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Janmashtami 2020: बाल कृष्ण की लीला से ब्रह्मा जी ने मानी हार

By Pt. Gajendra Sharma
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नई दिल्ली। जन्माष्टमी यानि कृष्ण का जन्म, अर्थात् भारत का सबसे बड़ा पर्व। यह पर्व है प्रेम का, यह पर्व है ममता का, यह पर्व है कृष्ण के बालरूप की अद्भुत लीलाओं में खो जाने का। ऐसा हो भी क्यों ना, आखिर श्री कृष्ण ही तो वह लीलाधर हैं, जिन्होंने आयु के हर वर्ग को उत्सव बना दिया। उनके बालपन की मधुरता, उनकी नटखट वृत्ति, उनकी प्रेम भावना, हर बात मन को लुभाती है।

आज उनके बालपन की एक ऐसी ही स्मृति को दोहराते हैं

आज उनके बालपन की एक ऐसी ही स्मृति को दोहराते हैं

एक बार की बात है। जगतपिता ब्रह्मा के मन में बाल कृष्ण की परीक्षा लेने का विचार आया। उन्होंने कुछ ऐसा करने का विचार किया, जो बालक कृष्ण को इतने संकट में डाल दे कि श्री विष्णु के इस अवतार को उनके पास सहायता मांगने आना पड़े। वास्तव में यह उनका अहंकार था और बालक कृष्ण का तो जन्म ही सबके अहंकार को समाप्त करने के लिए हुआ था।

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ब्रह्मा जी ने उस समय की प्रतीक्षा की

ब्रह्मा जी ने उस समय की प्रतीक्षा की

अपनी योजना के अनुसार ब्रह्मा जी ने उस समय की प्रतीक्षा की, जब बालक कृष्ण अपने बाल सखाओं के साथ वन में खेलने और गाय चराने जाते थे। दोपहर में खेलकर थकने के बाद सभी विश्राम कर रहे थे, तभी ब्रह्मा जी ने अपना दांव चला। उन्होंने अपनी शक्ति से सभी बाल ग्वालों और गायों को सम्मोहन निद्रा में डालकर उठा लिया और स्वर्ग में छिपा दिया। केवल कृष्ण जी ही गहरी नींद में सोते रह गए। पर क्या वास्तव में श्री कृष्ण सोए हुए थे? वे तो ब्रह्मा जी के खेल का आनंद ले रहे थे। संध्या काल में जब घर जाने का समय हुआ, तो श्री कृष्ण ने अपनी लीला से हर एक बाल गोपाल और गाय का रूप धरा और सब घरों में पहुंच गए। किसी को भान ही ना हुआ कि आज उनके घर में उनकी संतान नहीं, बल्कि स्वयं भगवान पधारे हैं। यह अवश्य हुआ कि वृंदावन की हर माता ने उस दिन अद्भुत ममता का अनुभव किया।

ब्रह्मा जी अपनी हार देखना नहीं चाहते थे

ब्रह्मा जी अपनी हार देखना नहीं चाहते थे

उधर, ब्रह्मा जी यही देखना चाहते थे कि सब बाल गोपालों के गायब होने से वृंदावन में कितना हाहाकार मचता है और कृष्ण कितने परेशान होते हैं। अपने खेल का समापन देखने जब वे दिव्य रूप में वृंदावन पधारे, तो पाया कि हर घर में अद्भुत स्नेह की लहर बह रही है। ब्रह्मा जी अपनी हार देखना नहीं चाहते थे, सो उन्होंने पूरे एक सप्ताह तक बाल गोपालों को सुलाए रखा। यहां श्री कृष्ण भी अनेक रूप रखकर पूरे वृंदावन की हर मां का दिल संभाले रहे। अंततः ब्रह्मा जी बाल कृष्ण के सामने प्रकट हुए और उनसे अपने कृत्य की क्षमा मांगकर सब गोपालों और गायों को वापस लौटा दिया।

श्री कृष्ण ने ब्रह्मा जी का अहंकार तोड़ दिया

श्री कृष्ण ने ब्रह्मा जी का अहंकार तोड़ दिया

इस तरह श्री कृष्ण ने अपनी दिव्यता से ब्रह्मा जी का अहंकार तोड़ दिया। उधर वृंदावन की समस्त माताओं को कभी समझ ना आया कि पिछले एक सप्ताह से उनकी संतानों में ऐसा क्या सम्मोहन पैदा हुआ था कि वे पल भर भी उनकी छवि मन से ना हटा पा रही थीं। आखिर बाल कृष्ण की लीला को कौन समझ सका है?

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English summary
Read Lord Krishna and Brahma Story on Janmashtami .
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