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वैकुंठ एकादशी (Vaikunta Ekadasi):जानिए कब करें एकादशी व्रत का उद्यापन

By Pt. Gajendra Sharma
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नई दिल्ली। भगवान विष्णु की कृपा पाने का सबसे उत्तम व्रत एकादशी को माना गया है। इसे व्रतराज भी कहते हैं क्योंकि एकादशी का व्रत करने से सांसारिक जीवन की समस्त इच्छाएं तो पूर्ण होती ही हैं, इसे करने से मृत्यु के पश्चात बैकुंठ लोक की प्राप्ति भी होती है। शास्त्रों के अनुसार एकादशी का व्रत करने वाले पर भगवान विष्णु और भगवान शिव दोनों की कृपा समान रूप से रहती है। लेकिन क्या आप जानते हैं एकादशी व्रत का पूर्ण फल तभी प्राप्त होता है जब इसका विधि-विधान से उद्यापन किया जाए।

कब करें एकादशी का उद्यापन

कब करें एकादशी का उद्यापन

एकादशी माह में दो बार आती है कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष। इस तरह वर्ष में 24 एकादशियां आती हैं। इसका उद्यापन मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन किया जाता है। इस वर्ष मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी 18 दिसंबर 2018 मंगलवार को आ रही है। इसे मोक्षदा एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन एकादशी व्रत का उद्यापन किया जाता है। लेकिन इसके लिए जरूरी है कि इस एकादशी के दिन तक आपकी 24 एकादशियां पूर्ण हो गई हों।

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क्या है विधान

क्या है विधान

एकादशी व्रत का उद्यापन करना तो आवश्यक है लेकिन यह पूर्णरूप से व्रती की श्रद्धा पर निर्भर करता है, कितने ब्राह्मणों को भोजन करवाना है, पूजन कितना बड़ा या छोटा करना है यह सब व्रती पर निर्भर है। यहां केवल शास्त्र सम्मत विधि दे रहा हूं। एकादशी व्रत का उद्यापन किसी योग्य आचार्य के मार्गदर्शन में करना चाहिए। उद्यापन में 12 माह की एकादशियों के निमित्त 12 ब्राह्मणों को पत्नी सहित निमंत्रित किया जाता है और एक पूजन करवाने वाला आचार्य रहता है, उन्हें भी पत्नी सहित आमंत्रित करें। उद्यापन पूजा में तांबे के कलश में चावल भरकर रखने का विधान है। अष्टदल कमल बनाकर भगवान विष्णु और लक्ष्मी का षोडशोपचार पूजन किया जाता है। ये सभी प्रक्रिया आचार्य संपन्न् करवाता है। पूजन के बाद हवन होता है और आचार्य सहित ब्राह्मणों को फलाहारी भोजन करवाकर वस्त्र, दान आदि दिया जाता है।

क्यों करना जरूरी है उद्यापन

क्यों करना जरूरी है उद्यापन

किसी भी व्रत की पूर्णता तभी मानी जाती है जब विधि-विधान से उसका उद्यापन किया जाए। उद्यापन करना इसलिए भी आवश्यक है क्योंकि हम जो व्रत करते हैं उसके साक्षी तमाम देवी-देवता, यक्ष, नाग आदि होते हैं। उद्यापन के दौरान की जाने वाली पूजा और हवन से उन सभी देवी-देवताओं को उनका भाग प्राप्त होता है। इस दौरान किए जाने वाले दान-दक्षिणा से व्रत की पूर्णता होती है।

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English summary
Parana means breaking the fast. Ekadashi Parana is done after sunrise on next day of Ekadashi fast. here is importance, Puja Vidhi.
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