Diwali 2021: पढ़ें दिवाली की कथा
नई दिल्ली, 03 नवंबर। दीपावली का दिन आस्था, भरोसा, विश्वास, त्याग, हर्ष, खुशी और सच्चाई का मानक है। कहते हैं कि रावण का वध करके और 14 साल का वनवास काटकर प्रभु श्रीराम, माता सीता और अनुज लक्ष्मण संग इस दिन ही अयोध्या वापस लौटे थे। वो दिन कार्तिक माह की अमावस्या का था। लोगों ने अपने घरों में राम के आने की खुशी में दीपक से सजाया था इसलिए इस दिन दीए जलाने की पंरपरा है और ये दिन 'दीपावली' कहलाया।

इस दिन लोग मां लक्ष्मी और विध्नहर्ता श्री गणेश जी की पूजा करते हैं क्योंकि मां लक्ष्मी ही सुख और संपन्नता की देवी हैं, बिना उनके आशीष के संसार का कोई भी काम पूरा नहीं होता है लेकिन लक्ष्मी यानी धन को खर्च करने के लिए इंसान का बुद्धि-विवेक ठीक होना बहुत जरूरी है इसलिए इस दिन मां लक्ष्मी के साथ विघ्नहर्ता और बुद्धि के देव प्रभु श्री गणेश जी की भी पूजा की जाती है। इस पर्व के बारे में और भी कई कथाएं हैं, जिनमें से एक कथा काफी प्रचलित है, जिसे दिवाली के दिन जरूर सपरिवार सुनना चाहिए।
पेड़ पर मां लक्ष्मी का वास था
एक गांव में एक साहूकार रहता था, वो बहुत ही ईमानदार और बुद्दिमान था लेकिन काफी गरीब था। उसकी एक सुंदर और सुशील बेटी थी। वो बेटी पीपल के पेड़ में रोज जल चढ़ाती थी। उसी पेड़ पर मां लक्ष्मी का वास था। मां लक्ष्मी ने एक दिन उस साहूकार की बेटी से कहा कि वो उससे मित्रता करना चाहती हैं, क्या वो उनकी मित्र बनेगी? इस पर उस लड़की ने कहा कि वो अपने पिता से पूछकर बताएगी। उस लड़की ने अपनी सारी बात पिता को बता दी, जिसे सुनने के बाद साहूकार ने 'हां ' कर दी।

मां लक्ष्मी ने साहूकार की बेटी को अपने घर बुलाया
और इसके बाद साहूकार की बेटी और मां लक्ष्मी दोनों अच्छी सहेलियां बन गईं। एक दिन मां लक्ष्मी ने साहूकार की बेटी को अपने घर बुलाया और वहां उसकी काफी आव-भगत की। साहूकार की बेटी को बहुत अच्छा लगा। जब वो घर से जाने लगी तो लक्ष्मी जी ने उससे पूछा कि वो उन्हें अपने घर कब बुला रही है? साहुकार की बेटी ने तुरंत उन्हें अपने घर आने का आमंत्रण दे दिया।
घर की माली हालत ठीक नहीं थी
लेकिन जब वो घर लौटी तो काफी उदास हो गई क्योंकि उसके घर की माली हालत तो ठीक नहीं थी लेकिन उसके पिताजी ने कहा कि तुम घर को साफ-सुथरा तो कर ही सकती हो। साहूकार की लड़की तुरंत साफ-सफाई में जुट गई और अपने घर को शीशे की तरह चमका दिया। तभी एक चील कहीं से एक हीरे का हार उनके घर पर छोड़ गया। साहूकार और उसकी बेटी बहुत खुश हुए और उन्होंने तुरंत उसे बेचकर पैसे जुटाए और उससे घर में पकवान बनाएं।

थोड़ी ही देर बाद मां लक्ष्मी और गणेश भगवान उनके घर पर पधारे। जहां साहूकार और उनकी बेटी ने उन दोनों की काफी आव-भगत की। जिससे दोनों काफी प्रसन्न हुए और साहूकार औऱ उसकी बेटी को आशीर्वाद किया। जिसके बाद साहूकार के पास किसी चीज की फिर कभी कमी न हुई।












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