Mokshada Ekadashi 2025 : क्या है पारण टाइम? करें एकादशी चालीसा का पाठ होगी हर इच्छा पूरी
Mokshada Ekadashi 2025: मोक्षदा एकादशी हिंदू धर्म की सबसे शुभ और पुण्यदायी एकादशी मानी जाती है। यह व्रत मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी को आता है, आज ये पावन दिन आया है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से न केवल साधक को अपार पुण्य मिलता है, बल्कि पूर्वजों को भी मोक्ष की प्राप्ति होती है।
यही कारण है कि इस एकादशी को गीता जयंती भी कहा जाता है, क्योंकि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को भागवत गीता का उपदेश दिया था। इस व्रत का पालन नियम पूर्वक करना चाहिए तब ही शुभ फल की प्राप्ति होती है।

Mokshada Ekadashi 2025 की पूजा विधि
- प्रातः जल्दी उठकर स्नान करें।
- स्वच्छ पीले या सफेद वस्त्र धारण करें।
- मैं भगवान श्रीविष्णु की कृपा पाने और पूर्वजों की मुक्ति हेतु मोक्षदा एकादशी व्रत का पालन कर रहा/रही हूं।
- घर में साफ-सफाई कर पूजा स्थान तैयार करें।
- भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र को गंगाजल से शुद्ध करें।
- पीले फूल, तुलसी दल, कपूर, धूप, दीप से पूजा करें।
Mokshada Ekadashi 2025 के व्रत नियम
- पूरे दिन फलाहार या निर्जला व्रत रखें।
- सात्विक भोजन ही ग्रहण करें।
- झूठ, क्रोध, हिंसा, निंदा से दूर रहें।
- रात में भजन-कीर्तन करें और जागरण का भी विशेष महत्व है।
मोक्षदा एकादशी का पारण कल 02 दिसंबर को सुबह 06:57 से लेकर 09:03 बजे के बीच किया जा सकेगा।
Mokshada Ekadashi 2025 चालीसा
दोहा
- जय जय एकादशी मइया, सब दुख हरिणी मात।
- विष्णु प्रिय हरि व्रत दायिनी, करहु भक्तों पर छात॥
चालीसा
- एकादशी मइया सुनो, भक्तों की अरज पुकार।
- सुख-शांति के हित करहु, संकट मिटे अपार॥
- जग में व्रत तेरा महान, मोक्ष पथ का है द्वार।
- तुम्हरी कृपा से मिटे, पाप दोष सब भार॥
- हरि स्वयं तुम संग बसें, तुलसी दल प्रिय मान।
- जो श्रद्धा से व्रत करे, पावे शुभ वरदान॥
- द्वादशी के दिन प्रभु, पारण का फल पावें।
- भक्ति-शक्ति के संग में, हरि चरणन में जावें॥
- वेद पुरानन में तुम्हारा, भूषण रूप बताय।
- धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष दायिनी, तुम महिमा अपरंपार॥
- भक्त जनों के हित सदा, करती हो उपकार।
- अनाथ-हीन के तुम सहाय, दुख-दारिद्र्य टार॥
- जो कोई नित नाम ले, करे व्रत नियम संग।
- कभी न दुख का दिन देखे, रहे सुखी हर अंग॥
- अंत में विनती करूं, सुन ले करुणा धाम।
- एकादशी मइया कृपा करो, जागे मन में राम॥
दोहा
- एकादशी व्रत कीजिए, मन-वचन-तन धार।
- भवसागर से पार उतारें, हरि-भक्ति अपार॥
DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।












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