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जोड़े से पूजा करते समय इन बातों का ध्यान रखें, वरना नहीं मिलेगा पूरा फल

By Pt. Gajendra Sharma
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नई दिल्ली। कई लोग अक्सर सवाल करते हैं कि उन्होंने पूरे विधि-विधान से कोई पूजा संपन्न् कराई लेकिन उसका पूरा फल नहीं मिला। पूजा का कोई शुभ असर नहीं हुआ, उल्टा नुकसान होने लगा। ऐसी बातों का केवल एक ही जवाब है कि पूजा पाठ, यज्ञ, हवन आदि यदि आप जोड़े से कर रहे हैं तो कुछ नियमों का पालन करना जरूरी है अन्यथा पूजा का पूरा फल नहीं मिलता है..आइए जानते हैं क्या हैं वे नियम.......

शुभ कर्म में दोनों की खुशी और सहमति

शुभ कर्म में दोनों की खुशी और सहमति

परिवार में अक्सर कोई पूजा, यज्ञ, हवन आदि का आयोजन कर तो लिया जाता है, लेकिन उसमें पति या पत्नी में से किसी एक की भी असहमति होने या बेमन से पूजा करने से उसका पूरा फल नहीं मिल पाता है। इसलिए जरूरी है कि परिवार में जो भी पूजा पाठ किया जा रहा है उसे खुले और पवित्र मन से करेंगे तो शुभ परिणाम मिलना सुनिश्चित हो जाता है। इसके लिए पूजा से पहले पति-पत्नी दोनों शुभ संकल्प बोलते हुए कार्य करें।

पति के किस ओर बैठे पत्नी

पति के किस ओर बैठे पत्नी

धर्म-कर्म के कार्य और पूजा पाठ के समय अक्सर यह प्रश्न उठता है कि पत्नी को पति के किस ओर बैठना चाहिए। पति के दायीं ओर बैठना उचित है या बायीं ओर। जानकारी के अभाव में अक्सर गलत साइड बैठने के कारण पूजा पाठ का पूर्ण फल नहीं मिल पाता है। शास्त्रों में पत्नी को वामांगी कहा गया है, जिसका अर्थ होता है बाएं अंग की अधिकारी। इसलिए पुरुष के शरीर का बायां हिस्सा स्त्री का माना जाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि स्त्री पुरुष की वामांगी होती है इसलिए सोते समय, सभा में, सिंदूरदान, द्विरागमन, आशीर्वाद ग्रहण करते समय और भोजन के समय स्त्री पति के बायीं ओर रहना चाहिए। इससे शुभ फल की प्राप्ति होती। लेकिन वामांगी होने के बावजूद कुछ कामों में स्त्री को दायीं ओर रहने की बात शास्त्र कहते हैं। शास्त्रों में बताया गया है कि कन्यादान, विवाह, यज्ञकर्म, जातकर्म, नामकरण और अन्न्प्राशन के समय पत्नी को पति के दायीं ओर बैठना चाहिए। इस मान्यता के पीछे तर्क यह है कि जो कर्म सांसारिक होते हैं उसमें पत्नी पति के बायीं ओर बैठती है। क्योंकि यह कर्म स्त्री प्रधान कर्म माने जाते हैं। यज्ञ, कन्यादान, विवाह ये सभी काम पारलौकिक माने जाते हैं और इन्हें पुरुष प्रधान माना गया है। इसलिए इन कर्मों में पत्नी के दायीं ओर बैठने का नियम है। इसलिए जिस कार्य के लिए जो दिशा तय है उसी ओर बैठकर संबंधित कर्म करेंगे तो पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होगा।

वेदपाठी ब्राह्मण से करवाएं पूजा

वेदपाठी ब्राह्मण से करवाएं पूजा

पूजा करवाते समय पंडित या पुरोहित का चयन सावधानी से करें। आप यह पहले ही सुनिश्चित कर लें कि जिस पंडित से पूजा करवा रहे हैं उसे संबंधित पूजा और उससे जुड़े मंत्रों का पूरा ज्ञान हो। मंत्रों का गलत उच्चारण किए जाने से कई बार पूजा का फल नहीं मिल पाता है। पूजा पूर्ण होने के बाद पंडित से कहें कि वह क्षमा मंत्र अवश्य बोले। इससे पूजा में हुई गलतियों की क्षमा मांगी जा सकती है।

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खुले मन से करें दान

खुले मन से करें दान

किसी भी पूजा-पाठ या शुभ कार्य के पूर्ण होने पर खुले मन से दान अवश्य करें। मन सकुचाकर या कंजूसी से दान देने से उसका फल नहीं मिलता। किसी विशेष कार्य के संकल्प के लिए पूजा कर रहे हैं या किसी विशेष कार्य के पूर्ण होने पर पूजा करवाई है तो ब्राह्मणों, कन्याओं और जरूरतमंदों को दान अवश्य दें। गरीबों, जरूरतमंदों को भोजन भी अवश्य करवाएं।

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English summary
Tips to Remember While doing Pooja at Home with Pair. Keep a pair of Laxmi feet at the entrance of the house with the feet pointing inwards. This brings in prosperity.
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