Guru Purnima Ki Aarti: तरक्की चाहिए तो गुरु पूर्णिमा पर जरूर करें ये आरती
Guru Purnima ki Aarti: आषाढ़ माह की पूर्णिमा के दिन गुरु पूर्णिमा मनाई जाती है। इसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। बिना गुरु के इंसान तरक्की हासिल नहीं कर सकता है। हमारा शास्त्रों में तो गुरु का स्थान ईश्वर से भी ऊंचा बताया गया है। इसलिए गुरु पूर्णिमा के दिन इंसान को सच्चे मन से अपने गुरु की पूजा करनी चाहिए, ऐसा करने से इंसान को हर तरह का सुख मिलता है और वो तरक्की प्राप्त करता है। इस बार ये पावन दिन 3 जुलाई को है।

गुरु पूर्णिमा की आरती
- जय गुरुदेव अमल अविनाशी, ज्ञानरूप अन्तर के वासी,
- पग पग पर देते प्रकाश, जैसे किरणें दिनकर कीं।
- आरती करूं गुरुवर की॥
- जब से शरण तुम्हारी आए, अमृत से मीठे फल पाए,
- शरण तुम्हारी क्या है छाया, कल्पवृक्ष तरुवर की।
- आरती करूं गुरुवर की॥
- ब्रह्मज्ञान के पूर्ण प्रकाशक, योगज्ञान के अटल प्रवर्तक।
- जय गुरु चरण-सरोज मिटा दी, व्यथा हमारे उर की।
- आरती करूं गुरुवर की।
- अंधकार से हमें निकाला, दिखलाया है अमर उजाला,
- कब से जाने छान रहे थे, खाक सुनो दर-दर की।
- आरती करूं गुरुवर की॥
- संशय मिटा विवेक कराया, भवसागर से पार लंघाया,
- अमर प्रदीप जलाकर कर दी, निशा दूर इस तन की।
- आरती करूं गुरुवर की॥
- भेदों बीच अभेद बताया, आवागमन विमुक्त कराया,
- धन्य हुए हम पाकर धारा, ब्रह्मज्ञान निर्झर की।
- आरती करूं गुरुवर की॥
- करो कृपा सद्गुरु जग-तारन, सत्पथ-दर्शक भ्रांति-निवारण,
- जय हो नित्य ज्योति दिखलाने वाले लीलाधर की।
- आरती करूं गुरुवर की॥
- आरती करूं सद्गुरु की
- प्यारे गुरुवर की आरती, आरती करूं गुरुवर की।
गुरु पूर्णिमा की आरती कितने बजे होती है?
गुरु पूर्णिमा की आरती सुबह करने से लाभ होता है।
गुरु पूर्णिमा की आरती कितनी बार करनी चाहिए?
गुरु पूर्णिमा की आरती एक बार ( सुबह ) के वक्त करनी चाहिए।

गुरु पूर्णिमा की आरती करने के नियम
गुरु पूर्णिमा की आरती करते वक्त आपका मन और तन दोनों स्वच्छ होना चाहिए। आप नहा-धोकर स्वच्छ कपड़े पहनकर पूजा करनी चाहिए।
गुरु पूर्णिमा की पूजा कब और किस लिए करते हैं?
इंसान वो ही सुखी जिससे पास गुरु होता है, गुरु के बिना इंसान एक पग भी सही नहीं चल सकता है। गुरु का स्थान तो भगवान से भी ऊपर बताया गया है।












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