जानिए शास्त्रों में सोने के नियम क्या बताये गये हैं?
लखनऊ। एक कहावत है-पहला सुख जब सुन्दर काया यानि एक स्वस्थ्य शरीर होना ही पहला सुख है। शरीर को स्वस्थ्य रखने के लिए पौष्टिक आहार, नियमित दिनचर्या, व्यायाम और एक अच्छी नींद लेना अति आवश्यक है। हमें स्वस्थ्य रखने में नींद की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। हम चाहे जितना भी अपना अच्छा खान-पान रखें किन्तु अगर नींद अच्छी नहीं ले रहें है तो हम कभी भी स्वास्थ्य लाभ नहीं पा सकते है।
चलिए जानते है कि सोने के नियम शास्त्रों में क्या बताये गये हैं...

सोने के नियम
- मनुस्मृति के अनुसार सूने तथा निर्जन' घर में अकेला नहीं सोना चाहिए।
- देवमन्दिर और 'शमशान' में भी नहीं सोना चाहिए।
- किसी सोए हुए मनुष्य को 'अचानक' नहीं जगाना चाहिए।
- चाणक्य नीति में कहा गया है कि विद्यार्थी, नौकर और द्वारपाल ये ज्यादा देर तक सोए हुए हों तो इन्हें जगा' देना चाहिए।
- पद्म पुराण के अनुसार स्वस्थ मनुष्य को आयुरक्षा हेतु 'ब्रह्ममुहुर्त' में उठना चाहिए तथा बिल्कुल 'अंधेरे' कमरे में नहीं सोना चाहिए।

भीगे' पैर नहीं सोना चाहि
- महाभारत के अनुसार भीगे' पैर नहीं सोना चाहिए। 'सूखे पैर' सोने से लक्ष्मी (धन) की प्राप्ति होती है। टूटी खाट पर तथा 'जूठे मुंह' सोना वर्जित है।
- गौतमधर्मसूत्र के अनुसार बिल्कुल नग्न' होकर नहीं सोना चाहिए।
- पूर्व की तरफ सिर करके सोने से विद्या पश्चिम की ओर सिर करके सोने से 'प्रबल चिन्ता' उत्तर की ओर सिर करके सोने से हानि व मृत्यु तथा दक्षिण की तरफ सिर करके सोने से धन व आयु' की प्राप्ति होती है।
- दिन में कभी नहीं सोना चाहिए परन्तु 'ज्येष्ठ मास' में दोपहर के समय एक मुहूर्त (48 मिनट) के लिए सोया जा सकता है। दिन मे सोने से रोग में वृद्धि होती है तथा आयु का क्षरण होता है
- ब्रह्मवैवर्तपुराण में कहा गया है कि- दिन में, सूर्योदय एवं सूर्यास्त' के समय सोने वाला मनुष्य रोगी और दरिद्र हो जाता है।
- सूर्यास्त के एक प्रहर (लगभग 3 घंटे) के बाद ही 'शयन' करना चाहिए।
- जो मनुष्य बायीं करवट सोते हैं उनका स्वास्थ्य अच्छा रहता है।
- दक्षिण दिशा में पांव करके कभी नही सोना चाहिए। यम और राक्षसों का निवास रहता है। कान में हवा भरती है। 'मस्तिष्क' में रक्त का संचार कम को जाता है, स्मृति भ्रंश, मौत व असंख्य बीमारियाँ होती है।
- ह्रदय पर हाथ रखकर, छत के 'पाट या बीम' के नीचें और पाँव पर पाँव चढ़ाकर निद्रा न लें। ऐसा करने से रोग बढ़ते एवं आत्मविश्वास में कमी होती है।
- भोजन कभी भी शय्या पर बैठकर नहीं करना चाहिए अन्यथा रोग के घेरते है व धन की कमी होती है।
- छात्रों को लेटकर नही पढ़ना चाहिए। ऐसा करने से नेत्र ज्योति घटती है।
- कभी भी ललाट पर तिलक' लगाकर सोना नहीं चाहिए है। इसलिये सोते वक्त तिलक हटा दें।

दिन में नहीं सोना चाहिए













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