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Nirjala Ekadashi 2021: निर्जला एकादशी आज, जानिए इस दिन का महत्व

By गजेंद्र शर्मा
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नई दिल्ली, 21 जून। आज निर्जला एकादशी है,यह वर्ष की सबसे बड़ी एकादशी होती है। आज के दिन भगवान विष्णु को आम का नैवेद्य लगाया जाता है और व्रती को आम्र को ही प्रसाद के रूप में ग्रहण करना होता है।

Nirjala Ekadashi 2021: जानिए निर्जला एकादशी का महत्व

निर्जला एकादशी करने से वर्ष की सभी एकादशियों का पुण्य प्राप्त किया जा सकता है, बशर्ते इसका व्रत पूर्ण शास्त्रीय विधान के अनुसार किया जाए। इसे निर्जला एकादशी इसलिए कहा जाता है, क्योंकिइस दिन पानी तक ग्रहण नहीं किया जाता है। यह व्रत पूर्ण निर्जल रहते हुए करना होता है। इसे पांडव एकादशी या भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है, क्योंकिइसे महाभारत काल में पांडु पुत्र भीम ने किया था। जो लोग पूरे साल की एकादशियों का व्रत प्रारंभ करना चाहते हैं वे इस एकादशी के दिन से व्रत प्रारंभ कर सकते हैं।

निर्जला एकादशी की व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार सभी पांडव और द्रौपदी भगवान विष्णु के परम भक्त थे। वे सभी वर्ष की समस्त एकादशियों का व्रत किया करते थे, लेकिन भीम किसी भी एकादशी का व्रत नहीं कर पाता था क्योंकिवह भूखा नहीं रह सकता था। भूख सहन न कर पाने के कारण वह व्रत नहीं करता था और इसीलिए उसके मन में हमेशा यह पीड़ा रहती थी किवह एकादशी का व्रत ना करके भगवान विष्णु का अनादर कर रहा है। भीमसेन अपनी इस परेशानी को दूर करने के लिए महर्षि व्यास के पास गया और अपनी पीड़ा कही। महर्षि व्यास ने भीमसेन से कहा किअगर तुम वर्ष की समस्त एकादशी पर व्रत नहीं कर सकते तो भी तुम्हें कम से कम एक निर्जला एकादशी का व्रत अवश्य करना चाहिए, इसे पूर्ण श्रद्धा और शास्त्रोक्त विधि से करोगे तो समस्त एकादशियों का पुण्य तुम्हें मिल जाएगा। भीमसेन को यह बात जमी कि24 एकादशी करने से अच्छा है एक कर ली जाए। भीमसेन से सभी भाइयों के साथ निर्जला एकादशी का व्रत किया। तभी से निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी या पांडव एकादशी भी कहा जाने लगा।

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कैसे करें एकादशी पूजा

  • निर्जला एकादशी व्रत से एक दिन पहले गंगा दशहरा के दिन व्रती एक ही वक्त भोजन करें।
  • एकादशी के दिन सूर्योदय पूर्व उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर श्वेत स्वच्छ वस्त्र धारण करे और पूजा स्थान को स्वच्छ करके गंगाजल छिड़के।
  • चौकी पर सफेद कपड़ा बिछाकर उस पर भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
  • एकादशी व्रत का संकल्प लें। यदि पूरे साल की एकादशी प्रारंभ करना चाहते हैं तो उसके लिए भी संकल्प करें।
  • पंचोपचार या षोड़शोपचार पूजन संपन्न करें। विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ करें।
  • विष्णुजी का श्रृंगार पीले रंग के पुष्पों से करना चाहिए।
  • इस दिन पूजा में भगवान विष्णु को आम का नैवेद्य लगाया जाता है।
  • व्रती पूरे दिन निराहार, निर्जल रहे।
  • अगले दिन द्वादशी को प्रात: व्रत का पारण करें।

एकादशी का समय

  • एकादशी प्रारंभ 22 जून को सायं 4.22 बजे से
  • एकादशी पूर्ण 21 जून को दोपहर 1.32 बजे तक
  • एकादशी पारण 22 जून को प्रात: 5.43 से 8.25 बजे तक

English summary
Nirjala Ekadashi is the most important and significant Ekadashis out of all twenty four Ekadashis in a year.here is do and dont .Read everything About it.
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