Kartik Month 2018: जानिए पवित्र माह कार्तिक में क्या करें, क्या ना करें

नई दिल्ली। हिंदू धर्म में कार्तिक माह का विशेष महत्व है। इस माह को अत्यंत पवित्र माह की श्रेणी में रखा गया है। इस पूरे माह व्रत, तप, दान-पुण्य, पवित्र नदियों में स्नान का खास महत्व बताया गया है। कार्तिक माह भगवान विष्णु और शिव दोनों को अत्यंत प्रिय है। इस माह के बारे में शास्त्रों में यहां तक कहा गया है कि जो मनुष्य कार्तिक माह में व्रत, तप, मंत्र जप, दान-पुण्य और दीपदान करता है वह जीवित रहते हुए पृथ्वी पर समस्त सुखों का भोग करता है और मृत्यु के पश्चात बैकुंठ में निवास करता है। इस वर्ष कार्तिक माह 25 अक्टूबर, गुरुवार को प्रारंभ हो रहा है।

तारा स्नान

तारा स्नान

कार्तिक महीने के सभी दिनों में सूर्योदय से पूर्व और संध्याकाल में स्नान करना बेहद पवित्र माना गया है। इसे तारा स्नान कहा गया है। यानी प्रात: आकाश में तारों की उपस्थिति में स्नान और सायंकाल में आकाशमंडल में तारे उदित होने के बाद भोजन। पुराणों में इस तरह के स्नान को पापों से मुक्त करने वाला और कई पवित्र स्नानों के बराबर फल देने वाला बताया गया है। कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान करने की भी मान्यता है। इससे समस्त प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है। कार्तिक माह में प्रतिदिन सूर्योदय पूर्व और संध्याकाल में किया गया स्नान एक हजार बार गंगा स्नान के बराबर फल देने वाला माना गया है।

कार्तिक माह में क्या करें

कार्तिक माह में क्या करें

  • कार्तिक माह में तुलसी पूजा का विशेष महत्व है। भगवान विष्णु की प्रिय तुलसी में प्रतिदिन प्रात:काल जल अर्पित करने और सायंकाल में तुलसी के समीप दीप प्रज्जवलित करने से घर-परिवार में समस्त प्रकार के सुखों का भंडार भरता है।
  • कार्तिक माह में पवित्र नदियों में स्नान करना अत्यंत मोक्षदायी बताया गया है। इससे जाने-अनजाने में किए गए पापों का प्रायश्चित होता है और मृत्यु पश्चात मोक्ष प्राप्त होता है।
  • कार्तिक माह में मंत्र जाप का प्रभाव सामान्य दिनों की अपेक्षा करोड़ों गुना अधिक मिलता है। जो व्यक्ति किसी कार्य विशेष की पूर्ति के लिए मंत्र सिद्ध करना चाहते हैं वे इस माह में नियम से मंत्र जाप करें।
  • इस पूरे माह गायत्री मंत्र का जाप समस्त सुखों की प्राप्ति करवाता है। साहस, निडरता, बुरी नजरों से मुक्ति और जन्मकुंडली के समस्त दोषों के निवारण के लिए कार्तिक माह में गायत्री मंत्र का जाप अवश्य करें।
  • कार्तिक माह भगवान विष्णु का प्रिय माह है इसलिए उनकी पूजा-अर्चना से मां लक्ष्मी भी प्रसन्न् होती है। धन-संपत्ति की प्राप्ति और भौतिक सुखों की प्राप्ति के लिए प्रतिदिन विष्णुसहस्रनाम का पाठ करें।
  • मां लक्ष्मी को प्रसन्न् करने के लिए कार्तिक माह में श्रीसूक्त के पाठ भी किए जाते हैं।
  • इस माह में अपने तन-मन के साथ अपने आसपास के परिवेश को भी साफ-स्वच्छ रखना चाहिए। इससे लक्ष्मी प्रसन्न् होती है।
  • कार्तिक माह भगवान शिव का भी प्रिय माह है। बीमारियों से मुक्ति, लंबी आयु और निरोगी दीर्घ जीवन के लिए इस पूरे माह भगवान शिव का जल से अभिषेक करना अत्यंत शुभ रहता है।
  • इन खास नियमों का पालन करें

    इन खास नियमों का पालन करें

    • यदि आप पूरे कार्तिक माह में व्रत करते हैं तो कुछ बातों का ध्यान रखना आवश्यक है।
    • इस पूरे माह किसी दूसरे का दिया हुआ भोजन न करें। भोजन एक बार सायंकाल में तारे निकलने के बाद ही करें।
    • पूरे माह ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए मन, वचन और कर्म की शुद्धता रखें।
    • व्रती को पूरे माह रात्रि में धरती पर शयन करना चाहिए।
    • इस माह में लौकी, गाजर, नाशपाती, उड़द दाल, मूंग दाल, चना दाल, मटर खाने से बचना चाहिए।
    • पूरे माह सात्विक भोजन करें। अधिक तला, मसालेदार, मांसाहारी भोजन और शराब का सेवन न करें।
    • झूठ बोलना, चोरी करना, पाप कर्म करना, क्रोध करना निषेध है।

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