Hanuman Jayanti 2025: राजस्थान का सालासर बालाजी मंदिर, जहां दाढ़ी-मूंछ वाले हनुमानजी के होते चमत्कारी दर्शन
Hanuman Jayanti 2025 Salasar Balaji Temple: देश में 12 अप्रैल 2025 को हनुमान जयंती मनाई जा रही है। जैसे-जैसे हनुमान जयंती का पर्व नज़दीक आ रहा है, वैसे-वैसे राजस्थान का सालासर बालाजी धाम श्रद्धा और आस्था के रंगों में डूबता जा रहा है। सालासर बालाजी धाम देश का एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां भगवान हनुमान जी दाढ़ी और मूंछों के साथ विराजमान हैं।
वनइंडिया हिंदी से बातचीत में सालासर बालाजी मंदिर पुजारी परिवार के अजय पुजारी ने बताया कि हनुमान जयंती 2025 के पर सालासर बालाजी के पट शनिवार तड़के 2 बजे से खुल जाएंगे, जो रात 9 बंद होंगे। इस दौरान हनुमान जयंती पर करीब डेढ़ लाख भक्तों का सालासर धाम पहुंचने का अनुमान है। सामान्य दिनों में सालासर बालाजी मंदिर सुबह छह से रात 9 बजे खुला रहता है।

अजय पुजारी कहते हैं कि सालासर बालाजी में हनुमान सेवा समिति के लिए तमाम व्यवस्थाओं को नया रूप दिया गया है। भक्त 8 लाइनों से होकर बाबा के दर्शन में पहुंचकर दर्शन कर सकेंगे। दिव्यांगजनों के लिए भी खास इंतजाम किए गए हैं। उनके लिए अलग से कतार के साथ-साथ वाहन की सुविधा भी उपलब्ध करवा जा रही है।

सालासर बालाजी की चमत्कारी मूर्ति और ऐतिहासिक कथा
राजस्थान के चूरू जिले के सुजानगढ़ कस्बे के पास गांव सालासर में स्थित यह हनुमान मंदिर सिर्फ भक्ति का स्थान नहीं, बल्कि एक गहरी किवदंती और चमत्कारी इतिहास को संजोए हुए है। सन 1811 में राजस्थान के नागौर जिले के आसोटा गांव में एक जाट किसान को खेत जोतते समय ज़मीन में एक पत्थर मिला, जिसे साफ करने पर बालाजी की छवि प्रकट हुई। उसी रात बालाजी ने सपने में आसोटा के ठाकुर और अपने परमभक्त मोहनदास महाराज को आदेश दिया कि मूर्ति को सालासर ले जाकर वहां स्थापित किया जाए और मूर्ति वहीं स्थापित हुई, जहां बैलगाड़ी अपने आप रुक गई। सालासर बालाजी मंदिर के बारे में यह भी मान्यता है कि मोहनदास को बालाजी ने दाढ़ी-मूंछ वाले स्वरूप में दर्शन दिए, और इसीलिए आज भी यहां यही रूप पूजित होता है।

सालासर बालाजी के लक्खी मेले का शुभारंभ
हनुमान जयंती के मौके पर यहां तीन दिवसीय लक्खी मेले का आयोजन हो रहा है, जो 12 अप्रैल, चैत्र पूर्णिमा को समाप्त होगा। लाखों श्रद्धालु देशभर से यहां पहुंच रहे हैं, मंदिर फूलों से सजा हुआ है और पूरा परिसर भक्ति से गूंज रहा है।श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सालासर धाम को नो व्हीकल एंट्री, नो पार्किंग, नो वेंडर जोन घोषित किया गया है। 180+ CCTV कैमरे, 700 सुरक्षा गार्ड और सैकड़ों पुलिसकर्मी सुरक्षा संभाल रहे हैं। गर्मी से राहत के लिए 6 किमी लंबी रेलिंग पर टेंट, ठंडे पानी के स्टॉल और 5 लाख से अधिक पानी के पाउच वितरित किए जा रहे हैं।

ध्वजा चढ़ेगी, भंडारे सजेंगे
श्रीकृष्ण गौशाला परिसर में 108 फीट ऊंचे स्तंभ पर 51 फीट की भव्य ध्वजा फहराई जाएगी और शाम को रंगीन आतिशबाज़ी के साथ उत्सव का समापन होगा। विभिन्न स्थानों पर भंडारे भी आयोजित हो चुके हैं, जहां हजारों श्रद्धालु निशुल्क प्रसाद और भोजन का आनंद ले रहे हैं।
सालासर बालाजी को चूरमे का भोग
सालासर बालाजी को बाजरे के चूरमे का भोग लगाया जाता है, क्योंकि आसोटा गांव में मूर्ति प्रकट होने पर सबसे पहला भोग एक किसान की पत्नी द्वारा चढ़ाया गया चूरमा ही था। आज तक यह परंपरा चली आ रही है। चैत्र नवरात्र की शुरुआत से अब तक 5 लाख से अधिक श्रद्धालु सालासर बालाजी के दर्शन कर चुके हैं। हनुमान जयंती पर इसमें करीब डेढ़ लाख का इजाफा और हो सकता है। सालासर आज केवल राजस्थान ही नहीं, बल्कि पूरे देश का एक जीवंत आस्था केंद्र बन चुका है।
How to reach Salasar Balaji Dham: कैसे जाएं श्री सालासर बालाजी मंदिर?
सड़क मार्ग (By Road)
- जयपुर से दूरी: लगभग 170 किमी
- दिल्ली से दूरी: लगभग 280 किमी
- बीकानेर से दूरी: लगभग 165 किमी
- सीकर से दूरी: लगभग 100 किमी
नियमित बसें और टैक्सियाँ इन शहरों से सालासर के लिए उपलब्ध हैं। राजस्थान रोडवेज की बसें भी सालासर तक सीधी जाती हैं।
रेल मार्ग (By Train)
- सुजानगढ़ स्टेशन - लगभग 27 किमी
- लाडनूं स्टेशन - लगभग 30 किमी
- डीडवाना स्टेशन - लगभग 50 किमी
इन स्टेशनों से सालासर के लिए टैक्सी, ऑटो या लोकल बसें आसानी से मिल जाती हैं।
हवाई मार्ग (By Air)
- जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट - लगभग 170 किमी
- दिल्ली इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट - लगभग 280 किमी
- हवाई अड्डे से आप टैक्सी या बस लेकर सालासर तक पहुंच सकते हैं।












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