संगीत बिना अधूरी है होली: जानिए ठुमरी से पॉप तक

लखनऊ। भारतीय शास्त्रीय संगीत में होली के त्यौहार का बड़ा महत्व है। होली के रंग और संगीत के सात सुर अभी मिल कर जीवन में मधुरता घोल देते हैं। रंगों से खेलते समय मन में खुशी, प्यार और उमंग छा जाते हैं और अपने आप तन मन नृत्य करने को मचल उठता है। लय और ताल के साथ पैर को रोकना मुश्किल हो जाता है। रंग अपना असर बताते हैं, सुर और ताल अपनी धुन में सब को डुबोये चले जाते हैं।

पिया का प्यार पाना है तो इन रंगो से खेलें होली..

Holi is Incomplete without Songs and Music

शास्त्रीय संगीत में धमार का होली से गहरा संबंध है। ध्रुपद, धमार, छोटे व बड़े ख्याल और ठुमरी में भी होली के गीतों का सौंदर्य देखते ही बनता है। कथक नृत्य के साथ होली, धमार और ठुमरी पर प्रस्तुत की जाने वाली अनेक सुंदर बंदिशें आज भी अत्यंत लोकप्रिय हैं - चलो गुंइयाँ आज खेलें होरी कन्हैया घर। इसी प्रकार संगीत के एक और अंग ध्रुपद में भी होली के सुंदर वर्णन मिलते हैं। ध्रुपद में गाये जाने वाली एक लोक के बोल देखिए-

"खेलत हरी संग सकल, रंग भरी होरी सखी,
कंचन पिचकारी करण, केसर रंग बोरी आज।
भीगत तन देखत जन, अति लाजन मन ही मन,
ऐसी धूम बृंदाबन, मची है नंदलाल भवन।"

धमार और ध्रुपद में काफी समानताएं हैं पर एक विशेष अंतर यह है की इनमे होली वसंत और फाल्गुन के गीतों की भरमार है। एक विशष्ट उदाहरण है- आज पिया होरी खेरन आये। वसंत राग पर आधारित एक गीत है

फगवा ब्रज देखन को चलो रे,
फगवे में मिलेंगे, कुँवर कां
जहाँ बात चलत बोले कागवा

होली पर गाने बजाने का अपने आप वातावरण बन जाता है और जन जन पर इसका रंग छाने लगता है। इस अवसर पर एक विशेष लोकगीत गाया जाता है जिसे होली कहते हैं। अलग-अलग स्थानों पर होली के विभिन्न वर्णन सुनने को मिलते है जिसमें उस स्थान का इतिहास और धार्मिक महत्व छुपा रहता है। जहाँ ब्रज धाम में राधा और कृष्ण के होली खेलने के वर्णन मिलते हैं वहीं अवध में राम और सीता के।

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अलग-अलग रागों पर आधारित होली के गीत

भारतीय फ़िल्मों में भी अलग-अलग रागों पर आधारित होली के गीत प्रस्तुत किए गए हैं जो काफी लोकप्रिय हुए हैं। 'सिलसिला' के गीत "रंग बरसे भीगे चुनर वाली, रंग बरसे" और 'नवरंग' के "आया होली का त्योहार, उड़े रंगों की बौछार," को आज भी लोग भूल नहीं पाए हैं। मदर इण्डिया का गीत होली आई रे कन्हाई रंग छलके सुना दे ज़रा बांसुरी;मोहे भाये ने हरजाई रंग हल्के। आज भी हर होली में धूम मचाता सुनाई पद जाता है।

रंग और संगीत चोली दामन की तरह

वहीँ अक्षय कुमार और अमिताभ बच्चन अभिनीत फिल्म वक्त में होली के गीत को रोकिंग कलेवर पहना कर उसे इंग्लिश से भी मिक्स किया गया है- डू मी अ फेवर लेट्स प्ले होली।

इस तरह, रंग और संगीत चोली दामन की तरह एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। उनका असर मन पर, कैसे और कितनी हद तक होता है, यह होली के त्योहार में दिखाई देता है। मन की खुशी, प्रेम, उमंग, तरंग इन सब भावों को अभिव्यक्त करने के लिये रंग और संगीत होली के त्योहार का अनोखा माध्यम बन जाते हैं। लोग अपने मन के दुख और द्वेष भाव को मिटाकर रंगों की दुनिया में सुर और ताल के संग अपने आप को डुबो लेते हैं। चारों तरफ़ खुशी, प्यार और अपनेपन का एक अलग वातावरण बन जाता हैं। रंग मन के भावों को अभिव्यक्त करते हैं, संगीत जीवन की साधना है, और इन दोनों के समन्वय की मिसाल है होली का बेमिसाल त्योहार!

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