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Karwa Chauth 2020: करवा चौथ की पूजा में मिट्टी का करवा ही लेना उचित

By Pt. Gajendra Sharma
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नई दिल्ली। करवा चौथ की पूजा में जो वस्तु सबसे महत्वपूर्ण है, वह है करवा। आकार की बात करें तो करवा एक लोटे की तरह होता है, जिसमें टोंटी लगी होती है। कई स्थानों पर करवा चौथ की पूजा पूरी होने पर पति अपनी पत्नी को इसी करवे से जल पिलाकर उसका व्रत खुलवाते हैं। हमारे देश के कुछ हिस्सों में काली मिट्टी में शक्कर मिलाकर करवा घर पर ही तैयार किया जाता है। आमतौर पर मिट्टी के करवे बाजार में आसानी से मिल जाते हैं। पिछले कुछ समय से यह चलन देखने में आ रहा है कि महिलाएं मिट्टी के करवे की जगह किसी धातु से निर्मित करवा पूजा में रखने लगी हैं।

 Karwa Chauth 2020: करवा चौथ की पूजा में मिट्टी का करवा ही लेना उचित

इस प्रयोग के पीछे उनका मत यह है कि पूजा के बाद करवा दान करना रहता है, तो मिट्टी की जगह स्टील का करवा अधिक काम का होता है। उपयोगिता के हिसाब से उनकी यह भावना अनुचित नहीं कही जा सकती, पर कोई भी नया परिवर्तन करने से पहले पुराने नियमों के आधार पर विचार कर लेना भी एक सही विकल्प हो सकता है।

शक्ति के पांच तत्व बताए गए हैं

जहां तक भारतीय धार्मिक नियमों की बात है, तो एक बात जान लेना उचित है कि हमारे विधि- विधान वैज्ञानिक दृष्टिकोण को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं। हमारे ऋषि-मुनियों ने सभी धार्मिक नियमों के निर्माण में प्रकृति और विज्ञान का समुचित संतुलन स्थापित किया है। यह बात करवा चौथ की पूजा में मिट्टी के करवे के उपयोग पर भी लागू होती है। भारतीय धर्मशास्त्रों में पानी को सभी जीवों की उत्पत्ति का आधार बताया गया है। हमारे यहां प्रकृति की शक्ति के पांच तत्व बताए गए हैं, जिनमें जल, वायु, आकाश, अग्नि और धरती का नाम आता है। जब हम मिट्टी का करवा बनाते हैं, तब मिट्टी को पानी में साना जाता है। इस तरह इसमें जल और धरती तत्व का समावेश होता है। इसके बाद करवे को सुखाया जाता है, जिसमें हवा और धूप के माध्यम से वायु और आकाश तत्व सम्मिलित होते हैं। इसके बाद करवे को आग में तपाया जाता है, जो अग्नि तत्व को जोड़ता है। इस तरह से मिट्टी का करवा प्रकृति की पांच प्रबल शक्तियों के समावेश का प्रतीक बनता है।

जल को परमात्मा का रूप माना जाता है

इन पांच तत्वों से निर्मित करवे में पूजा के समय जल भरते हैं। जल को परमात्मा का रूप माना जाता है। इस तरह प्रकृति की पांच अद्भुत शक्तियों के साथ परम ब्रह्म की कृपा भी करवे में स्थापित हो जाती है। करवा चौथ की पूजा के समापन पर जब पति अपनी पत्नी को करवे से पानी पिलाते हैं, तब इस मिट्टी के करवे के माध्यम से वे अपने दांपत्य को ब्रह्मांड और प्रकृति की शक्ति का साक्षी बनाते हैं, उनसे आशीर्वाद लेते हैं और अपने रिश्ते में नई ऊर्जा भरते हैं। इसीलिए करवा चौथ की पूजा में मिट्टी के करवे का प्रयोग करना ही उचित है।

यह पढ़ेंं: Karwa Chauth 2020: करवा चौथ 4 नवंबर को, जानिए व्रत कथा

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English summary
karva (karuaa) means a clay pot, and chauth (from char meaning four) corresponds to the fourth. here is th importance of clay pot.
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