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Sawan 2023: शिवलिंग पर क्‍यों चढ़ाया जाता है 'बेलपत्र'? जानें कुछ चमत्‍कारिक बातें और अर्पित करने का सही तरीका

Belpatra offered to Lord Shiva: सावन का पावन महीना शुरू हो चुका है। हर तरफ भोले शंकर के जयकारे लग रहे हैं। इस बार अधिकमास यानी चार्तुमास के कारण सावन का महीना लगभग दो माह का है। इसके साथ ही इस बार ये भी अद्भुद संयोग है कि इस बार सावन के चार नहीं पूरे आठ सोमवार पड़ रहे हैं।

सावन का पहला सोमवार 10 जुलाई को हैं। सावन के सोमवार को भोले शंकर का दूध व अन्‍य चीजों से अभिषेक किया जाना शुभ माना जाता है। भगवान शिव को बेलपत्र भी चढ़ाया जाता हैं। कहते हैं भोले शंकर को बेलपत्र बहुत प्रिय है इसलिए शिवलिंग को बेलपत्र समर्पित करने से भक्‍त की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

sawam-2023

क्‍या कभी आपने सोचा है कि बेलपत्र चढ़ाए बिना भगवान शिव की पूजा क्‍यों नहीं पूर्ण मानी जाती है। इसके पीछे पौराणिक कथा क्‍या है और इसका महत्‍व क्‍या हैं आइए सब जानते?

बेलपत्र ही क्‍यों चढ़ाया जाता है?

सावन का महीने के सोमवार व शिवरात्रि समेत भोले शंकर के अन्‍य पर्व पर बेलपत्र चढ़ाने का विशेष महत्‍व हैं।
भगवान शिव की विशेष कृपा पाने के लिए भक्‍त बेलपत्र चढ़ाते हैं।

बेलपत्र की तीन पत्तियां त्रिदेव

बेलपत्र को गौर से देखिए तो तीन पत्तियां एक साथ जुड़ी होती है। इसके पीछे मान्‍यता है कि बेलपत्र की तीन पत्तियों में ब्रह्मा विष्‍णु महेश हैं त्रिदेव यानी सृजन, पालन और विनाश के देव हैं।

बेलपत्र की पत्‍ती यानी ये तीन गुण

वहीं दूसरी मान्‍यता है कि ये तीन पत्तियां तीनों गुण सत्‍व, रज और तम है।वहीं कुछ का मानना है कि तीन आदि ध्‍वनियों जिनकी एक गूंज जिससे ऊं बनता उसका प्रतीक ये बेलपत्र है।

त्रिनेत्र

वहीं एक मान्‍यता है बेलपत्र की तीन पत्तियां महादेव की तीन आंखें या उनके शस्त्र त्रिशूल का भी प्रतीक है।

पौराणिक कथा

समुद्र मंथन के बाद जब विष निकला था तो सृष्टि को बचाने के लिए महादेव ने उस विष को अपने कंठ में धारण किया था जिसकी वजह से उनका कंथ नीला हो गया और उनका शरीर आग की तरह तपने लगा, बेलपत्र विश के प्रभाव को कम करता है इसलिए अन्‍य देवी देवताओं ने महादेव को बेलपत्र चढ़ाना शुरू कर दिया इसके साथ उन्‍हें जलन से ठंडक पहुंचे इसलिए उन पर जल अर्पित करने लगे। जिसके बाद भोले शंकर के शरीर की गर्मी शांत हो गई और इसके बाद से ही भगववान शिव को बेलपत्र और जल चढ़ाया जाने लगा।


बेलपत्र चढ़ाने का सही तरीका

  • हमेशा तीन जुड़े हुए बेलपत्र चढ़ाए
  • बेल‍पत्र को कभी उल्‍टा ना चढ़ाए हमेशा सीधा ही चढ़ाए
  • हमेशा बेलपत्र को पहले धोएं और उसके बार चढ़ाए
  • बेलपत्र चढ़ाने के बाद ही भगवान शंकर के शिवलिंग पर जल अवश्‍य चढ़ाए
  • शिवलिंग को बेलपत्र और जल चढ़ाते समय 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप अवश्‍य करें
  • कटा- फटा, सूखा हुआ बेलपत्र कभी नहीं चढ़ाना चाहिए
  • हमेशा भगवान को 1, 5, 11, 21, 51, 108 इन्‍हीं संख्‍या में बेलपत्र चढ़ाए
  • बेल पत्र पर राम का नाम लिखकर चढ़ाने से चमत्‍कारिक फल मिलता है।
  • इसके अलावा बेल पत्र को पेड़ से तोड़ने से पहले उसे प्रणाम कर लेना चाहिए।

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