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Navratri 2018: नवरात्रि में जरूर करें ललिता सहस्त्रनामावली का पाठ

By Pt. Gajendra Sharma
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नई दिल्ली। देवी भगवती की आराधना का पर्व नवरात्रि 10 अक्टूबर से प्रारंभ हो रहा है। प्रत्येक मनुष्य अपनी-अपनी श्रद्धा के अनुसार देवी की आराधना करता है, लेकिन हमारे धर्म शास्त्रों में देवी से संबंधित कुछ ऐसे चमत्कारिक स्तोत्र और मंत्र बताए गए हैं जिनके बारे में कम ही लोगों को जानकारी है। उन्हीं में से एक है ललिता सहस्त्रनामावली। देवी दुर्गा का एक स्वरूप ललितादेवी है। ललितादेवी के एक हजार नामों को ललिता सहस्त्रनामावली के नाम से जाना जाता है।

भगवान शिव के एक हजार नाम लेने का फल मिलता है

ब्रह्मांड पुराण में वर्णित इस स्तोत्र के अद्भुत और चमत्कारिक फायदे बताए गए हैं। इसके बारे में यहां तक कहा गया है कि भगवान शिव का एक बार नाम लेने से महाविष्णु के एक हजार नाम लेने का फल मिल जाता है। इसी प्रकार एक बार ललिता देवी का नाम लेने से भगवान शिव के एक हजार नाम लेने का फल मिलता है। इसका पाठ वैसे तो दिन में कभी भी किया जा सकता है, लेकिन सुबह 4 से 7 बजे के बीच और शाम के समय करना सबसे अच्छा माना जाता है। यदि आप भी अपने जीवन में कुछ बड़ा हासिल करना चाहते हैं तो ललिता सहस्त्रनाम के नीचे दिए गए लाभों के बारे में एक बार जरूर जान लें।

ललिता सहस्त्रनामावली का पाठ करना चाहिए

ललिता सहस्त्रनामावली का पाठ करना चाहिए

  • ललिता सहस्त्रनामावली का नियमित पाठ करने से तीर्थ स्थल जाने, पवित्र नदियों में स्नान करने और दान करने के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। जो लोग नियमित ये सब नहीं कर पाते उन्हें ललिता सहस्त्रनामावली का पाठ करना चाहिए।
  • पूजा-पाठ में किसी प्रकार की गलती हो जाए, दोष रह जाए तो उसका उल्टा असर हो सकता है। ललिता सहस्त्रनामावली का पाठ करने से पूजा विधि के दोष समाप्त होते हैं।
  • ललिता सहस्त्रनामावली के पाठ से आकस्मिक मृत्यु और दुर्घटना का खतरा नहीं रहता। नियमित पाठ से व्यक्ति स्वस्थ और लंबा जीवन जीता है।

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ललिता सहस्त्रनामावली का पाठ करने से तुरंत बुखार उतर जाता है

ललिता सहस्त्रनामावली का पाठ करने से तुरंत बुखार उतर जाता है

  • यदि किसी व्यक्ति को बुखार है तो उसके सिर पर हाथ रखकर ललिता सहस्त्रनामावली का पाठ करने से तुरंत बुखार उतर जाता है। जितनी ज्यादा बार रोगी के लिए इसका प्रयोग किया जाता है उतना अधिक और जल्द लाभ होता है। ललिता सहस्त्रनामावली अर्चना के लिए उपयोग की गई विभूति भी रोगी के मस्तक पर लगाने से बुखार और सिरदर्द में लाभ मिलता है।
  • ललिता सहस्त्रनामावली का पाठ करते समय अपने सामने एक गिलास में पानी भरकर रखें। पाठ समाप्त होने के बाद इस पानी को अपने मस्तक पर छिड़कने से ग्रहों की बुरी दशा के कारण आ रही परेशानियों से मुक्ति मिलती है। इससे हर प्रकार की नजर दोष और काले जादू का प्रभाव समाप्त होता है।
  • ललिता ललिता सहस्त्रनामावली का पाठ करते समय अपने मन-मस्तिष्क में देवी ललिता की अमृत के समुद्र में बैठी हुई प्रतिमा की कल्पना करें। इससे समस्त प्रकार के रोगों से मुक्ति मिलती है।
  • संतान की प्राप्ति के लिए ललिता सहस्त्रनामावली का पाठ करते समय अपने सामने थोड़ा सा शुद्ध घी रखें। पाठ समाप्त करने के बाद यह घी खा लें। इससे नपुंसकता दूर होती है और उत्तम संतान की प्राप्ति होती है। जिन्हें संतान होने में परेशानी आ रही है वे यह प्रयोग जरूर करें।
  • ललिता सहस्त्रनामावली का नियमित पाठ करने से घर का वातावरण शुद्ध होता है

    ललिता सहस्त्रनामावली का नियमित पाठ करने से घर का वातावरण शुद्ध होता है

    • ललिता सहस्त्रनामावली का नियमित पाठ करने से घर का वातावरण शुद्ध होता है। यहां तक कि पाठ करने वाले व्यक्ति के शरीर का एक-एक कण अद्भुत ऊर्जा और ओज से भर जाता है। व्यक्ति दिनभर थकान महसूस नहीं करता।
    • ललिता सहस्त्रनामावली का पाठ करने से शत्रुओं का भय नहीं रहता। कोई शत्रु पाठ करने वाले को नुकसान नहीं पहुंचा सकता।
    • ललिता सहस्त्रनामावली का पाठ करने से वाक सिद्धि प्राप्त हो जाती है। व्यक्ति को प्रसिद्धि हासिल कर लेता है और उसका नाम चारों ओर सितारों की तरह चमक उठता है।
    • शुक्रवार के दिन इसका पाठ करने से आर्थिक परेशानियां समाप्त हो जाती है। व्यक्ति को जीवन की मूलभूत जरूरतों के लिए परेशान नहीं होना पड़ता।

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English summary
In the Lalitha Sahasranama, we chant a thousand names of the Divine Mother. Names have a special significance. If we think of a sandalwood tree, we carry the memory of its perfume.
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