्हें घसीट कर ले जाने लगा तो राजा ने तपस्वी धर्म का पालन करते हुए क्रोध नहीं किया और भगवान विष्णु से इस संकट से रक्षा करने की विनती की। राजा की तपस्या से प्रसन्न् भगवान विष्णु तुरंत प्रकट हुए और भालू को अपने सुदर्शन चक्र से मार दिया लेकिन तब तक भालू राजा के पैर को लगभग पूरा चबा चुका था। राजा बहुत दुखी थे दर्द में थे। भगवान विष्णु ने कहा कि वत्स परेशान ना हो वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी पर मेरे वराह रूप की पूजा करना। व्रत के प्रताप से तुम पुन: संपूर्ण अंगों वाले हष्ट-पुष्ट हो जाओगे। भालू ने जो भी तुम्हारे साथ किया यह तुम्हारे पूर्वजन्म के पाप का फल है। इस एकादशी के व्रत से तुम्हें सभी पूर्व जन्म के पापों से भी मुक्ति मिल जाएगी। मांधाता ने व्रत किया और वह पूर्व की तरह स्वस्थ हो गया। व्रत के प्रताप से राजा की कीर्ति भी चारों ओर फैल गई और उसका राज्य समृद्ध राज्य बन गया।

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व्रत की विधि

व्रत की विधि

वरूथिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के वराह रूप की पूजा का विशेष महत्व है। एकादशी का व्रत रखने के लिए दशमी के दिन रात्रि भोजन ना करें। दशमी के दिन उड़द, मसूर, चना, शाक, शहद, किसी दूसरे का दिया हुआ अन्न् या भोजन ग्रहण नहीं करना चाहिए। एकादशी के दिन प्रात:काल स्नानादि के पश्चात सूर्य को अर्घ्य दें और व्रत का संकल्प लेकर भगवान विष्णु के वराह अवतार की पूजा करें और वरूथिनी एकादशी व्रत की कथा सुनें। द्वादशी के दिन किसी योग्य ब्राह्मण को भोजन करवाकर दान-दक्षिणा देकर व्रत का पारण करें।

वरूथिनी एकादशी तिथि व मुहूर्त

वरूथिनी एकादशी तिथि व मुहूर्त

  • 30 अप्रैल 2019, मंगलवार
  • एकादशी तिथि प्रारंभ 29 अप्रैल : रात्रि 10.04 बजे से
  • एकादशी तिथि समाप्त 30 अप्रैल : मध्यरात्रि बाद 12.17 तक
  • पारण 1 मई को प्रात: 06.44 से 08.21 बजे तक

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English summary
Varuthini Ekadashi, also known Baruthani Ekadashi, is a Hindu holy day, which falls on the 11th lunar day of the fortnight of the waning moon in the Hindu month of Chaitra. here is Date, Puja Vidhi and Muhurat.
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