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Navratri 2017: चंड-मुंड को दंड देने के लिए प्रकट हुईं थीं मां चामुण्डा

By पं.गजेंद्र शर्मा
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नई दिल्ली। श्रीमार्कण्डेयपुराण में देवी महात्म्य के अंतर्गत राक्षसों के विनाश के लिए मां दुर्गा के जिन अवतारों का वर्णन मिलता है, वे संख्या में अनंत हैं। ऐसा माना जा सकता है कि उस काल में असुरों की संख्या अनंत और बल अपरिमित था। यही कारण है कि देवों को दुष्टों के त्राण से मुक्त करने के लिए आदिशक्ति अनेकानेक रूपों में प्रकट हुईं। इस संपूर्ण कथाक्रम में धूम्रलोचन, चंड-मुंड, रक्तबीज और शुंभ-निशुंभ जैसे महाबली और मायावी असुरों का विनाश देवी के विभिन्न रूपों द्वारा किया गया था।

इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए आज हम चंड- मुंड वध का वर्णन पढ़ते हैं

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 महालक्ष्मी, महाकाली और महागौरी

महालक्ष्मी, महाकाली और महागौरी

महालक्ष्मी, महाकाली और महागौरी की त्रिशक्ति अंबिका ने असुरों के महापराक्रमी सेनापति धूम्रलोचन को उसकी 60 हजार सैनिकों की सेना समेत अपनी हुंकार मात्र से भस्म कर दिया था। असुरों के राजा निशुंभ को जब इस आश्चर्यजनक घटना का पता चला, तो वह क्रोध से उन्मत्त हो गया। उसने अपने सर्वाधिक वीर सेनापतियों चंड और मुंड को बुलाकर कहा कि अपने सबसे भयंकर अस्त्र-शस्त्र और सैनिक लेकर जाओ और उस अहंकारिणी को केशों से घसीटते हुए हमारे सामने प्रस्तुत करो। यदि किसी कारण वश उसे जीवित बंदी ना बना सको, तो उसकी हत्या कर दो और उसका तथा उसके सिंह का शरीर हमारे सामने प्रस्तुत करो। राजा निशंुभ की आज्ञा से चंड-मुंड विशाल सेना लेकर हिमालय जा पहुंचे।

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     महाविकराल देवी

    महाविकराल देवी

    पुराणों के अनुसार उस समय देवी अंबिका अपने सौम्य रूप में मुस्कुराती हुई एक शिला पर विराजमान थीं। वे सामान्य भाव से असुरों की सेना को आते हुए देखती रहीं। असुरों ने आते ही मां को चारों तरफ से घेर लिया और उन पर आक्रमण करने के लिए अपने शस्त्र उठाने को उद्यत हुए। असुरों की चेष्टा देख मां अंबिका की दोनों भौंहें क्रोध से वक्री हो गईं और उनसे एक महाविकराल देवी प्रकट हुई। उस देवी का रंग काला, आंखें लाल थीं।

    उनके शरीर पर मांस था ही नहीं

    उनके शरीर पर मांस था ही नहीं

    उनके शरीर पर मांस था ही नहीं, वे नर मुंडों की माला पहने थीं और काली सघन केशराशि के बीच उनकी लाल जीभ लपलपाकर सबको भय से भर रही थी। ऐसी महाभयंकर देवी ने युद्ध में उतरते ही दैत्यों के झुंड को एक साथ मारना, कुचलना और खाना शुरू कर दिया। देखते ही देखते आधी असुर सेना पल भर में साफ हो गई। यह देखकर चंड अपनी तलवार लेकर महाकाली को मारने दौड़ा। कालिका मां ने उसे अपने पैरों के प्रहार से धरती पर पटक दिया और उसकी ही तलवार से उसका गला काट दिया। चंड को मरता देख मुंड अपने धनुष-बाण लेकर देवी की ओर लपका और पल भर में ही उसने देवी को अपने बाणों के किले में बंदी बना लिया। यह देखकर मां काली ने विकराल अट्टहास किया, जिससे मुंड का बाण किला तिनके-तिनके हो गया।

     चंड-मुंड के कटे हुए सिर

    चंड-मुंड के कटे हुए सिर

    इसके बाद मां नर-मुंड को भी धरती पर पटककर मार डाला। चंड-मुंड के मरते ही बची हुई असुर सेना अपने प्राण बचाने के लिए भाग खड़ी हुई। इसके बाद महाकाली अपने दोनों हाथों में चंड-मुंड के कटे हुए सिर उठाकर भयंकर हंसी बिखेरते हुए मां अंबिका के पास गईं और बोलीं कि आपके आदेशानुसार मैंने चंड-मुंड का वध कर दिया है और उनका सिर आपको भेंट करने लाई हूं। मां अंबिका ने प्रसन्न होकर कहा कि तुमने चंड-मुंड का वध किया है। इसी लिए अबसे संसार में तुम देवी चामुण्डा के नाम से पूजी जाओगी। तुम्हारी पूजा करने वाले भक्त हर भय से मुक्त रहेंगे और कोई शत्रु उन्हें हानि नहीं पहुंचा पाएगा।

    सीख

    सीख

    मां चामुण्डा देवी की उत्पत्ति साधारण मनुष्यों के लिए यह सीख है कि स्त्री शक्ति को कभी कमजोर समझने की भूल न करें। प्रत्येक नारी में चामुण्डा का अंश है और समय आने पर वह अपना रूप प्रकट भी कर सकती हैं। इसलिए संसार में जो लोग स्त्रियों पर जितने भी तरह के अत्याचार कर रहे हैं उन्हें एक न एक दिन उसका दंड भी भुगतना होगा।

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    English summary
    Chamunda is a fearsome aspect of the Devi and one of the Matrikas also considered as Divine Mother in Hinduism.
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