India
  • search
क्विक अलर्ट के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  
For Daily Alerts
Oneindia App Download

Shani Jayanti 2022: जानिए शनिदेव के बारे में कुछ खास बातें

By Gajendra Sharma
|
Google Oneindia News

नई दिल्ली, 27 मई। नौग्रहों में शनि को सबसे क्रूर ग्रह की संज्ञा दी गई है लेकिन शनि वास्तव में क्रूर ग्रह नहीं है। शनि मात्र व्यक्ति को उसके अच्छे-बुरे कर्मो के अनुसार फल प्रदान करते हैं। ग्रहों में शनि को न्यायाधिपति का पद प्राप्त है इसलिए इन्हें देव का दर्जा दिया हुए है। शनिदेव ने भगवान शिव की आराधना करके उन्हें प्रसन्न किया था। शिव ने शनि को दंडनायक ग्रह घोषित करके नौ ग्रहों में स्थान प्रदान किया था। यही कारण है किशनि मनुष्य, देव, पशु-पक्षी, राजा-रंक सभी को उनके कर्मो के अनुसार फल प्रदान करते हैं। शनि सूर्यदेव और छाया के पुत्र हैं। सूर्य ने जब शनि की माता छाया को पीड़ा पहुंचाई को शनि ने उनका भी घोर विरोध करके उन्हें अपार पीड़ा पहुंचाई थी। इसीलिए सूर्य और शनि में पिता-पुत्र का संबंध होते हुए भी दोनों घोर शत्रुता का व्यवहार करते हैं।

 Shani Jayanti 2022: जानिए शनिदेव के बारे में कुछ खास बातें

पूर्व जन्म का प्रभाव

मनुष्य ने यदि पूर्व जन्म में अच्छे कर्म किए हैं तो इस जन्म में शनि अपनी जातक की कुंडली में उच्च राशि या स्वराशि में स्थापित होते हैं। ऐसे शनि उस मनुष्य को भरपूर लाभ प्रदान करते हैं।

Samudrika Shastra: केवल सुंदरता ही नहीं बल्कि स्वभाव भी बता देते हैं महिलाओं के स्तन, जानिए कैसे?Samudrika Shastra: केवल सुंदरता ही नहीं बल्कि स्वभाव भी बता देते हैं महिलाओं के स्तन, जानिए कैसे?

शनि के बारे में कुछ विशिष्ट बातें

  • शनि का जन्म ज्येष्ठ अमावस्या के दिन हुआ। इनके पिता सूर्य और माता छाया हैं। अमावस्या के दिन जन्म होने के कारण इनका स्वरूप काला है।
  • शनि पांच भाई-बहन हैं। शनि के छोटे भाई यमराज हैं। तपती, भद्रा और यमुना सगी बहनें हैं।
  • शनि को मंद, शनैश्चर, सूर्यसूनु, सूर्यज, अर्कपुत्र, नील, भास्करी, असित, छायात्मज आदि नामों से भी पुकारते हैं।
  • शनि के अधीन मकर और कुंभ राशि है।
  • शनि पुष्य, अनुराधा और उत्तराभाद्रपद नक्षत्र का स्वामी है।
  • शनि अस्त होने के 38 दिन बाद पुन: उदय होता है।
  • शनि की उच्च राशि तुला और नीच राशि मेष है।
  • जन्मकुंडली के 12 भावों में शनि 8वें, 10वें और 12वें भाव का कारक है।
  • शनि जब तुला, मकर या कुंभ राशि में होता है और उस अवधि में किसी का जन्म हो तो वह रंक से राजा बन जाता है।
  • शनि जब मिथुन, कर्क, कन्या, धनु या मीन राशि में होता है और उस अवधि में किसी का जन्म हो तो परिणाम मध्यम रहता है।
  • शनि जब मेष, वृषभ, सिंह या वृश्चिक में हो और किसी का जन्म हो तो विपरीत परिणाम प्राप्त होते हैं।
  • हस्तरेखा शास्त्र में शनि का स्थान मध्यमा अंगुली के नीचे होता है।
  • अंक ज्योतिष में 8, 17 और 26 तारीख पर शनि का आधिपत्य है।
  • शनि 30 वर्ष में समस्त बारह राशियों में भ्रमण का चक्र पूरा कर लेता है।
  • एक बार किसी जातक को साढ़ेसाती आने के बाद 30 वर्ष बाद ही साढ़ेसाती का दूसरा चक्र आता है।
  • अपवाद को छोड़ दिया जाए तो मनुष्य के जीवन में तीन बार साढ़े साती का चक्र आता है।
  • शनि जब किसी जातक को उसके कर्मो के अनुसार दंड देने वाले होते हैं तो उससे पहले वे उसकी बुद्धि का नाश कर देते हैं।

Comments
English summary
Shani Jayanti coming on 30th may. read interesting facts about Shani dev.
देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
For Daily Alerts
तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X