Nag Panchami 2018: जानिए सांप को क्यों पिलाया जाता है दूध?
नई दिल्ली। नागपंचमी का त्योहार श्रावण कृष्ण पंचमी और श्रावण शुक्ल पंचमी दोनों तिथियों पर मनाया जाता है। बिहार, बंगाल, उड़ीसा, राजस्थान में लोग कृष्ण पक्ष में यह त्योहार मनाते हैं, जो कि इस इस साल 2 अगस्त को है। जबकि देश के कई भागों में 15 अगस्त को नागपंचमी मनाई जाएगी। नागपंचमी के दिन सर्प जैसे विषैले जीव का भी हमारें यहां दूध पिलाकर सत्कार करने की प्रथा है। इस परंपरा के पीछे एक गहरा संदेश भी छिपा है।

नागपंचमी
इसके पीछे मान्यता है कि अगर शत्रु आपके द्वारा पर हिंसा की भावना से प्रवेश करे और आप उसका स्वादिष्ट भोजन से सत्कार करें तो काफी हद तक सम्भावना है कि शत्रु का आपके प्रति व्यवहार नरम अवश्य हो जायेगा।

घर के मुख्यद्वार पर ऊंची देहली बनी होती है
नागंपचमी का त्योहार बरसात के मौसम में मनाया जाता है उस समय सारे जीव-जन्तु अपने बिल से बाहर निकलकर किसी सुरक्षित स्थान की तलाश में भटकते है। ऐसे में ये जहरीले जीव-जन्तु हमारे घर में प्रवेश करके हमें नुकसान पहुंचा सकते है। गांवों में आज भी आप देख सकते है जो पुराने मकान है, उनमें घर के मुख्यद्वार पर ऊंची देहली बनी होती है। ये देहली जीव-जन्तुओं के लिए बार्डर रेखा का काम करती है। जिससे आसानी से कोई जीव-जन्तु हमारे घर में प्रवेश नहीं कर पाता है।

परंपरा
नागपंचमी के दिन देहली पर मिटटी की कटोरी में दूध रखा जाता है। यदि कोई जहरीला जीव-जन्तु हमारें घर में प्रवेश करने की कोशिश करेगा तो वह सबसे पहले वह रात्रि के अंधेरे में चमकते हुये दूध देखकर आकर्षित होगा और ग्रहण करेगा।

सांप के लिए दूध विष के समान
जितने भी जहरीले जीव-जन्तु है, उनके लिए दूध विष के समान है। यदि वे दूध ग्रहण करेंगे तो उनकी मृत्यु हो जायेगी। जैसे कहा जाता है कि शराब पीने के बाद दूध का सेवन न करें क्योंकि शराब पीने के बाद दूध का सेवन करने से वह शरीर में जहर बन जायेगा, ठीक इसी प्रकार यदि सर्प दूध ग्रहण कर लेगा तो उसकी मृत्यु हो जायेगी।












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