Maa Kushmanda Mantra-Bhajan: कूष्मांडा माता देंगी शक्ति, सुख और शांति का आशीर्वाद, करें इस मंत्र-भजन का पाठ
Maa Kushmanda Mantra and Bhajan: मां कूष्मांडा को नवदुर्गा में चौथी देवी के रूप में पूजा जाता है। देवी कुष्मांडा सूर्य की ऊर्जा और ब्रह्मांड की सृष्टि से जुड़ी हैं। माना जाता है कि मां कूष्मांडा की पूजा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है। मन और शरीर दोनों स्वस्थ रहते हैं और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
विशेषकर नवरात्रि में देवी कुष्मांडा के भजन और मंत्र का पाठ करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है। भक्तों का मानना है कि इस दिन 'ॐ ह्रौं ह्रीं श्रीं कूं महालक्ष्म्यै नमः' मंत्र का जाप करने से सभी प्रकार की बाधाएं दूर होती हैं और मनोवांछित फल प्राप्त होते हैं। इसके अलावा, देवी को कमल का फूल अर्पित करना और ध्यान के साथ भजन सुनना आध्यात्मिक ऊर्जा बढ़ाने में मदद करता है।

धार्मिक विद्वानों का कहना है कि रोजाना थोड़े समय के लिए मां कूष्मांडा का भजन और मंत्र सुनना या पढ़ना मानसिक तनाव कम करता है और जीवन में नई ऊर्जा भरता है। इस आस्था के माध्यम से लोग न सिर्फ आध्यात्मिक शक्ति पाते हैं, बल्कि अपने दैनिक जीवन में संतुलन और खुशहाली भी महसूस करते हैं।
🪷मां कूष्मांडा का मंत्र (Maa Kushmanda Mantra)
1. मुख्य मंत्र
"ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः"
- इसका अर्थ: "सृष्टि की निर्माता माँ कुष्मांडा को नमन।"
- इसे 108 बार या जितना संभव हो उतना जाप करें।
2. बृहत्तर मंत्र (पूजन के समय)
"ॐ ब्रह्माण्ड स्वरूपिण्यै कूष्माण्डायै नमः"
- इसका अर्थ: "जो ब्रह्मांड के स्वरूप में हैं, उस माँ कुष्मांडा को नमन।"
3. सरल आरती मंत्र
"जय माँ कुष्मांडा मैया, सर्व जग की रचयिता। दुःख हरने वाली माता, भक्तों की हो सहायिका।"
-इसे भजन या आरती के समय गाया जाता है।
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मां कूष्मांडा का भजन (Maa Kushmanda Bhajan)
चौथा जब नवरात्र हो, कुष्मांडा को ध्याते।
जिसने रचा ब्रह्माण्ड यह, पूजन है करवाते॥
आध्शक्ति कहते जिन्हें, अष्टभुजी है रूप।
इस शक्ति के तेज से कहीं छाव कही धुप॥
कुम्हड़े की बलि करती है तांत्रिक से स्वीकार।
पेठे से भी रीज्ती सात्विक करे विचार॥
क्रोधित जब हो जाए यह उल्टा करे व्यवहार।
उसको रखती दूर माँ, पीड़ा देती अपार॥
सूर्य चन्द्र की रौशनी यह जग में फैलाए।
शरणागत की मैं आया तू ही राह दिखाए॥
नवरात्रों की माँ कृपा करदो माँ।
नवरात्रों की माँ कृपा करदो माँ॥
जय माँ कुष्मांडा मैया।
जय माँ कुष्मांडा मैया॥
🪷माँ कूष्मांडा की पूजा विधि
- पुजन सामग्री: माँ कूष्मांडा को लाल रंग के फूल, विशेषकर गुड़हल, कमल और गेंदे के फूल अर्पित करें।
- भोग: माँ को मालपुआ, दही और हलवा अर्पित करें। मालपुआ मां को अधिक प्रिय है।
- मंत्र: "ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः" का जाप करें।
- आरती: नवरात्रि के चौथे दिन माँ कूष्मांडा की आरती गाने से विशेष पुण्य मिलता है।
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