Hanuman Janmotsav: भारत के प्रसिद्ध हनुमान मंदिर कौन-कौन से हैं? जानें इनसे जुड़ी पौराणिक मान्यताएं
Famous Hanuman Temples in India: हनुमान जन्मोत्सव जिसे हनुमान जयंती के नाम से भी जाना जाता है। हनुमान जयंती हिन्दू पंचांग के अनुसार, चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है। इस बार हनुमान जन्मोत्सव का पर्व 12 अप्रैल 2025 को मनाया जा रहा है।
भगवान हनुमान को शक्ति, भक्ति और साहस का प्रतीक माना जाता है। राम भक्त हनुमान के जन्मोत्सव पर भक्त भगवान हनुमान की विशेष पूजा करते हैं। फूल, चढ़ावा और दीप जलाकर पूजा की जाती है। हनुमान जयंती के अवसर पर रामायण का पाठ किया जाता है क्योंकि हनुमान जी का जीवन भगवान राम के साथ जुड़ा हुआ है। भक्त आरती भी करते हैं। आइए भगवान हनुमान की जन्मोत्सव के अवसर पर जानते हैं भारत के प्रसिद्ध और सिद्ध हनुमान मंदिरों के बारे में और उनकी मान्यता क्या है?

काशी के संकट मोचन हनुमानजी का मंदिर
वाराणसी में स्थित संकट मोचन हनुमान मंदिर चार सौ साल पुराना पौराणिक मंदिर है। पुराणों के अनुसार इस मंदिर का निर्माण संवत 1631 और 1680 के बीच हुआ था। गोस्वामी तुलसीदास ने इस मंदिर की स्थापना करवाई थी। मान्यता है कि तुलसीदास जब रामचरित मानस लिख रहे थे तब उनकी प्रेरणा स्रोत संकट मोचन थे। कहते हैं इसी स्थान पर गोस्वमी तुलसीदास को बजरंगबली के साक्षात दर्शन हुए थे और तभी मिट्टी का स्वरूप धारण कर संकट मोचन बजरंबली स्थापित हो गए। मान्यता है यहां पर दर्शन मात्र से भक्तों के संकट दूर हो जाते हैं।
अयोध्या का हनुमान गढ़ी मंदिर
अयोध्या में स्थित हनुमान गढ़ी मंदिर अयोध्या की तीर्थ स्थलों में से एक है और यहाँ हर साल लाखों भक्त श्रद्धा आते हैं। हनुमान गढ़ी मंदिर अयोध्या मंदिर अयोध्या के बीचो-बीच एक पहाड़ी पर स्थित है, जहां तक पहुंचने के लिए 76 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। मंदिर में भगवान हनुमान की एक बड़ी और भव्य मूर्ति स्थापित है, जो भक्तों को विशेष रूप से आकर्षित करती है।
इस मंदिर की मूर्ति को भव्य और अद्भुत रूप में सजाया गया है, और इसकी आरती बहुत धूमधाम से की जाती है। हनुमान गढ़ी मंदिर के बारे में मान्यता है कि यह मंदिर उस स्थान पर स्थित है जहां भगवान हनुमान ने सीता माता के अयोध्या लौटने के बाद भगवान राम के दर्शन किए थे। भक्त यहां हनुमान जी से शक्ति, साहस और सुरक्षा की कामना करते हैं।
लखनऊ का अलीगंज पुराना हनुमान मंदिर
लखनऊ के अलीगंज में पुराना हनुमान मंदिर को लेकर कई मान्यताएं हैं। ये मंदिर त्रेतायुग से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि वनवास के दौरान माता सीता ने यहीं विश्राम किया था। हीवेट पॉलीटेक्निक के पास एक बाग हुआ करता था जिसे हनुमान बाड़ी कहा जाता था। यहां पर हनुमान भगवान और लक्ष्मण जी सीता माता को वन में छोड़ने के लिए बिठुर ले जा रहे थे तब यहीं पर माता सीता रुकी थी और हनुमान भगवान ने सीता मां की सुरक्षा की थी।
इस्लाम काल में इसका नाम इस्लाम बाड़ी कर दिया गया था। इस मंदिर का जीर्णोद्धार अवध के नवाब शुजाउद्दौला की बेगम आलिया बेगम ने करवाया था। मान्यता है कि नवाब शुजाउद्दौला की बेगम को एक बार सपने में बजरंग बली आए थे और उन्होंने सपने में अपनी मूर्ति इस बाग में होने की बात की थी। जिसके बाद बेगम ने वहां खुदवाई करवाई और वहां पर हनुमान भगवान की मूर्ति गड़ी पाई गई थी। इस मूर्ति को वहां से सिंहासन पर रखकर हाथी से इमामबाड़े ले जाने की कोशिश की गई ताकि वहां पर इस मूर्ति की स्थापना की जा सके महावत मूर्ति को लेकर बढ़ा तो हाथी अलीगंज के मंदिर के पास बैठ गया और वहां से आगे नहीं बढ़ा जिसके बाद वहीं पर मूर्ति की स्थापना कर दी गई। इस मंदिर के छत्र पर चांद भी लगा हुआ है। अलीगंज पुराने हनुमान मंदिर में आने वाले भक्त की हर मुराद पूरी होती है।
प्रगायराज का हनुमान मंदिर
हनुमान मंदिर, इलाहाबाद (अब प्रयागराज) एक प्रमुख धार्मिक स्थल है जो भगवान हनुमान को समर्पित है। हनुमान मंदिर का निर्माण 20वीं सदी के शुरुआती वर्षों में हुआ था। मंदिर का निर्माण भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के समय में हुआ, जब देश में धार्मिकता के साथ-साथ राष्ट्रीयता का भी जागरण हो रहा था।
यहां आने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामना जरूर पूरी होती है। ऐसा माना जाता है कि जो लोग सच्चे मन से यहाँ पर हनुमान जी की भक्ति करते हैं, उनकी सभी इच्छाएँ पूरी होती हैं। इस मंदिर में भगवान हनुमान की एक विशाल मूर्ति स्थापित है। इस मूर्ति की विशेषता यह है कि इसे प्राचीन कला शैली में बनाया गया है।
राजस्थान का मेंहदीपुर बालाजी मंदिर
मेहंदीपुर बालाजी मंदिर, राजस्थान के दौसा जिला स्थित एक प्रसिद्ध मंदिर है। यह मंदिर भगवान हनुमान के एक रूप, बालाजी को समर्पित है और यहां भक्त अपनी समस्याओं और संकटों से मुक्ति के लिए आते हैं। यह स्थान विशेष रूप से उन लोगों के लिए है जिनका मानसिक संतुलन बिगड़ गया हो।
यहां लोग भूत-प्रेत की बाधा से मुक्ति और निवारण के लिए आते हैं। यहां आने वाले भक्तों को अपने संकटों से मुक्ति और मानसिक शांति मिलती है। यहां पर भक्तों द्वारा हनुमान चालीसा का पाठ किया जाता है और विशेष पूजा अर्चना की जाती है। मंदिर में आने वाले भक्त बहुत से मुद्दों को लेकर यहां आते हैं जैसे कि बुरी आत्माएं, मानसिक समस्या, भूत-प्रेत। मान्यता है कि यहां की पूजा से भक्त लाभान्वित होते हैं।
राजस्थान का सालासर बालाजी मंदिर
सालासर बालाजी मंदिर राजस्थान के चुरु जिले के सालासर गांव में स्थित है और यहाँ हर वर्ष लाखों श्रद्धालु आते हैं। यह मंदिर भगवान हनुमान को समर्पित है और भक्तों के लिए एक प्रमुख तीर्थ स्थल है। सालासर बालाजी की पूजा का इतिहास 18वीं सदी से शुरू होता है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, एक गाँव के एक साधु ने हनुमान जी की मूर्ति की खोज की थी। इसके बाद से ही इस स्थान को धार्मिक महत्व प्राप्त हुआ और यहाँ एक भव्य मंदिर का निर्माण किया गया। यहां भगवान हनुमान की एक अद्वितीय मूर्ति स्थापित है, जिसे विशेष रूप से पूजा जाता है। इस मूर्ति की विशेषता यह है कि यह मूर्ति काले पत्थर से बनी है। मंदिर में परिक्रमा करने की परंपरा भी है, जहाँ भक्त मंदिर के चारों ओर परिक्रमा करते हैं।
पटना बिहार का महावीर मंदिर
बिहार राज्य की राजधानी पटना में स्थित महावीर मंदिर, जिसे हनुमान मंदिर के नाम से भी जाना जाता हयह मंदिर भगवान हनुमान को समर्पित है और यहां हर दिन हजारों भक्त आते हैं इस मंदिर का निर्माण 1982 में हुआ था मंदिर का निर्माण 1982 में हुआ था और यह 1947 में भारत के विभाजन के बाद पटना में आए हिंदू शरणार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्र बन गया था।
महावीर मंदिर पटना के चितकोहरा में स्थित ये मंदिर दीन-दुखियों की सेवा के लिए जाना जाता है। समय-समय पर यहां दीन-दुखियों और जरूरतमंदों की सहायता की जाती है। महावीर मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि समाज सेवा के लिए भी जाना जाता है।
शिमला, हिमाचल प्रदेश का जाखू मंदिर
शिमला में जाखू मंदिर हनुमान जी को समर्पित एक प्रसिद्ध मंदिर है। यह मंदिर जाखू हिल पर स्थित है, जो शिमला की सबसे ऊंची चोटी है। मंदिर समुद्र तल से 8,048 फीट (2,455 मीटर) की ऊंचाई पर है। इस मंदिर की मुख्य विशेषता 108 फीट ऊंची हनुमान जी की प्रतिमा है, जो शिमला के किसी भी कोने से दिखाई देती है।
मंदिर के आसपास हनुमान जी की रामायण से जुड़ी कई कथाएं प्रचलित हैं, जैसे कि जब लक्ष्मण को संजीवनी बूटी लाने के लिए हनुमान जी को द्रोणागिरी पर्वत पर भेजा गया था, तब वे यहां रुके थे। मंदिर के बारे में माना जाता है कि भगवान हनुमान की स्वयंभू मूर्ति प्रकट होने के बाद यक्ष ऋषि ने यहां मंदिर का निर्माण करवाया था।
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