Sawan ki Puja: श्रावण में पार्थिव शिवलिंग पूजन करें, होंगे वारे-न्यारे

Parthiv Shivling benefits: श्रावण मास में पार्थिव शिवलिंग का पूजन करने का बड़ा माहात्म्य बताया गया है। पार्थिव शिवलिंग का पूजन करने से भगवान शिव जीवन के चारों पुरुषार्थों धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष सहज ही प्रदान कर देते हैं। शिव महापुराण की विद्येश्वर संहिता के 19वें, 20वें और 21वें अध्याय में पार्थिव शिवलिंग के पूजन का माहात्म्य बताते हुए कहा गया है सर्वेषु लिंगेषु पार्थिवं श्रेष्ठमुच्यते, अर्थात् शिवजी के सभी द्रव्यों से बने शिवलिंग में पार्थिव शिवलिंग का पूजन सर्वश्रेष्ठ होता है। सतयुग में मणिलिंग, त्रेतायुग में स्वर्णलिंग, द्वापरयुग में पारदलिंग और कलियुग में पार्थिवलिंग को श्रेष्ठ कहा गया है।

Sawan

पार्थिव लिंग की महिमा

  • पार्थिव लिंग को समस्त लिंगों में सर्वश्रेष्ठ कहा गया है।
  • पार्थिव पूजन अत्यंत अत्यंत पुण्यदायी तथा सब प्रकार से धन्य करने वाला, दीर्घायु देने वाला होता है।
  • यह तुष्टि, पुष्टि और लक्ष्मी प्रदान करने वाला कहा गया है।
  • पार्थिव लिंग पूजन सभी कामनाओं की सिद्धि देने वाला होता है। जो सुंदर वेदी सहित पार्थिव लिंग का निर्माण करके पूजा करता है वह इस लोक में धन धान्य से संपन्न होकर अंत में रुद्रलोक को प्राप्त करता है।
  • जो मनुष्य पार्थिवलिंग का निर्माण करके बिल्वपत्रों से 11 वर्ष तक उसका त्रिकाल पूजन करता है वह इसी शरीर से रुद्रलोक में प्रतिष्ठा प्राप्त करता है। वह स्वयं शिवस्वरूप हो जाता है और उसके दर्शन और स्पर्श मात्र से मनुष्यों के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं।

कैसे बनाएं पार्थिव लिंग

पार्थिव शिवलिंग का निर्माण पूजन नदी या तालाब के किनारे, पर्वत पर, वन में, शिवालय में अथवा किसी पवित्र स्थान में करने का विधान है। शुद्ध स्थान से निकाली हुई मिट्टी को लाकर बड़ी सावधानी से शुद्ध स्थान में रखें। फिर इसे जल से सानकर पिंड बना लें और वेदोक्त मार्ग से धीरे-धीरे सुंदर पार्थिव लिंग की रचना करें। इसके बाद वेदोक्त मंत्रों से पार्थिव शिवलिंग का पूजन करें।

मनोकामना के अनुसार कितने पार्थिव लिंगों का पूजन करना चाहिए

  • विद्या की प्राप्ति के लिए भक्ति पूर्वक एक हजार पार्थिव शिवलिंगों का पूजन करें।
  • भूमि की अभिलाषा वाले के एक हजार पार्थिव शिवलिंगों का पूजन करना चाहिए।
  • धन चाहने वाले मनुष्य को 500 पार्थिव शिवलिंगों का पूजन करना चाहिए।
  • पुत्र या उत्तम संतान प्राप्ति के लिए डेढ़ हजार पार्थिव शिवलिंगों का पूजन करें।
  • अच्छे वस्त्रों की आकांक्षा के लिए पांच सौ पार्थिव शिवलिंगों का पूजन करना चाहिए।
  • मोक्ष की कामना करने वाले को एक करोड़ पार्थिव शिवलिंगों का पूजन करना चाहिए।
  • दया प्राप्ति की इच्छा वाले मनुष्य को तीन हजार पार्थिव शिवलिंगों का पूजन करना चाहिए।
  • तीर्थाटन की इच्छा रखने वाले को दो हजार पार्थिव शिवलिंगों का पूजन करना चाहिए।
  • कारागार से मुक्ति के लिए डेढ़ हजार पार्थिव शिवलिंगों का पूजन किया जाता है।
  • दरिद्रता से छुटकारा पाने के लिए पांच हजार पार्थिव शिवलिंगों का पूजन करना चाहिए।

ज्यादा नहीं तो यह कर लें

अत्यधिक संख्या में पार्थिव शिवलिंग बनाना सभी मनुष्यों के लिए संभव नहीं है। इसलिए श्रावण मास में एक छोटा सा काम तो नित्य किया ही जा सकता है। शिव महापुराण की विद्येश्वरसंहिता के 21वें अध्याय के 15वें श्लोक में कहा गया है-

  • एकं पापहरं प्रोक्तं द्विलिंगं चार्थसिद्धिदम् ।
  • त्रिलिंगं सर्वकामानां कारणं परमीरितम् ।।

अर्थात् एक पार्थिव लिंग का नित्य पूजन पापों का नाश करता है, दो लिंगों का पूजन अर्थ की सिद्धि करवाता है, तीन लिंगों का पूजन सभी कामनाओं की सिद्धि करने वाला कहा गया है।

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