Sawan 6th somwar 2023: शिवलिंग से दूर-दूर तक का क्षेत्र बन जाता है तीर्थ
Sawan 6th somwar 2023: भगवान शिव की महिमा अपरंपार है। शिव शीघ्र पूजा का फल देने वाले देव हैं इसीलिए सर्वाधिक मंदिर शिवजी के पाए जाते हैं और कई दूसरे देशों में भी खुदाई के दौरान शिवलिंग मिलने के प्रमाण मिलते रहते हैं। इससे यह सिद्ध होता है कि शिवजी की पूजा सृष्टि के आरंभ से ही की जाती है।

शास्त्र कहते हैं जिस जगह शिवलिंग स्थापित होता है सिर्फ वही शिवालय नहीं बल्कि उसके चारों ओर का दूर-दूर तक का संपूर्ण क्षेत्र तीर्थ क्षेत्र बन जाता है और उस स्थान में अनुष्ठान करने से शीघ्र उत्तम फलों की प्राप्ति होती है।
क्या आप जानते हैं शिवलिंग से निकलने वाली सकारात्मक आध्यात्मिक ऊर्जा का दायरा कितना होता है, यदि नहीं जानते तो चलिए आज हम आपको बताते हैं।
- शिव महापुराण का कथन है कि मनुष्यों द्वारा स्थापित शिवलिंग से चारों और सौ हाथ तक पुण्य क्षेत्र कहलाता है। ऋषियों द्वारा स्थापित शिवलिंग के चारों ओर एक हजार हाथ तक पुण्य क्षेत्र कहा गया है तथा देवताओं द्वारा स्थापित शिवलिंग के चारों ओर भी एक हजार हाथ तक पुण्य क्षेत्र समझना चाहिए। इसी प्रकार स्वयंभू लिंग के चारों ओर एक हजार धनुष अर्थात् चार हजार हाथ तक पुण्यक्षेत्र होता है।
- पुण्यक्षेत्र में स्थित बावड़ी, कुआं, पोखर, नदी आदि को शिवगंगा के समान हो जाते हैं। वहां स्नान, दान और जप करके मनुष्य भगवान शिव को प्राप्त कर लेता है।
- जो शिव पुण्य क्षेत्र में अपने किसी मृत संबंधी का दाह, दशाह, मासिक श्राद्ध, सपिंडीकरण अथवा वार्षिक श्राद्ध करता है या शिव क्षेत्र में अपने पितरों को पिंड देता है वह तत्काल सब पापों से मुक्त हो जाता है और अंत में शिव लोक पाता है।
- शिव के क्षेत्र में सात, पांच, तीन या एक ही रात निवास कर ले तो शिव की विशेष कृपा का पात्र हो जाता है।
- शिव क्षेत्र में निवास करते हुए सदाचार का पालन करें, शिव मंत्रों का जाप करें, शिव की भक्ति में लीन रहने के निर्देश भी शास्त्र देता है।












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