Kawad Yatra 2023: आज से शुरू हुई 'कांवड़ यात्रा'? जानिए महत्व और शिव-अभिषेक की तिथि
Kanwar Yatra 2023: आज सावन का पहला दिन है। मालूम हो कि शिव के प्रिय महीने सावन का इंतजार उनके भक्तों को सबसे ज्यादा रहता है। ये पूरा महीना महादेव को समर्पित है। प्रकृति भी इस मौसम में बहुत खुश रहती है। आषाढ़ की चुभती गर्मी के बाद जब सावन की बूंदें धरा को भिगोती हैं तो उसमें नवचेतना आ जाती है। चारों और हरियाली ही हरियाली दिखाई देती है और लोगों को तपन से छुट्टी मिलती है।

इसी महीने में भक्तों की 'कांवड़ यात्रा' भी होती है, जिसमें शिव-शंभू के भक्त हाथों में कांवड़ लिए, भगवा वस्त्र पहन कर, 'हर-हर महादेव' के उद्घोष के साथ पैदल हरिद्धार से गंगाजल लाने के लिए निकल पड़ते हैं। आपको बता दें भक्तगण पदयात्रा करके हरिद्वार से कांवड़ में गंगाजल लेकर आते हैं और अपने आराध्य स्थल के शिवलिंग का उस जल से अभिषेक करते हैं, इसी वजह से इस यात्रा को 'कांवड़ यात्रा 'कहते हैं, जो कि काफी कठिन होती है।
भोलेनाथ काफी प्रसन्न होते हैं
आपको बता दें कि इस साल ये यात्रा 4 जुलाई से शुरू होकर 31 अगस्त तक चलने वाली है। माना जाता है कि कांवड़ के जरिए गंगा जल शिव भगवान को अर्पित करने से भोलेनाथ काफी प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों को सारे कष्टों से मुक्त कर देते हैं। कांवड़ यात्रा का जिक्र 'वाल्मिकी रामायण' में भी मिलता है।
श्रवण कुमार थे पहले कांवड़ यात्री
मालूम हो कि सबसे पहले त्रेता युग में श्रवण कुमार ने 'कांवड़ यात्रा' शुरू की थी और तब से ही 'कांवड़ यात्रा' चली आ रही है। तो वहीं द्वापर युग में इसका जिक्र है। कहा जाता है कि अज्ञातवास के दौरान ही युधिष्ठिर, अर्जुन और भीम ने हरिद्वार से गंगाजल लाकर भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए ये यात्रा प्रारंभ की थी।
कांवड़ जल से शिवलिंग पर अभिषेक निम्नलिखित तिथियों पर होगा
- 15 जुलाई 2023
- 30 जुलाई 2023
- 13 अगस्त 2023
- 14 अगस्त 2023
- 28 अगस्त 2023
गौरतलब है कि इस बार सावन माह में आपको शंकर जी को खुश करने के ज्यादा मौके मिलने वाले हैं क्योंकि अधिमास की वजह से इस बार आपको सावन में आठ सोमवार के व्रत मिलेंगे। मालूम हो कि इस बार अधिमास 18 जुलाई से 16 अगस्त के बीच रहेगा।












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