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Shani Jayanti 2021: पांच उपाय जो बचाएंगे शनि की पीड़ा से, खुलेगा किस्मत का ताला

By गजेंद्र शर्मा
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नई दिल्ली, 4 जून । ज्येष्ठ अमावस्या 10 जून 2021 को शनि जयंती आ रही है। शनि से ज्यादातर लोग भयभीत रहते हैं और पीड़ा से मुक्ति के लिए अनेक प्रकार के उपाय करते रहते हैं। शनि देव को सबसे अधिक सत्यता और न्याय पसंद है, इसलिए बुरे कर्मो का त्याग करके सत्य और परोपकार के मार्ग पर चलेंगे तो शनि कभी आपके लिए घातक हो ही नहीं सकते। लेकिन फिर भी कुछ ऐसे उपाय हैं जिन्हें करना आवश्यक होता है ताकिशनि देव की पीड़ा को शांत किया जा सके।

Shani Jayanti 2021: पांच उपाय जो बचाएंगे शनि की पीड़ा से

आइए जानते हैं ऐसे ही पांच उपाय...

काले घोड़े का प्रयोग : काले अश्व अर्थात् घोड़े को शनिदेव का प्रतीक माना जाता है। यदि आप शनि की पीड़ा से गुजर रहे हैं तो शनि जयंती से एक दिन पहले सवा किलो काले चने पानी में भिगो दें। जयंती के दिन प्रात: स्नानादि से निवृत होकर भिगोए हुए चने में सवा सौ ग्राम सरसों का तेल मिलाएं और इसे काले घोड़े को खिला दें। अश्व को प्रणाम करें और घर लौट आएं। पीछे मुड़कर घोड़े को न देखें। इस प्रयोग से शनिदेव प्रसन्न होंगे और पीड़ा से छुटकारा दिलाएंगे।

काले घोड़े की नाल : घोड़ों के पैरों में चोट न लगे और उन्हें दौड़ने में आसानी हो इसलिए उनके पैरों में लोहे की नाल लगाई जाती है। इसे हार्स शू भी कहा जाता है। पुरानी हो चुकी नाल अपने आप घोड़े के पैर में से निकल जाती है या खराब होने पर अश्व चालक उसे निकाल देता है। ऐसी नाल जो काले घोड़े के पैर में से निकली हुई हो उसे ले जाएं और उससे बनी अंगूठी शनि जयंती के दिन पहनने से शनि के समस्त दोषों की शांति होती है। इसी तरह नाव की कील की अंगूठी भी धारण की जाती है।

शनि का तैलाभिषेक : शनि देव को प्रसन्न करने का एक उपाय तैलाभिषेक भी है। कड़वे अर्थात् सरसों के तेल और तिल के तेल का अभिषेक शनि जयंती के दिन करें। अभिषेक शनिदेव के मंत्र नीलांजन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजमं, छायामरतड संभूतं तं नमामि शनैश्चरं करें। 108 मंत्रों से अभिषेक के बाद इसके दशांश भाग से हवन करें। हवन सामग्री में काले तिल का प्रयोग अवश्य करें। हवन अभिषेक मंदिर में करना चाहिए घर में नहीं।

शमी वृक्ष का प्रयोग : शनि जयंती के दिन शनि के मंत्र से पीपल के पेड़ की 108 परिक्रमा करें और इस दौरान जल अर्पित करते रहें। पेड़ के नीचे बैठकर शनि स्तवराज का पाठ करें। शाम के समय उसी पीपल के पेड़ के नीचे आटे में सरसो का तेल मिलाकर 21 दीये बनाएं और इन्हें सरसो के तेल से प्रज्जवलित करें।

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शनि जयंती से पहले चांदी की अंगूठी में नीलमणि जड़वाकर रखें। जयंती के दिन इस अंगूठी को कच्चे दूध और फिर गंगाजल से स्नान करवाकर मध्यमा अंगुली में धारण करें। शनि की साढ़ेसाती, ढैया वालों को इससे काफी राहत मिलेगी।

English summary
Shani Jayanti on 10th June.it is believed that one should worship Lord Shani to keep oneself away from evil and to reduce the hardships of life.
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