Shani Dev: शनि क्यों कहलाते हैं 'शनैश्चर'? क्या है इसके पीछे की कहानी?
Shanishchar : शनिवार को शनिदेव की पूजा की जाती है, जो कि न्याय के देवता कहे जाते हैं, वो दंड और पुरस्कार दोनों देते हैं। आपको बता दें कि शनिदेव को 'शनैश्चर' भी कहा जाता है लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि उन्हें इस नाम से क्यों संबोधित किया जाता है। दरअसल जिन शनि भगवान की हम पूजा करते हैं वो असल में ग्रह के रूप में ब्रह्मांड में रहते हैं और उन्हें अंतिरक्ष का सबसे सुंदर ग्रह कहा जाता है।

वो सौरमंडल में वृहस्पति के बाद दूसरे सबसे बड़े ग्रह हैं लेकिन उनकी सूर्य से दूरी बहुत ज्यादा है, वो पृथ्वी की तुलना में 10 गुना ज्यादा दूर है इसलिए उसे सूर्य का एक चक्कर 30 सालों में पूरा करते हैं। अपनी स्लो गति के कारण ही इन्हें इसे 'शनैश्चर' नाम दिया गया। इसका शाब्दिक अर्थ होता है 'धीमी चाल वाला'।
शनिदेव को नवग्रहों में सर्वश्रेष्ठ स्थान मिला
आपको बता दें शनिदेव को नवग्रहों में सर्वश्रेष्ठ स्थान मिला हुआ है। शनिदेव भगवान सूर्य और उनकी पत्नी संज्ञा के पु्त्र हैं। शनिदेव की पूजा करने से इंसान के कष्टों का अंत होता है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। आप शनिदोष से ग्रसित हैं या आप पर साढ़े साती चल रही है तो आपको शनिदेव की नियमित पूजा करनी चाहिए, ऐसा करने से आपके दुख जल्द ही खत्म होते हैं।
शनिदेव की पूजा विशेष मंत्रों से करें
शनिवार के दिन शनिदेव की पूजा विशेष मंत्रों से करनी चाहिए इससे इंसान की हर मनोकामना पूरी होती है, हर मंत्र का जाप रोज 108 बार करना चाहिए।
- ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।
- ॐ शं शनैश्चराय नमः।
- ऊँ शन्नोदेवीर-भिष्टयऽआपो भवन्तु पीतये शंय्योरभिस्त्रवन्तुनः।
- ऊँ भगभवाय विद्महैं मृत्युरुपाय धीमहि तन्नो शनिः प्रचोद्यात्।
- ऊँ त्रयम्बकं यजामहे सुगंधिम पुष्टिवर्धनम। उर्वारुक मिव बन्धनान मृत्योर्मुक्षीय मा मृतात।।
- ॐ निलान्जन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम।












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