Makar Sankranti 2024: मकर संक्रांति पर क्यों खाते हैं दही-चूड़ा? क्या है इसके पीछे का कारण?
Why We Eat Dahi Chura On Makar Sankranti: मकर संक्रांति का पर्व 15 जनवरी को मनाया जाएगा। इस दिन सूर्य मकर राशि में विराजमान होंगे, जिसकी वजह से उनके ताप में वृद्धि होती है इसलिए सर्दी कम होने लगती है।

इस दिन लोग पवित्र नदियों में स्नान करते हैं और दान पुण्य करते हैं, माना जाता है कि ऐसा करने से इंसान के सारे दुखों का अंत और पापों का नाश होता है।
दही-चूड़ा खाने की परंपरा है
इस खास दिन उत्तर भारत के लोग दही-चूड़ा खास तौर पर खाते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस दिन ऐसा क्यों किया जाता है? नहीं तो चलिए आपको बता देते हैं।
दही-चूड़ा के सेवन से मिलता मान-सम्मान
दरअसल माना जाता है कि , मकर संक्रांति के दिन दही-चूड़ा का सेवन करने से इंसान को यश-बल और मान-सम्मान की प्राप्ति होती है और जिन लोगों की कुंडली में ग्रह दोष होते हैं, वो भी इस दिन दही-चूड़ा का भोग सूर्यदेव को लगाएं तो उन्हें ग्रहदोष से मु्क्ति मिलती है और उनके रिश्तों में मजबूती आती है।
दही -चूड़ा सेहत के लिए बहुत अच्छा होता है
धार्मिक महत्व से इतर भी अगर बात करें तो दही -चूड़ा सेहत के लिए बहुत अच्छा होता है। ये कम कैलोरी वाला स्वादिष्ट आहार है जो कि शरीर को स्वाद के साथ-साथ अच्छी सेहत भी प्रदान करता है। इससे इंसान का पाचन तंत्र भी काफी मजबूत रहता है। इसका नियमित सेवन करने से इंसान का वजन भी कम होता है और वो ऊर्जावान भी रहता है।
सूर्य देव को दही चूड़ा का भोग लगाते वक्त निम्मलिखित आरती जरूर करनी चाहिए।
- ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।
- जगत् के नेत्रस्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।
- धरत सब ही तव ध्यान, ॐ जय सूर्य भगवान।।
- सारथी अरुण हैं प्रभु तुम, श्वेत कमलधारी। तुम चार भुजाधारी।।
- अश्व हैं सात तुम्हारे, कोटि किरण पसारे। तुम हो देव महान।।
- ऊषाकाल में जब तुम, उदयाचल आते। सब तब दर्शन पाते।।
- फैलाते उजियारा, जागता तब जग सारा। करे सब तब गुणगान।।
- ।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।
- संध्या में भुवनेश्वर अस्ताचल जाते। गोधन तब घर आते।।
- गोधूलि बेला में, हर घर हर आंगन में। हो तव महिमा गान।।
- ।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।
- देव-दनुज नर-नारी, ऋषि-मुनिवर भजते। आदित्य हृदय जपते।।
- स्तोत्र ये मंगलकारी, इसकी है रचना न्यारी। दे नव जीवनदान।।
- ।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।
- तुम हो त्रिकाल रचयिता, तुम जग के आधार। महिमा तब अपरम्पार।।
- प्राणों का सिंचन करके भक्तों को अपने देते। बल, बुद्धि और ज्ञान।।
- ।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।
- भूचर जलचर खेचर, सबके हों प्राण तुम्हीं। सब जीवों के प्राण तुम्हीं।।
- वेद-पुराण बखाने, धर्म सभी तुम्हें माने। तुम ही सर्वशक्तिमान।।
- ।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।
- पूजन करतीं दिशाएं, पूजे दश दिक्पाल। तुम भुवनों के प्रतिपाल।।
- ऋतुएं तुम्हारी दासी, तुम शाश्वत अविनाशी। शुभकारी अंशुमान।।
- ।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।
- ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।
- जगत् के नेत्रस्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।स्वरूपा।।
- धरत सब ही तव ध्यान, ॐ जय सूर्य भगवान।।
डिसक्लेमर- यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।












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